बिहार सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग के संबंध में जो नियमावली तैयार की है, उसकी बहुत जरूरत महसूस की जा रही थी। अन्य राज्यों को भी ऐसी नियमावली तैयार कर अनुशासन का माहौल बनाना चाहिए। हाल के वर्षों में ऐसे मामले सामने आए, जब कुछ सरकारी कर्मचारी अपना कर्तव्य निभाने के बजाय सोशल मीडिया के लिए सामग्री तैयार करने में ज्यादा व्यस्त रहे। ये कर्मचारी फिल्मी संवाद दोहराते हैं, गानों पर नृत्य करते हैं और अपने वीडियो वायरल कर वाहवाही पाने की कोशिश करते हैं। उनमें से कुछ तो अपनेआप को बड़ी सेलिब्रिटी समझने लगते हैं, जबकि ऐसी हरकतें उस विभाग की छवि को धूमिल करती हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे अधिकारी और कर्मचारी मिल जाएंगे, जो जनता के बीच मशहूर होने के लिए खास किस्म के तौर-तरीके अपनाते हैं। एक अधिकारी वीडियो एडिटिंग की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर खुद को ऐसे पेश करते हैं, जैसे वे कोई सम्राट हों। वे अपने वाहन से उतरने, चलने और दफ्तर में दाखिल होने को किसी फिल्म की तरह दिखाते हैं। ऐसे वीडियो का शीर्षक कुछ इस तरह होता है- 'पावर ऑफ ... ऑफिसर, यह होती है ताकत, दुनिया करती है सैल्यूट!' इसका किशोरों और युवाओं पर खासा रौब पड़ता है। वे सोचते हैं कि इन लोगों को सच में ही सारी दुनिया सैल्यूट करती है। सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों का काम है- जनता की सेवा करना, सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारना। जो व्यक्ति अपना समय और ऊर्जा वीडियो बनाने में ही लगाएगा, वह अपने काम को कितने मनोयोग से कर पाएगा?
कुछ अधिकारी व कर्मचारी आत्मप्रचार से दूर रहकर ऐसे विषयों पर वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं, जिनसे जनता को बहुत फायदा होता है। एक पुलिस अधिकारी साइबर सुरक्षा संबंधी मामलों के विशेषज्ञ हैं। उनका हर वीडियो ज्ञानवर्द्धक होता है। वे लोगों को साइबर ठगी से सुरक्षित रहने के तरीके बताते हैं। रेलवे के एक कर्मचारी बहुत आसान भाषा में जानकारी देते हैं। टिकट कैसे बुक कराएं, किस ट्रेन में कौनसी सुविधाएं होती हैं, यात्रा के दौरान कोई समस्या आए तो किससे संपर्क करें - जैसे सवालों के जवाब मिलने से लोगों की जानकारी में बढ़ोतरी होती है। इसी तरह डाक विभाग के एक कर्मचारी लघु बचत योजनाओं के विशेषज्ञ माने जा सकते हैं। किसके लिए कौनसी बचत योजना बेहतर है, लंबी अवधि में किस योजना में निवेश करें, फर्जी निवेश योजनाओं से कैसे बचें - के बारे में उनके वीडियो 'गागर में सागर' होते हैं। एक यातायात पुलिसकर्मी अपने विभाग की आदर्श छवि पेश करते हैं। वे लोगों को यातायात के नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। अगर कोई व्यक्ति सभी नियमों का पालन करता है तो उसकी तारीफ करते हैं। इसके अलावा, यातायात संबंधी दस्तावेज बनवाने के लिए जानकारी देते हैं। ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों को सम्मानित करना चाहिए। ये जनता तक महत्त्वपूर्ण जानकारी पहुंचाते हैं और सरकार की योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाते हैं। सर्वसमाज को उनके ज्ञान और अनुभव का फायदा मिलता है। अगर हर क्षेत्र में कुछ अधिकारी व कर्मचारी ऐसी उपयोगी सामग्री का निर्माण करें तो लोगों को योजनाओं से जुड़ने में बहुत आसानी हो सकती है। जो लोग सिर्फ आत्मप्रचार के लिए ढेरों तस्वीरें-वीडियो पोस्ट करते रहते हैं, सिर्फ अपनी छवि बनाने में व्यस्त रहते हैं, खुद को किसी सेलिब्रिटी की तरह दिखाते हैं, हमेशा आत्ममुग्ध रहते हैं, उन्हें सरकार की ओर से सख्त नसीहत मिलनी चाहिए।