बड़े वित्तीय लेनदेन कर आयकर से बचने वालों की पहचान करने के लिए नॉन फाइलर निगरानी प्रणाली लागू

बड़े वित्तीय लेनदेन कर आयकर से बचने वालों की पहचान करने के लिए नॉन फाइलर निगरानी प्रणाली लागू

नई दिल्ली। सरकार ने ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने के लिए नॉन फाइलर निगरानी प्रणाली लागू कर दी है जिन्होंने ब़डे वित्तीय लेन देन तो किए हैं लेकिन आयकर विवरणी नहीं भरी है।वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को राज्यसभा को यह जानकारी देते हुए बताया कि नॉन फाइलर निगरानी प्रणाली वित्तीय लेन देन का विवरण (एसएफटी), स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) तथा स्रोत पर कर संग्रहण (टीडीएस) विवरण, खुफिया सूचना तथा आपराधिक जांच (आईएंडसीआई) डाटा आदि सहित घरेलू सूचना के साथ-साथ तीसरे पक्ष से प्राप्त लेन-देन संबंधी डाटा शामिल कर उनका विश्लेषण करती है। उन्होंने बताया कि बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों से ब़डे वित्तीय लेन-देन तथा वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से वित्तीय लेन-देन के विवरण (एसएफटी) के रूप में उच्च मूल्य के खर्च के बारे में डाटा शामिल करने के लिए वित्तीय सूचना के संग्रहण तथा सत्यापन के इस तंत्र का विस्तार किया गया है। जेटली ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि दो लाख रुपए से अधिक के सभी लेन-देन के लिए तथा संपत्ति, शेयरों, बॉन्ड, बीमा, विदेश यात्रा, डीमैट खाता आदि के बारे में लेन-देने के लिए पैन का उल्लेख करना अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि विभिन्न एनएमएस चक्रों में पता लगाए गए संभावित कर देनदारियों के साथ नॉन फाइलरों की संख्या वर्ष २०१३ में १२.१९ लाख, वर्ष २०१४ में २२.०९ लाख, वर्ष २०१५ में ४४.०७ लाख, वर्ष २०१६ में ५८.९५ लाख और वर्ष २०१६ में ६७.५४ लाख थी।

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