.. सुचिस्मिता अग्रवाल ..
बेंगलूरु/दक्षिण भारत। अगले एक दशक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हमारे काम करने के तरीके को इस कदर बदल देगी कि आज की कई नौकरियां और कार्यक्षेत्र बिल्कुल नए रूप में नजर आएंगे। यह बदलाव केवल मशीनों के आने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसानी काबिलियत और तकनीक के मेल का एक नया दौर होगा।
- अगर बैंकिंग क्षेत्र की बात करें तो अगले दस सालों में पारंपरिक बैंकिंग पूरी तरह डिजिटल और हाइपर-पर्सनलाइज्ड हो जाएगी। एआई एल्गोरिदम आपके खर्च करने की आदतों का विश्लेषण करके न केवल धोखाधड़ी को रोकेगा, बल्कि आपकी वित्तीय जरूरतों को आपसे पहले समझकर निवेश की सलाह भी देगा।
बैंक की लंबी लाइनों की जगह अब पूरी तरह एआई संचालित चैटबॉट्स लेंगे, जो इंसानों की तरह ही जटिल वित्तीय समस्याओं का समाधान करने में सक्षम होंगे। डेटा एंट्री और क्लेरिकल काम भले ही कम हो जाएं, लेकिन साइबर सुरक्षा और डेटा माइनिंग जैसे क्षेत्रों में रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।
- शिक्षा के क्षेत्र में एआई एक पर्सनल ट्यूटर की भूमिका निभाएगा। आने वाले समय में हर छात्र के पास अपनी गति और क्षमता के अनुसार सीखने का विकल्प होगा। क्लासरूम में एक शिक्षक केवल जानकारी देने वाला नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक की भूमिका में होगा। एआई यह तय करेगा कि किस छात्र को किस विषय में ज्यादा मेहनत की जरूरत है। यह 'वन साइज फिट्स ऑल' वाली पुरानी शिक्षा पद्धति को बदल देगा।
- इसी तरह मेडिकल क्षेत्र में एआई डॉक्टरों का सबसे बड़ा सहयोगी बनेगा। बीमारियों का निदान अब केवल बाहरी लक्षणों के आधार पर नहीं, जेनेटिक डेटा और एआई की भविष्यवाणियों के आधार पर होगा। सर्जरी से लेकर दवाइयों के निर्माण तक एआई की सटीकता इंसानी गलतियों की गुंजाइश को लगभग खत्म कर देगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
- सुरक्षा और पुलिसिंग के मामले में एआई प्रिडिक्टिव पुलिसिंग का दौर लेकर आएगा। पुलिस बल अपराध होने के बाद पहुंचने के बजाय एआई के जरिए उन पैटर्न्स को पहचान सकेंगे, जिनसे यह पता चल सकेगा कि किस इलाके में जुर्म होने की आशंका ज्यादा है। स्मार्ट सीसीटीवी और फेशियल रिकग्निशन तकनीक अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन बना देगी।
- भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि में भी एआई एक मसीहा बनकर उभरेगी। किसान अब सिर्फ मानसून के भरोसे नहीं रहेंगे। एआईआधारित सेंसर मिट्टी की नमी और फसल के स्वास्थ्य की पल-पल की जानकारी देंगे। ड्रोन के जरिए कीटनाशकों का छिड़काव और एआई द्वारा उपज की सही कीमत का अनुमान लगाना खेती को एक घाटे के सौदे से बदलकर एक मुनाफे वाले बिजनेस में तब्दील कर देगा।
कुल मिलाकर, आने वाला दशक उन लोगों का होगा, जो तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। हालांकि यह सच है कि कुछ पारंपरिक और बार-बार दोहराए जाने वाले काम एआई के पास चले जाएंगे, लेकिन इसके साथ ही ऐसी नौकरियों के अवसर भी पैदा होंगे, जो आज अस्तित्व में ही नहीं हैं।
भविष्य में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हम एआई का उपयोग कितनी समझदारी से करते हैं। रचनात्मकता, नैतिकता और मानवीय संवेदना ऐसे क्षेत्र बने रहेंगे, जहां इंसान हमेशा एआई से आगे रहेगा। इसलिए डरने के बजाय हमें अपनी स्किल्स को अपडेट करने और इस नई तकनीक को एक साथी की तरह अपनाने की जरूरत है।