वेनेजुएला से सबक लें सभी देश

वेनेजुएला के तेल भंडार पर हैं अमेरिका की नज़रें

तेल से मालामाल एक खुशहाल देश गलत नीतियों के कारण बर्बाद हो गया

दुनिया में कई युद्धों को रोकने का दावा कर शांति का नोबेल पुरस्कार पाने के लिए लालायित रहने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला पर हमला कर ही दिया। ट्रंप 'शांति पुरुष' बनने चले थे, लेकिन 'अशांति पुरुष' बन गए। यह हमला अमेरिका द्वारा साल 2003 में इराक पर किए गए हमले की याद दिलाता है। तब उसने इराक में घातक रासायनिक एवं जैविक अस्त्रों का बहाना बनाया था, अब वेनेजुएला के (अपदस्थ) राष्ट्रपति मादुरो पर नार्को-आतंकवाद का आरोप लगाया है। तब उसकी नजरें इराक के तेल भंडार पर थीं, अब वेनेजुएला के तेल भंडार पर हैं। ट्रंप ने स्वीकार भी किया है कि इस भंडार का इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है। अमेरिका लगभग पांच साल से वेनेजुएला के खिलाफ जोर-शोर से माहौल बनाने में लगा था। उसने मादुरो की सरकार को भ्रष्ट और गैर-कानूनी बताकर ड्रग्स तस्करी के गंभीर आरोप लगाए थे। आखिरकार मौका देखकर मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। ड्रग्स तस्करी के लिए तो मैक्सिको भी जाना जाता है। पाकिस्तान में कई नेता और सैन्य अधिकारी यही धंधा कर रहे हैं। वहां आसिम मुनीर की तानाशाही चल रही है। क्या ट्रंप पाकिस्तान पर हमला करेंगे? वे मुनीर की पीठ थपथपा रहे हैं! ये दोहरे मापदंड क्यों? ट्रंप वेनेजुएला में 'लोकतंत्र' लाने की बातें कर रहे हैं, जैसा कि उनके कई पूर्ववर्ती ऐसी परिस्थितियों में करते रहे हैं। सवाल है- जिस 'लोकतंत्र' को लाने के लिए वेनेजुएला के लोगों पर बम बरसाए गए, अब वहां हालात सुधरेंगे या बिगड़ेंगे? अमेरिका ने यही वादा इराक युद्ध के दौरान किया था। बाद में वहां आईएसआईएस जैसे खूंखार आतंकवादी संगठन ने जड़ें जमा ली थीं।

अगर वेनेजुएला में भी किसी कट्टरपंथी संगठन या माफिया का बोलबाला हो जाएगा तो समस्याएं कम नहीं होंगी, बल्कि और बढ़ेंगी। इस देश का जिस तरह आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक पतन हुआ, उसमें दुनिया के लिए गहरे सबक हैं। कभी इसे समृद्ध और खुशहाल देशों में शुमार किया जाता था। इसके तेल भंडार सरकार का खजाना भरते थे। खूब दौलत आ रही थी तो सरकार ने लोकलुभावन योजनाएं लागू करते हुए कई गलत फैसले लिए थे। खेती और उद्योगों की घोर उपेक्षा की गई। लोगों को मुफ्त राशन, सस्ता पेट्रोल, कई तरह की सब्सिडी दी गईं। रोजगार को बढ़ावा देने के बजाय पैसा बांटने को प्राथमिकता दी गई। सरकार ने राष्ट्रीयकरण पर जोर दिया। इसका नतीजा यह रहा कि जो कंपनियां पहले ठीक प्रदर्शन कर रही थीं, वे भी भारी घाटे में चली गईं। वेनेजुएला की सरकार ने तकनीकी विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। वह पुरानी तकनीक को ही ढोती रही। खेती तो पहले ही चौपट हो चुकी थी, उद्योग-धंधे भी दम तोड़ने लगे। इससे भुखमरी और बेरोजगारी का चक्र शुरू हो गया। बाकी कसर वेनेजुएला के अकुशल, सुस्त और भ्रष्ट सरकारी तंत्र ने पूरी कर दी। दशकभर पहले जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमतें गिरने लगीं तो वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था चरमराने लगी थी। सरकारी कंपनियों का घाटा बहुत बढ़ गया था, लेकिन उनके अधिकारियों और कर्मचारियों को कोई परवाह नहीं थी। उधर, सब्सिडी और अन्य मुफ्त योजनाओं के खर्चे पूरे करने के लिए सरकार ने धड़ाधड़ नोट छापे, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ गई। प्रतिभाशाली लोग देश छोड़कर चले गए। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण हालत बिगड़ती ही गई। आम आदमी के लिए एक महीने के वेतन में एक वक्त का भोजन जुटाना मुश्किल हो गया था। सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें खूब पढ़ने को मिलीं कि किसी को एक ब्रेड खरीदने के लिए नोटों की कई गड्डियां देनी पड़ीं। तेल से मालामाल एक खुशहाल देश गलत नीतियों के कारण बर्बाद हो गया। जब देश अंदर से कमजोर होता है तो दुश्मन हावी हो जाते हैं। उम्मीद है कि वेनेजुएला से सबक लेकर अन्य देश सतर्क रहेंगे और अपनी संप्रभुता एवं आर्थिक स्वतंत्रता की रक्षा करेंगे।

About The Author: News Desk