केंद्र सरकार के दखल के बाद क्विक कॉमर्स ऐप्स द्वारा 10 मिनट में डिलीवरी का नियम हटाए जाने का फैसला हजारों गिग वर्कर्स के लिए राहत लेकर आया है। इतने कम समय में डिलीवरी का वादा आकर्षक लगता है, ग्राहक ऑर्डर भी खूब करते हैं, लेकिन इसके साथ बड़ा जोखिम जुड़ा हुआ है। जो डिलीवरी बॉय सामान पहुंचाता है, वह भी इन्सान है। अगर वह जल्दबाजी में सामान लेकर जाएगा तो दुर्घटना की आशंका ज्यादा होगी। कई तो दुर्घटना के शिकार हो चुके हैं। हमारे शहरों में यातायात और सड़कों की हालत किसी से छिपी नहीं है। डिलीवरी बॉय के लिए हमेशा जोखिम रहता है, जो बरसात के मौसम में और बढ़ जाता है। अब सरकार ने इनकी पीड़ा समझी है। डिलीवरी बॉय अपने काम में सुरक्षा के हकदार हैं। उनके भी घर-परिवार हैं। वे कड़ी मेहनत करते हैं। दीपावली, क्रिसमस, नया साल और खास अवसरों पर उनकी व्यस्तता बहुत बढ़ जाती है। वे देर रात तक काम करते रहते हैं। इस दौरान थकान महसूस होना स्वाभाविक है। अगर 10 मिनट में डिलीवरी का लगातार दबाव रहेगा तो व्यक्ति जल्दबाजी करेगा। वह यातायात के नियमों तथा अपनी और दूसरों की सुरक्षा को कम प्राथमिकता देगा। अगर देर हुई तो वह नियमों का उल्लंघन करेगा। इससे सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ेगा। रोजाना इसी तरह काम करते रहने से उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। ऐसी घटनाएं भी हुई हैं, जब डिलीवरी बॉय 10 मिनट में नहीं पहुंचा तो ग्राहक ने उसके साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया।
ऑनलाइन शॉपिंग से लोगों के लिए बहुत सुविधा हो गई है। शहरों में कई परिवार ऐसे हैं, जो अपनी जरूरत का सारा सामान ऑनलाइन ही खरीदते हैं। दूध, सब्जी, किराने का सामान से लेकर कपड़े, जूते, किताबें, मोबाइल फोन, लैपटॉप तक ऑनलाइन खरीदे जा रहे हैं। इससे परंपरागत दुकानों के लिए कड़ी चुनौती पैदा हो गई है। अक्सर लोग कहते हैं कि जितने समय में हम घर से निकलकर दुकान तक पहुंचेंगे, उतने में तो सामान घर आ जाएगा! पिछले डेढ़ दशक में खरीदारी के तौर-तरीकों में बहुत बदलाव आए हैं। शुरुआत में ऑनलाइन शॉपिंग के बारे में कहा जाता था कि 'ऐसा सिर्फ विकसित देशों में हो सकता है, भारत के लोग इसे नहीं अपनाएंगे।' कुछ विशेषज्ञ यह कहकर इसका मजाक उड़ाते थे कि 'भारत में न तो पर्याप्त स्मार्टफोन हैं और न ही लोग डिजिटल पेमेंट करना जानते हैं, लिहाजा यहां ऑनलाइन शॉपिंग का कोई भविष्य नहीं है।' इस अवधि में भारतीय उपभोक्ता ने उन सभी विशेषज्ञों को गलत साबित कर दिया। अब तो ड्रोन से डिलीवरी की बातें हो रही हैं। आगामी दशक में यह क्षेत्र नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। इस कड़ी प्रतिस्पर्द्धा में परंपरागत दुकानें कितनी टिक पाएंगी? आज कई दुकानदारों के लिए किराया और सहायक का वेतन चुकाना मुश्किल हो गया है। पहले, त्योहारी सीजन में जितनी बिक्री होती थी, अब उसमें कमी आ गई है। दुकानदारों को यह बदलाव स्वीकार करते हुए खुद को तैयार करना होगा। कोई कंपनी विदेश से यहां आकर व्यापार के बड़े हिस्से पर कब्जा कर सकती है तो आप वर्षों तक अपने क्षेत्र में रहकर उससे बेहतर प्रदर्शन क्यों नहीं कर सकते? स्थानीय दुकानदारों को भी होम डिलीवरी की सुविधा शुरू करनी चाहिए। ईमानदार दुकानदार और मेहनती डिलीवरी बॉय व्यवसाय को आगे लेकर जा सकते हैं।