बांग्लादेश: दीपूचंद्र लिंचिंग मामले में अब तक 12 लोग पकड़े गए

140-150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया

Photo: PixaBay

ढाका/नई दिल्ली/दक्षिण भारत। बांग्लादेश में एक हिंदू व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या के मामले में दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मीडिया रिपोर्टों में यह जानकारी दी गई है।

पुलिस और रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) के सूत्रों के हवाले से द डेली स्टार अखबार ने बताया कि हालिया गिरफ्तारियों के साथ, हत्या में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

बता दें कि गुरुवार को मैमनसिंह के बालुका में कथित ईशनिंदा के आरोप में 25 साल के गारमेंट फैक्ट्री मजदूर दीपूचंद्र दास को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और उसके शव को आग लगा दी।

पुलिस के मुताबिक, दीपूचंद्र दास को पहले फैक्ट्री के बाहर भीड़ ने ईशनिंदा के आरोपों पर पीटा और फिर एक पेड़ से लटका दिया। इसके बाद भीड़ लाश को ढाका-मैमनसिंह हाईवे के किनारे छोड़कर चली गई। बाद में उसे आग लगा दी।

पुलिस ने शव को बरामद किया और पोस्टमार्टम के लिए मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज के मुर्दाघर भेज दिया। पीड़ित के भाई अपू चंद्र दास ने भालुका पुलिस स्टेशन में 140-150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। 

आरोप था कि दीपूचंद्र दास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं।

हालांकि, मैमनसिंह में आरएबी-14 के कंपनी कमांडर, मोहम्मद शम्सुज्जमां ने बताया कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह पता चले कि मृतक ने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा पोस्ट किया था जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हों।

उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय लोग या गारमेंट फैक्ट्री के दूसरे कर्मचारी भी ऐसी किसी गतिविधि के बारे में नहीं बता पाए।

शम्सुज्जमां ने कहा, 'अब हर कोई कह रहा है कि उन्होंने खुद उसे इस तरह की कोई बात कहते हुए नहीं सुना। ऐसा कोई नहीं मिला जिसने खुद धर्म को ठेस पहुंचाने वाली कोई बात सुनी हो या देखी हो।'

उन्होंने कहा, 'जब हालात खराब हो गए तो फैक्ट्री को बचाने के लिए दीपूचंद्र दास को जबरदस्ती बाहर निकाल दिया गया।' अंतरिम सरकार ने लिंचिंग की निंदा करते हुए कहा कि नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है।

पिछले साल अगस्त में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद बांग्लादेश में हिंदू आबादी को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है।

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