बेंगलूरु/दक्षिण भारत। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव सचिन पायलट ने केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण रोज़गार कानून मनरेगा को बदलने को एक 'ऐतिहासिक गलती' और इसे सबसे गरीब लोगों की रोज़ी-रोटी के अवसरों पर एक हमला बताया है।
राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने भाजपा पर नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी को झूठे केस में फंसाकर लगातार 'राजनीतिक बदले की भावना' को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया।
सचिन पायलट ने कहा, 'भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक गलती की है। आज़ादी मिलने के बाद इतिहास में पहली बार, राष्ट्रपिता के नाम पर शुरू की गई किसी योजना या कार्यक्रम का नाम बदला गया है। सरकार ने अकेले ही मनरेगा नाम के पुराने कार्यक्रम के ज़रिए ग्रामीण भारत के पास मौजूद एकमात्र वित्तीय सुरक्षा जाल को खत्म कर दिया है।'
सचिन पायलट ने कर्नाटक कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सामाजिक सुधार और आर्थिक सुधारों को लेकर भाजपा की राजनीतिक इच्छाशक्ति पूरी तरह उजागर हो चुकी है। तत्कालीन संप्रग सरकार ने मनरेगा को एक ऐतिहासिक कानून के रूप में लागू किया था, जिसने रोजगार के अधिकार के साथ सम्माजनक जीवन सुनिश्चित किया।
सचिन पायलट ने कहा कि भाजपा के सत्ता पर काबिज आने के बाद से ही इस योजना के प्रति लगातार उदासीन रवैया अपनाया गया। कभी बजट आवंटन कम करके तो कभी राज्यों को भुगतान जारी करने में देरी करके।
सचिन पायलट ने कहा कि इस योजना की शुरुआत के समय यह सुनिश्चित किया गया था कि कुल व्यय का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करेगी और शेष राशि राज्यों द्वारा दी जाएगी। वीबी-जी राम-जी के नए प्रावधान के तहत राज्यों का हिस्सा बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। यह बदलाव पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रहे राज्यों पर भारी दबाव डालता है और उन्हें मजदूरों को भुगतान करने के लिए अधिक वित्तीय बोझ उठाने के लिए मजबूर करता है।
सचिन पायलट ने कहा कि इस मांग-आधारित योजना की मूल भावना को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही यह योजना अब सरकारों की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर होगी। कांग्रेस पार्टी इन एकतरफा फैसलों की कड़ी निंदा करती है, जो बिना किसी चर्चा तथा विपक्षी दलों और प्रमुख हितधारकों से परामर्श लिए बिना लिए गए हैं।