प्रधानमंत्री बनने के लिए नीतीश राजद-कांग्रेस की गोद में बैठ गएः शाह

शाह ने कहा कि आज मैं जब बिहार में आया हूं, तब लालू और नीतीश की जोड़ी को पेट में दर्द हो रहा है


पूर्णिया/दक्षिण भारत। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को बिहार के पूर्णिया में ‘जन भावना महासभा’ को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर मैं उन्हें प्रणाम करता हूं। दिनकर की कविताओं ने आजादी के आंदोलन को धार दी। साथ ही उनकी लेखनी ने भारतीय संस्कृति को भी मजबूती प्रदान करने का काम किया।

शाह ने कहा कि आज मैं जब बिहार में आया हूं, तब लालू और नीतीश की जोड़ी को पेट में दर्द हो रहा है। वो कह रहे हैं कि बिहार में झगड़ा लगाने आए हैं, कुछ करके जाएंगे। लालूजी, झगड़ा लगाने के लिए मेरी जरूरत नहीं है। आप झगड़ा लगाने के लिए पर्याप्त हैं, आपने पूरा जीवन यही काम किया है।

शाह ने कहा कि नीतीश, लालू की गोद में बैठ गए हैं। अब यहां डर का माहौल बन गया है। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि किसी को डरने की जरूरत नहीं है। आपके साथ नरेंद्र मोदी की सरकार है।

शाह ने कहा कि आज भाजपा को धोखा देकर लालू की गोद में बैठकर नीतीश कुमार ने स्वार्थ और सत्ता की राजनीति का जो परिचय दिया है, उसके खिलाफ बिगुल फूंकने की शुरुआत भी इसी बिहार की भूमि से होगी।

शाह ने कहा कि बिहार की भूमि परिवर्तन का केंद्र रही है। अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता का आंदोलन हो या लोकतंत्र के खिलाफ जो इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया, तब जय प्रकाश नारायण का आंदोलन हो - यह बिहार की भूमि से ही शुरू हुआ है।

शाह ने कहा कि हम स्वार्थ और सत्ता की राजनीति की जगह सेवा और विकास की राजनीति के पक्षधर हैं। प्रधानमंत्री बनने के लिए नीतीश बाबू ने पीठ में छुरा घोंपकर आज राजद और कांग्रेस की गोद में बैठने का काम किया।

शाह ने कहा कि आज में बिहार की इस विराट सभा से लालू और नीतीश, दोनों से कहना चाहता हूं कि आप जो ये दल-बदल बार-बार करते हो, तो यह धोखा किसी पार्टी के साथ नहीं है, बल्कि यह बिहार की जनता के साथ है।

शाह ने कहा कि नीतीशजी, 2014 में भी आपने यही किया था,  ना घर के रहे थे ना घाट के। लोकसभा चुनाव 2024 आने दीजिए, आपकी इस जोड़ी को बिहार की जनता सूपड़ा साफ कर देगी। 2025 में भी यहां भाजपा पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी।

शाह ने कहा कि नीतीश कुमार कोई राजनीतिक विचारधारा के पक्षधर नहीं हैं। वे समाजवाद छोड़कर लालू के साथ भी जा सकते हैं, जातिवादी राजनीति कर सकते हैं। नीतीश समाजवाद छोड़कर वामपंथियों, कांग्रेस के साथ भी बैठ सकते हैं। वे राजद छोड़कर भाजपा के साथ भी आ सकते हैं। नीतीश की एक ही नीति है- कुर्सी मेरी अक्षुण्ण रहनी चाहिए।

शाह ने कहा कि नीतीश बाबू, भारत की जनता अब जागरूक हो चुकी है। स्वार्थ से और सत्ता की कुटिल राजनीति से प्रधानमंत्री नहीं बना जा सकता। विकास के काम करने से, अपनी विचारधारा के प्रति समर्पित रहने से और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करने से ही देश की जनता प्रधानमंत्री बनाती है।

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