आरएसएस ने परिसीमन पर चर्चा कर रहे दलों से पूछा- 'क्या आप सचमुच चिंतित हैं?'

'जो लोग परिसीमन पर चर्चा में भाग ले रहे हैं, उन्हें आत्मनिरीक्षण करना चाहिए ...'

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बेंगलूरु/दक्षिण भारत। आरएसएस के संयुक्त महासचिव अरुण कुमार ने शनिवार को परिसीमन प्रक्रिया पर चर्चा करने वालों से पूछा कि क्या उनका कोई राजनीतिक एजेंडा है या वे वास्तव में इसे लेकर चिंतित हैं?

द्रमुक प्रमुख एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के निमंत्रण पर कुछ दक्षिणी राज्यों के नेता परिसीमन के परिणामों और इससे निपटने की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए चेन्नई में एकत्र हुए थे। अरुण कुमार ने उनसे ऐसी चर्चाओं से बचने को कहा, क्योंकि केंद्र ने अभी तक प्रक्रिया शुरू नहीं की है।

कुमार ने एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा, 'मेरी राय में, जो लोग परिसीमन पर चर्चा में भाग ले रहे हैं, उन्हें आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि क्या यह उनका राजनीतिक एजेंडा है या वे वास्तव में अपने क्षेत्र के हित के बारे में सोच रहे हैं?'

उन्होंने कहा, 'उन्हें (स्टालिन और अन्य को) इस बारे में सोचने दीजिए और आपको (मीडिया को) उनसे पूछना चाहिए कि क्या परिसीमन प्रक्रिया वास्तव में शुरू हो गई है?'

आरएसएस नेता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) की तीन दिवसीय बैठक के लिए यहां आए थे।

कुमार ने कहा कि यह चर्चा तब होनी चाहिए, जब परिसीमन प्रक्रिया शुरू हो और अधिनियम का मसौदा तैयार हो जाए।      

उन्होंने कहा, 'न तो जनगणना शुरू हुई है और न ही परिसीमन पर चर्चा (केंद्र द्वारा) शुरू की गई है। यहां तक ​​कि अधिनियम का मसौदा भी अभी तक तैयार नहीं हुआ है।'

उन्होंने कहा कि भारत में परिसीमन एक संवैधानिक प्रक्रिया है और चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए परिसीमन कानून के तहत होता है।

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