स्क्रीन में कैद न रह जाए बचपन

उनके पास बचपन की कौनसी मधुर यादें रहेंगी?

पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय बच्चों को सोशल मीडिया का सीमित इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए

आंध्र प्रदेश सरकार ने किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को रोकने संबंधी उपायों पर विचार के लिए समिति गठित कर बच्चों के भविष्य के लिए बहुत जरूरी फैसला लिया है। आज कई बच्चे मोबाइल फोन में अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। वे न तो खेलकूद में दिलचस्पी लेते हैं और न ही पढ़ाई करना उन्हें अच्छा लगता है। उन्हें बस एक मोबाइल फोन चाहिए, जिसमें इंटरनेट चलता हो। बाकी काम वे खुद कर लेंगे। जो बच्चे प्रकृति के साथ समय बिताते हैं, खेलकूद में भाग लेते हैं, दोस्त बनाते हैं, उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है। साथ ही, बचपन खुशहाल होने की संभावना ज्यादा होती है। वहीं, मोबाइल फोन के साथ व्यस्त रहने वाले बच्चों का बचपन स्क्रीन तक सीमित रह जाएगा। उनके पास बचपन की कौनसी मधुर यादें रहेंगी? हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए, जब किसी बच्चे को माता-पिता ने मोबाइल फोन बंद करने के लिए कहा तो उसने अभद्रता की। कुछ बच्चे तो इतने बेकाबू हो जाते हैं कि घर में तोड़फोड़ करने लगते हैं। सोशल मीडिया पर एक मामला बहुत सुर्खियों में रहा था। एक बच्चे से कहा गया कि उसे मोबाइल फोन के बजाय पढ़ाई में ध्यान लगाना चाहिए, तो उसने टीवी, लैंप, बर्तन समेत कई चीजें तोड़ दी थीं। कई बच्चों के पास एक बहाना और होता है। जब उनसे कहा जाता है- 'आपने मोबाइल फोन बहुत चला लिया', तो उनका जवाब होता है- 'बस, दो मिनट और!' ये दो मिनट कब दो घंटों में बदल जाते हैं, पता ही नहीं चलता। इस वजह से बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है, चश्मे के नंबर बढ़ रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया का उपयोग प्रतिबंधित करने के संबंध में सख्त कदम उठाए हैं। कोई भी सोशल मीडिया कंपनी नहीं चाहेगी कि उसके सदस्यों के विस्तार को रोका जाए। वह जानती है कि जिस बच्चे को उसकी लत लग जाएगी, वह भविष्य में उसका 'पक्का ग्राहक' बना रहेगा। ऐसे में सरकारों और माता-पिता को ही बच्चों की भलाई के लिए फैसला लेना होगा। कुछ सोशल मीडिया मंच यूजर की उम्र पूछते हैं। हालांकि उनके पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होती, जिससे वे जन्मतिथि की जांच कर सकें। एक सुझाव यह दिया जा रहा है कि सोशल मीडिया मंच यूजर से आयु प्रमाणपत्र लेने के बाद ही उसे अकाउंट चलाने की अनुमति दें। इस सुझाव को लागू करने में कई समस्याएं हैं। अगर कोई यूजर अपना आयु प्रमाणपत्र अपलोड कर दे तो उसके डेटा की सुरक्षा की क्या गारंटी है? अक्सर खबरें आती हैं कि फलां वेबसाइट के यूजर्स का डेटा लीक हो गया। अगर प्रमाणपत्र हैकरों और साइबर अपराधियों के हाथ लग गए तो क्या होगा? अब एआई का जमाना है। अगर किसी ने उसका इस्तेमाल कर गलत प्रमाणपत्र अपलोड कर दिया तो सोशल मीडिया कंपनी उसकी जांच कैसे करेगी? जो लोग चेहरे और आवाज का इस्तेमाल कर नकली वीडियो बना सकते हैं, उनके लिए नकली प्रमाणपत्र बनाना कौनसी बड़ी बात है? एक तरीका यह हो सकता है कि पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय बच्चों को सोशल मीडिया का सीमित इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए। इसके लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य हो। बच्चों के अकाउंट से सिर्फ उस सामग्री तक पहुंच मिलनी चाहिए, जो उनके लिए लाभदायक हो। एक दिन में आधा या एक घंटे से ज्यादा अकाउंट चलाने की अनुमति न हो। यह अवधि पूरी होते ही अकाउंट से अपनेआप लॉग आउट कर दिया जाए। जो बच्चा उसी दिन दोबारा लॉग इन करे तो उसे तीन दिन के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाए। अगर फिर भी लॉग इन करे तो सात दिन के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाए। इन उपायों से बच्चे अनुशासित होंगे। उन्हें सोशल मीडिया की लत नहीं लगेगी। उनका बचपन भी खुशहाल होगा।

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