किस राह पर ईरान?

विरोध प्रदर्शनों में कई लोगों की मौत हो गई है

ईरान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कड़ा पहरा है

ईरान में मुद्रा के पतन और लोगों के बढ़ते असंतोष ने सरकार और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए मुसीबतें बढ़ा दी हैं। वेनेजुएला की तरह इस देश में भी तेल के बड़े भंडार हैं, लेकिन डॉलर के मुकाबले मुद्रा में बड़ी गिरावट आ गई है। क्या ईरान भी वेनेजुएला की राह पर चल रहा है? इस देश के तेल और गैस भंडार नागरिकों का कोई भला नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, सर्वोच्च नेता का रुख अपने नागरिकों के लिए सख्त होता जा रहा है। विरोध प्रदर्शनों में कई लोगों की मौत हो गई है। ईरान किस दिशा में जा रहा है, यह जानना हो तो उसके प्रमुख अखबारों का पहला पन्ना देखना काफी होगा। इसकी सरकार ने पूरा जोर इजराइल को तबाह करने पर लगा रखा है। इसके बावजूद इजराइल उन्नति कर रहा है, क्योंकि उसके पास विज्ञान की शक्ति है। ईरान हिज़्बुल्लाह, हमास समेत दर्जनों कट्टरपंथी संगठनों का सहयोग करता है। वह अपने नागरिकों की भलाई की अनदेखी करता रहा है। मनमाने तरीके से परमाणु कार्यक्रम चलाने की कोशिश उसे इस मुकाम तक लेकर आ गई है, जहां कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। अगर ईरान ने टकराव की जगह संवाद का रास्ता अपनाया होता तो आज उसकी अर्थव्यवस्था बहुत बेहतर होती। इस देश में लोगों का असंतोष भड़क रहा है। हालांकि इसके पीछे सिर्फ आर्थिक कारण नहीं हैं। ईरान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कड़ा पहरा है। पुलिस तथा सरकारी एजेंसियां आम नागरिकों पर अत्याचार करती हैं और जवाबदेही से बचती हैं। याद करें, महसा अमीनी के साथ क्या हुआ था? उनके लिए आवाज उठाने वाली सैकड़ों महिलाओं के साथ कैसा सलूक किया गया था?

मानवाधिकारों के मामले में ईरान का रिकॉर्ड अच्छा नहीं है। वहां से हर एक-दो हफ्ते में लोगों को फांसियां देने की खबरें आती ही रहती हैं। ईरान पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगे हुए हैं। इसके बावजूद उसने अपना मजबूत तंत्र विकसित नहीं किया। वेनेजुएला की तरह खेती की उपेक्षा की। वहां युवाओं में बेरोज़गारी एक बड़ी समस्या है। सरकार अपने खर्चे पूरे करने के लिए नोट छापती रहती है, जिससे मुद्रास्फीति को पंख लग गए हैं। ईरान में लोगों का सरकार से भरोसा कमजोर हुआ है। खासकर व्यापारी वर्ग बहुत परेशान है। डॉलर के मुकाबले ईरानी मुद्रा इतनी अस्थिर हो गई है कि चीजों के दाम बेकाबू होते जा रहे हैं। कोई व्यापारी आज जिस कीमत पर सामान खरीदता है, कल उसकी कीमत बहुत ज्यादा बढ़ सकती है। वह इसका भार ग्राहकों पर डालता है। इससे लोगों की क्रय शक्ति घट रही है और महंगाई बढ़ रही है। जब रोजगार न हो, खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हों, किराया देना बूते से बाहर हो और सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाकर (इजराइल के खिलाफ) पुरानी कहानियां सुनाने में ही व्यस्त हो तो आम लोग क्या करेंगे? अगर ईरान ने समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया तो भविष्य में हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं। ईरान गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। राष्ट्रीय राजधानी समेत कई शहरों में पेयजल की किल्लत हो गई है। कई जल स्रोत सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। खेती में सिंचाई के पुराने तरीकों से बहुत ज्यादा भू-जल की निकासी हो रही है। इजराइल ने वर्षों पहले इस समस्या का समाधान ढूंढ़ लिया था। वह समुद्र के खारे पानी को पेयजल में बदलने की तकनीक डिसेलिनेशन अपनाने में अग्रणी है। उसने नेशनल वाटर कैरियर नामक पाइप और नहर प्रणाली के जरिए दूर-दराज के इलाकों तक पेयजल पहुंचाया। इजराइल ने ड्रिप इरिगेशन अपनाकर रेगिस्तान को उपजाऊ बना दिया। ईरान को अपना रवैया बदलकर नागरिकों का कल्याण सुनिश्चित करना चाहिए। हर समस्या के लिए इजराइल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

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