कब साकार होगा नेताजी के सपनों का भारत?

नेताजी के हृदय में त्याग, देशप्रेम, साहस, संघर्ष, बलिदान और सर्वस्व अर्पण करने की ज्वाला धधकती थी

नेताजी ने चरित्र निर्माण पर बहुत जोर दिया था

हर साल 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस को याद किया जाता है। उनके चित्रों और प्रतिमाओं पर मालाएं चढ़ाई जाती हैं। नेतागण उनके सम्मान में सोशल मीडिया पर कुछ पंक्तियां लिखते हैं। देशप्रेम की बातें की जाती हैं। इसके बाद सबकुछ पुराने ढर्रे पर चलने लगता है। नेताजी के हृदय में त्याग, देशप्रेम, साहस, संघर्ष, बलिदान और देशवासियों के लिए सर्वस्व अर्पण करने की ज्वाला धधकती थी। उन्होंने हमें आजादी दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन दे दिया था। अगर आज हम उन्हें याद करते हैं तो इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि क्या नेताजी का सपना साकार हुआ? क्या हम वैसा भारत बना पाए, जैसा नेताजी चाहते थे? उनके चित्र या प्रतिमा पर माला चढ़ा देना काफी नहीं है। खासकर वर्तमान नेताओं को उनके जीवन एवं दर्शन से जरूर प्रेरणा लेनी चाहिए। नेताजी जातिवाद, भाषावाद, प्रांतवाद और सांप्रदायिकता के घोर विरोधी थे। वे भारत को एकता के सूत्र में जोड़कर महाशक्ति बनाना चाहते थे। उनके भाषण पढ़-सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। नेताजी ने चरित्र निर्माण पर बहुत जोर दिया था। तब मोबाइल फोन और इंटरनेट का ज़माना नहीं था, लेकिन अश्लील साहित्य बिकता था। नशाखोरी का भी बोलबाला था। अंग्रेज चाहते थे कि भारत के लोग इन्हीं बुराइयों में फंसे रहें। नेताजी ने देशवासियों को इन बुराइयों से सावधान किया था। उन्होंने युवाओं को रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविंद जैसे महापुरुषों का साहित्य पढ़ने की सलाह दी थी। उन्होंने स्वास्थ्य की रक्षा, मानसिक दृढ़ता और अनुशासन सीखने का आह्वान किया था।

नेताजी का वह आह्वान आज भी अत्यंत प्रासंगिक है। अगर देश को और मजबूत बनाना है तो चरित्र को मजबूत बनाना होगा। युवाओं को चाहिए कि वे इंटरनेट के जरिए परोसी जा रही अभद्र सामग्री से दूर रहें। सोशल मीडिया से सिर्फ उपयोगी जानकारी लें। इस पर अपना समय बर्बाद न करें। शराब, खैनी, गुटखा, सिगरेट, बीड़ी, ड्रग्स आदि को अपने जीवन का हिस्सा कभी न बनाएं। इन पदार्थों की बढ़ती खपत चिंता की बात है। दीपावली, नया साल, होली और अन्य विशेष अवसर हमें किसी अच्छे काम की शुरुआत करने की प्रेरणा देते हैं। कई लोग उस दिन भी नशा करते हैं। अगर नशे के गुलाम रहेंगे तो आजादी की रक्षा कैसे करेंगे? नेताजी ने आजाद हिंद फौज का नेतृत्व करते हुए दुनिया को दिखा दिया था कि भारत में सभी जातियों और समुदायों के लोग बहुत प्रेम एवं सद्भावपूर्वक रह सकते हैं। यहां जो झगड़े पैदा किए गए, वे विदेशी आक्रांताओं की देन थे। विविधता हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत है। राष्ट्रवाद की डोर हम सबको एकजुट करती है। नेताजी स्वदेशी उद्योगों के समर्थक थे। वे चाहते थे कि भारत में बड़े और लघु, दोनों तरह के उद्योग पनपें। उन्होंने युवाओं से कहा था कि वे उद्योगों में रुचि लें। आजादी के इतने साल बाद भी भारत में बेरोजगारी है तो इससे पता चलता है कि हमने उनके आह्वान पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। नेताजी सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता के नहीं, मानसिक स्वतंत्रता के भी पक्षधर थे। उन्होंने अंधविश्वासों, कुप्रथाओं और मानवता विरोधी रिवाजों का विरोध किया था। उनका मानना था कि लोगों को ब्रिटिश गुलामी की बेड़ियां तोड़ने के साथ उन मानसिक बेड़ियों को तोड़ने की जरूरत है, जो हमारे पतन की वजह बनी थीं। वे बेड़ियां आज भी मौजूद हैं। देश में ऐसे स्वार्थी तत्त्वों की कमी नहीं है, जो अपने फायदे के लिए लोगों को आपस में लड़ाते-भिड़ाते रहते हैं। जो व्यक्ति उनके बहकावे में न आकर राष्ट्रीय एकता पर जोर देता है, वह नेताजी के सपनों के भारत को साकार करता है।

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