नई दिल्ली/दक्षिण भारत। वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का निधन हो गया। वे 49 साल के थे। अनिल अग्रवाल पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है। उन्होंने बेटे की याद में अपने एक्स अकाउंट पर भावुक पोस्ट की है। साथ ही, घोषणा की है कि अपनी कमाई का 75 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा समाज को देंगे।
अनिल अग्रवाल ने कहा, 'आज मेरी ज़िंदगी का सबसे बुरा दिन है। मेरा प्यारा बेटा अग्निवेश हमें बहुत जल्दी छोड़कर चला गया। वह सिर्फ़ 49 साल का था, स्वस्थ था तथा ज़िंदगी और सपनों से भरा हुआ था। अमेरिका में स्कीइंग हादसे के बाद, वह न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हॉस्पिटल में ठीक हो रहा था। हमें लगा था कि सबसे बुरा समय बीत गया है। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था और अचानक कार्डियक अरेस्ट ने हमारे बेटे को हमसे छीन लिया।'
अनिल अग्रवाल ने कहा, 'कोई भी शब्द उस माता-पिता के दर्द को बयान नहीं कर सकते जिसे अपने बच्चे को अलविदा कहना पड़ता है। बेटे को पिता से पहले नहीं जाना चाहिए। इस नुकसान ने हमें इस तरह से तोड़ दिया है कि हम अभी भी समझने की कोशिश कर रहे हैं।'
अनिल अग्रवाल ने कहा, 'मुझे आज भी वह दिन याद है जब 3 जून, 1976 को पटना में अग्नि का जन्म हुआ था। एक मिडल-क्लास बिहारी परिवार से आकर एक मज़बूत, दयालु और मकसद वाला इन्सान बना। वह अपनी मां की ज़िंदगी की रोशनी, एक रक्षा करने वाला भाई, एक वफ़ादार दोस्त और एक नेक इंसान था, जिसने भी उनसे मुलाकात की, उसे प्रभावित किया।'
अनिल अग्रवाल ने कहा, 'अग्निवेश कई खूबियों वाला इन्सान था- एक खिलाड़ी, एक म्यूज़िशियन, एक लीडर। उसने मेयो कॉलेज, अजमेर में पढ़ाई की थी, फिर फुजैराह गोल्ड नाम की बेहतरीन कंपनियों में से एक की स्थापना की, हिंदुस्तान जिंक का चेयरमैन बना, अपने साथियों और दोस्तों का सम्मान हासिल किया। फिर भी, सभी पदवियों और उपलब्धियों से परे, वह सरल, मिलनसार और दिल से इन्सान बना रहा।'
अनिल अग्रवाल ने कहा, 'मेरे लिए, वह सिर्फ़ मेरा बेटा नहीं था। वह मेरा दोस्त था। मेरा गर्व था। मेरी दुनिया था। किरण और मैं टूट गए हैं। और फिर भी, अपने दु:ख में, हम खुद को याद दिलाते हैं कि वेदांता में काम करने वाले हज़ारों युवा भी हमारे बच्चे हैं।'
अनिल अग्रवाल ने कहा, 'अग्निवेश का आत्मनिर्भर भारत बनाने में गहरा विश्वास था। वह अक्सर कहता था, 'पापा, एक देश के तौर पर हमारे पास किसी चीज़ की कमी नहीं है। हमें कभी पीछे क्यों रहना चाहिए?'
अनिल अग्रवाल ने कहा, 'हमने मिलकर यह सपना देखा था कि कोई बच्चा भूखा न सोए, किसी बच्चे को शिक्षा से वंचित न किया जाए, हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो, हर युवा भारतीय के पास सार्थक काम हो। मैंने अग्नि से वादा किया था कि हम जो भी कमाएंगे, उसका 75 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा समाज को वापस देंगे।'
अनिल अग्रवाल ने कहा, 'आज, मैं उस वादे को फिर से दोहराता हूं और इससे भी ज़्यादा सादा जीवन जीने का संकल्प लेता हूं। उसके सामने पूरी ज़िंदगी पड़ी थी। अभी बहुत सारे सपने पूरे करने बाकी थे। उसकी गैर-मौजूदगी से उसके परिवार और दोस्तों की ज़िंदगी में एक खालीपन आ गया है। हम उसके सभी दोस्तों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों को धन्यवाद देते हैं जो हमेशा उसके साथ रहे।'
अनिल अग्रवाल ने कहा, 'बेटा, तुम हमारे दिलों में, हमारे काम में, और हर उस ज़िंदगी में ज़िंदा रहोगे जिसे तुमने छुआ है। मुझे नहीं पता कि तुम्हारे बिना इस रास्ते पर कैसे चलना है, लेकिन मैं तुम्हारी रोशनी को आगे ले जाने की कोशिश करूंगा।'