मुंबई/दक्षिण भारत। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बुधवार को अजित पवार के निधन को दु:खद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जिस विमान दुर्घटना में उनकी जान गई, उसकी जांच की जाएगी।
पत्रकारों से बात करते हुए शिंदे ने पवार के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि पवार ने विभिन्न मंत्रिमंडलों में उनके साथ सहयोगी के रूप में काम किया और साल 2022 से 2024 तक जब सरकार का नेतृत्व कर रहे थे, तब वे उनके उपमुख्यमंत्री भी थे।
एकनाथ शिंदे ने कहा कि आज महाराष्ट्र पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है। यह अत्यंत पीड़ादायक और स्तब्ध कर देने वाला दिन है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन का आघात पूरे महाराष्ट्र के लिए और व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए भी बेहद बड़ा है। एक मिलनसार, कर्तव्यनिष्ठ, अध्ययनशील और स्पष्टवादी नेता को हमने खो दिया है।
एकनाथ शिंदे ने कहा कि अजित दादा उम्र में मुझसे बड़े थे और राजनीति के अनुभव में भी। एक उत्कृष्ट सहयोगी ही नहीं, बल्कि एक बड़े भाई को खो देने का मुझे गहरा दु:ख है।
एकनाथ शिंदे ने कहा कि 'करता हूं, देखता हूं, बताता हूं' जैसे शब्द अजित दादा की शब्दावली में नहीं थे। गलती दिखाने और ज़रूरत पड़ने पर कड़ी फटकार लगाने का साहस उनमें था। उनके स्वभाव में दोहरापन नहीं था — जो मन में, वही ज़ुबान पर। बोलने में भले ही वे स्पष्ट और बेबाक थे, लेकिन दिल से अत्यंत निर्मल थे। वे कार्यकर्ताओं के नेता के रूप में पहचाने जाते थे। आम आदमी उन्हें अपना समझता था।
एकनाथ शिंदे ने कहा कि विधायक, सांसद और मंत्री के रूप में अजित दादा ने अपनी काबिलियत से एक लंबा और प्रभावशाली राजनीतिक सफर तय किया। पिछले 40 वर्षों से राजनीति में उनका दबदबा बना रहा।
एकनाथ शिंदे ने कहा कि अजित दादा ने 6 बार उपमुख्यमंत्री का पद संभाला। वित्त, नियोजन, सिंचाई, जलसंसाधन और ऊर्जा जैसे विभागों में उन्होंने अत्यंत उल्लेखनीय और जनोन्मुखी कार्य किया। कृषि और सहकार क्षेत्र की उन्हें गहरी जानकारी थी। उनमें आर्थिक गतिविधियों की सटीक समझ थी। महाराष्ट्र के राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ थी।
प्रशासन पर उनका सशक्त नियंत्रण था। वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने कभी राज्य की अर्थव्यवस्था को डगमगाने नहीं दिया। विकास कार्यों में बाधा न आए, इसका उन्होंने पूरा ध्यान रखा और हमारे द्वारा घोषित ‘लाडकी बहिन’ योजना के लिए भी धन की कमी नहीं होने दी। राज्य के अनेक विकास परियोजनाओं के लिए उन्होंने आर्थिक प्रावधान किए।
एकनाथ शिंदे ने कहा कि आज दादा हमारे बीच नहीं हैं और कल से वे दिखाई भी नहीं देंगे। यह कल्पना भी मन को स्वीकार नहीं हो रही। पवार परिवार पर भी समय ने कठोर प्रहार किया है। उनके लिए यह क्षण अत्यंत दु:खद है और उन्हें सांत्वना देने के लिए कोई भी शब्द अपर्याप्त हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं सहित महाराष्ट्र के लाखों लोगों में आज अनाथ होने की भावना है।
एकनाथ शिंदे ने कहा कि अजित दादा के निधन से राज्य को अपूरणीय क्षति हुई है। शिवसेना की ओर से मैं उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।