तेहरान/दक्षिण भारत। ईरान में शुक्रवार रात जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन हुए। सर्वोच्च नेता खामेनेई के खिलाफ लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सरकार द्वारा इंटरनेट पर पाबंदी और टेलीफोन लाइनें काटे जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों के हौसले नहीं डिगे।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। इससे प्रदर्शनकारी भड़क उठे। उन्होंने खामेनेई के इस्तीफे की मांग की है। इस बीच चर्चा है कि हालात बिगड़ने पर ईरानी सर्वोच्च नेता देश छोड़कर जा सकते हैं।
डॉलर के मुकाबले गिरती ईरानी मुद्रा के कारण महंगाई बहुत बढ़ गई है। इससे देश में जरूरी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। लोग राहत की मांग कर रहे हैं, लेकिन खामेनेई उनकी बात सुनने के बजाय गोलियां बरसा रहे हैं।
खामेनेई ने इन विरोध प्रदर्शनों को अमेरिका की साजिश बताया है। उन्होंने एक संदेश में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि उनके हाथ ईरानियों के खून से सने हुए हैं और उनके समर्थकों ने अमेरिका मुर्दाबाद के नारे लगाए हैं।
बाद में सरकारी मीडिया ने प्रदर्शनकारियों को 'आतंकवादी' बताया, जिससे हाल के सालों में हुए दूसरे विरोध प्रदर्शनों की तरह ही हिंसक कार्रवाई की ज़मीन तैयार हो गई, भले ही ट्रंप ने ज़रूरत पड़ने पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने का वादा किया है।
खामेनेई ने तेहरान में भीड़ से कहा, 'प्रदर्शनकारी अमेरिका के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी ही सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने कहा था कि वे उनकी मदद करेंगे। इसके बजाय उन्हें अपने देश की हालत पर ध्यान देना चाहिए।'
ईरान के न्यायपालिका प्रमुख घोलमहोसिन मोहसेनी-एजेई ने संकल्प लिया कि प्रदर्शनकारियों को दी जाने वाली सज़ा निर्णायक, अधिकतम और बिना किसी कानूनी नरमी के होगी।