बेंगलूरु: रोड रेज के मामले में डैशकैम कैसे बना सबसे बड़ा गवाह?

हथियार दिखाने वाला शख्स गया सलाखों के पीछे

Photo: DCP Whitefield Instagram

.. सुचिस्मिता अग्रवाल ..

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। बेंगलूरु जैसे आधुनिक और विकसित शहर में जब बीच सड़क पर कोई व्यक्ति हथियार दिखाए तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या हमारी सड़कें अब सुरक्षित नहीं रहीं? हाल में व्हाइटफील्ड इलाके के एक मॉल के पास हुई घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। 

एक 25 वर्षीय युवक सैयद अरबाज खान, जो अपने स्कूटर पर सवार था, ने सिर्फ छोटी-सी बात पर कार में बैठे एक परिवार के साथ न केवल बदतमीजी की, बल्कि उन्हें जान से मारने की धमकी देते हुए हथियार भी दिखाया। गनीमत रही कि कार चालक ने अपनी गाड़ी में डैशकैम लगा रखा था, जिसमें यह पूरी वारदात रिकॉर्ड हो गई और पुलिस ने इसी डिजिटल सबूत के आधार पर आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया।

यह कोई इकलौती घटना नहीं है। बेंगलूरु में पिछले कुछ सालों में रोड रेज के मामले तेजी से बढ़े हैं। कभी कोई किसी की गाड़ी के बोनट पर लटक जाता है, तो कभी हेलमेट से कार के शीशे तोड़ दिए जाते हैं। भारत के अन्य बड़े शहरों, खासकर दिल्ली-एनसीआर में तो हालात और भी डरावने हैं, जहां मामूली कहासुनी में अक्सर गोलियां तक चल जाती हैं। 

हताशा और गुस्से का प्रदर्शन

ये घटनाएं दर्शाती हैं कि महानगरों में रहने वाले लोगों का धैर्य जवाब दे रहा है। सड़कों पर गाड़ियों का बढ़ता बोझ, घंटों का ट्रैफिक जाम और काम का मानसिक दबाव लोगों को चिड़चिड़ा बना रहा है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे लोग अक्सर अपनी व्यक्तिगत हताशा और गुस्से को सड़क पर अनजान लोगों पर निकालते हैं, जिसे 'डिस्प्लेस्ड अग्रेशन' कहा जाता है।

एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या लोगों में कानून का डर खत्म हो गया है? हकीकत यह है कि सड़क पर गुस्से के उस चंद सेकंड के गुबार में व्यक्ति इसके कानूनी परिणामों के बारे में सोचना भूल जाता है। उसे लगता है कि वह भीड़ का फायदा उठाकर निकल जाएगा, व्हाइटफील्ड की घटना ने यह साबित कर दिया है कि तकनीक अब अपराधियों के लिए जाल बन रही है। कार में लगा एक छोटा-सा कैमरा उस समय सबसे बड़ा गवाह बना जब वहां कोई दूसरा मदद के लिए मौजूद नहीं था।

हिंसक होना समाधान नहीं है

ऐसे में समाधान क्या है? सबसे पहले, हर वाहन चालक को अपनी गाड़ी में 'डैशकैम' लगवाना अनिवार्य समझना चाहिए। यह न केवल दुर्घटनाओं के समय बीमा संबंधी दावों में काम आता है, बल्कि रोड रेज के मामलों में एक 'साइलेंट वॉचमैन' की तरह काम करता है। जब सामने वाले को पता होता है कि उसकी हर हरकत रिकॉर्ड हो रही है, तो वह अक्सर कानून हाथ में लेने से पहले दस बार सोचता है। इसके अलावा, यातायात पुलिस को भी संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ानी चाहिए और ऐसे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

समाज के तौर पर हमें यह समझने की जरूरत है कि सड़क पर बिताया गया समय हमारे धैर्य की परीक्षा है। यहां हिंसक होना समाधान नहीं है। घर पर परिवार इंतजार कर रहा है और एक पल का गुस्सा जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है या किसी की जान ले सकता है। 

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