मंगल संवाद: परिवारों की एकता का सूत्र

'मंगल संवाद', 'कलह संवाद' न बन जाए

परिवार को टूटने से बचाने के लिए ऐसी स्थिति कभी पैदा न होने दें

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के सोनपैरी गांव में 'हिंदू सम्मेलन' को संबोधित करते हुए बहुत गहरी बातें कही हैं। खासकर पारिवारिक मेलजोल बढ़ाने के लिए जो तौर-तरीके बताए हैं, वे अत्यंत प्रासंगिक हैं। आज लोगों में अकेलापन बढ़ता जा रहा है, परिवार टूट रहे हैं। बड़े-बुजुर्ग शिकायत करते हैं कि नई पीढ़ी बिगड़ गई है। नौजवान शिकायत करते हैं कि हमारे बुजुर्ग पाबंदियां लगाते रहते हैं, चैन से नहीं जीने देते हैं। परिवार के सदस्य अपने-अपने मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं। उन्हें दुनियाभर की जानकारी होती है। वे अमेरिका से लेकर जापान तक के मुद्दों पर विचार प्रकट करते हैं, लेकिन अपने परिवार के सदस्यों के साथ सीमित संवाद करते हैं। संवादहीनता की यह स्थिति दीर्घ अवधि में कई समस्याएं पैदा कर सकती है। डॉ. मोहन भागवत ने 'मंगल संवाद' का जो उदाहरण दिया है, उस पर देशवासियों को ध्यान देना चाहिए। हफ्ते में किसी एक दिन परिवार के सभी सदस्यों को साथ बैठना चाहिए और मेलजोल को मजबूत करने पर जोर देना चाहिए। इससे परिवारों की कई समस्याओं के समाधान तलाशने में मदद मिलेगी। इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि 'मंगल संवाद', 'कलह संवाद' न बन जाए। अक्सर देखने में आता है कि परिवार के बड़े सदस्य चाहते हैं कि (उनसे उम्र में) छोटे सदस्य उनकी हर बात स्वीकार कर लें। वे कहते हैं कि हमारे ज़माने में ऐसा होता था। जो सदस्य इससे जरा-सी असहमति जताता है, उसे अवज्ञाकारी घोषित कर दिया जाता है। धीरे-धीरे यह असहमति विद्रोह और विखंडन के बीज बो देती है।

इस स्थिति को कैसे टाला जाए? सबसे पहले, बच्चों पर कोई बात थोपी न जाए। बड़े सदस्यों को चाहिए कि वे अपने अनुभव बताएं। वे अपने गलत फैसलों के बारे में भी बताएं। 'मंगल संवाद' में परिवार के हर सदस्य को बोलने का मौका दें। यह आयोजन किसी भी स्थिति में ऐसा न हो, जिससे नई पीढ़ी को लगे कि हमें अपराधी की तरह अदालत में पेश किया जा रहा है। हर व्यक्ति में कुछ गुण और दोष होते हैं। 'मंगल संवाद' में गुणों पर ज्यादा चर्चा होनी चाहिए। किस सदस्य के कौनसे गुण के कारण परिवार को सहारा मिला, उसका उल्लेख करना चाहिए। उस सदस्य की खुले दिल से सराहना करनी चाहिए। परिवार कैसे एकजुट रहे, सभी सदस्य एक-दूसरे की मदद कैसे करें, अगर परिवार पर कोई संकट आया है तो मिलकर उसका कैसे मुकाबला करें, भविष्य को बेहतर बनाने के लिए क्या उपाय करें, गैर-जरूरी खर्चों को कैसे टालें, परिवार की आमदनी कैसे बढ़ाएं - जैसे कई बिंदुओं पर चर्चा करें। अगर कोई सदस्य किसी मुद्दे को लेकर नाराज है तो उससे बात करनी चाहिए। परिवार उसी स्थिति में मजबूत हो सकता है, जब सदस्यों में प्रेम हो। अगर प्रेम के बीच में पैसा आ गया तो संबंध बिगड़ेंगे। कई लोग शिकायत करते हैं कि जब वे छोटे थे तो संयुक्त परिवार में बड़े सदस्यों द्वारा उनसे अच्छा बर्ताव नहीं किया जाता था। वजह थी- पिता की कमजोर आर्थिक स्थिति। सभी लोग तो ऐसे नहीं होते, लेकिन बहुत लोग ऐसे होते हैं, जो बच्चों के पिता का बटुआ देखकर उनसे स्नेह करते हैं। अगर किसी की कमाई ज्यादा होती है तो उसके बच्चों को नहीं डांटा जाता। वहीं, कमजोर आर्थिक स्थिति वालों के बच्चों को गलती न होने पर भी खरी-खोटी सुनने को मिलती है। ऐसे बच्चे बड़े होकर उन बुजुर्गों का सम्मान नहीं करते और यह अलगाव टकराव का रूप ले लेता है। परिवार को टूटने से बचाने के लिए ऐसी स्थिति कभी पैदा न होने दें। स्नेह, संवाद और सद्भाव से ही परिवार मजबूत होंगे।

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