नकली निवेश योजनाएं, असली नुकसान

उच्च शिक्षित लोग भी हो रहे साइबर ठगी के शिकार

एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी का मामला चर्चा में है

पंजाब के पटियाला में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के एक सेवानिवृत्त अधिकारी जिस तरह बहुत बड़ी साइबर ठगी के शिकार हुए, उससे काफी हैरानी होती है। इन्होंने ठगों को करोड़ों रुपए भेजे और जब सच्चाई का पता चला तो खुद को गोली मार ली। इन पूर्व आईजी ने यूपीएससी परीक्षा पास करने के लिए खूब पढ़ाई की होगी। अपने सेवाकाल में कई पेचीदा केस सुलझाए होंगे। इसके बाद ऐसा क्या हुआ कि ये इतनी आसानी से साइबर ठगों के जाल में फंस गए? एक पूर्व पुलिस अधिकारी, वह भी आईपीएस से उम्मीद की जाती है कि वे खुद सतर्क रहेंगे और समाज को सुरक्षित बनाने में योगदान देंगे। हाल के वर्षों में ऐसे अनगिनत मामले सामने आए हैं, जब उच्च एवं प्रतिष्ठित पदों पर कार्यरत या सेवानिवृत्त लोग बहुत आसानी से साइबर ठगों के झांसे में आ गए। अगर इतने शिक्षित और अनुभवी लोगों का यह हाल है तो आम लोग कितने सुरक्षित हैं? उक्त सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी से साइबर ठगों ने सोशल मीडिया के जरिए संपर्क किया था, जिसके बाद उन्हें अपने ग्रुप में जोड़ लिया था। ठगों ने उच्च रिटर्न का वादा किया था, जिस पर विश्वास कर सेवानिवृत्त अधिकारी ने 8.10 करोड़ रुपए भेजे थे। रातोंरात मालामाल होने का लालच इन्सान का नुकसान कराता है। ऐसे हजारों लोग हैं, जिनके पास ऊंची से ऊंची डिग्रियां हैं, जीवन का बहुत अनुभव है, लेकिन जब साइबर ठग उन पर लालच का जाल फेंकते हैं तो वे सबकुछ भूलकर उनकी बातों में आ जाते हैं। क्या इन्होंने स्कूल में 'लालच बुरी बला' का सबक नहीं सीखा था?

मुंबई के एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी भी इसी तर्ज पर चलाए जा रहे सोशल मीडिया ग्रुप के शिकार हो गए। उन्हें निवेश पर उच्च रिटर्न का झांसा दिया गया था। उन्होंने मोटा मुनाफा कमाने के लिए 1.35 करोड़ रुपए साइबर ठगों को भेज दिए। जब असलियत सामने आई तो पुलिस की शरण में पहुंचे। अगर कोई आम आदमी साइबर ठगों की बातों पर विश्वास कर रुपए भेजता है तो कह सकते हैं कि उसे जानकारी नहीं थी, लेकिन सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी, जिन्होंने अपने सेवाकाल में बहुत कुछ सीखा होगा, भी झांसे में आ गए! साइबर ठग जानते हैं कि सेवानिवृत्त लोगों के पास काफी बचत होती है, इसलिए वे उनके सामने लुभावनी और नकली निवेश योजनाएं पेश करते हैं। जब कोई शिकार फंस जाता है तो उसे और निवेश करने के लिए कहते हैं। धीरे-धीरे उसकी पूरी बचत हड़प लेते हैं। आखिर में उसे सोशल मीडिया ग्रुप से बाहर निकालकर अपने फोन नंबर बंद कर देते हैं। सेवानिवृत्त लोगों को ऐसी निवेश योजनाओं से बहुत सावधान रहना चाहिए, अन्यथा एक ही झटके में ज़िंदगीभर की बचत से हाथ धोना पड़ सकता है। अगर कोई व्यक्ति या ग्रुप उच्च रिटर्न का वादा करे, तो स्वयं से एक सवाल जरूर पूछें- 'जब इतना फायदा हो रहा है तो इस व्यक्ति या ग्रुप को मुझसे रुपए क्यों मांगने पड़ रहे हैं ... ये लोग खुद ही निवेश कर मालामाल क्यों नहीं हो जाते?' उक्त सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी ने निवेश योजना में पहले दिन 80,000 रुपए जमा कराए थे। अगले दिन उनके निवेश विवरण में 88,000 रुपए नजर आए। क्या किसी सुरक्षित निवेश योजना में इतना रिटर्न संभव है? अगर ऐसा संभव होता तो आम लोगों को रोजाना घंटों काम करने की क्या जरूरत थी? हर कोई घर बैठकर करोड़पति बन जाता। नकली निवेश योजनाओं की असलियत जानने के लिए विशेषज्ञ होना जरूरी नहीं है। सामान्य बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल कर कोई भी व्यक्ति इनसे बच सकता है। सबसे जरूरी है- लालच से दूर रहें। लालच के वशीभूत होने पर व्यक्ति की बुद्धि नष्ट हो जाती है।

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