बेंगलूरु/दक्षिण भारतभारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने गुरुवार को कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान के दौरान पार्टी नेताओं के बयानों में ’’सांप्रदायिकता के बीज’’ ढूंढ निकाले। इन पर गंभीर सवालिया निशान लगाते हुए उन्होंने ऐसे प्रशासनिक अधिकारियों की कार्रवाइयों तक को नहीं बख्शा, जिनसे कांग्रेस के परोक्ष समर्थन और भाजपा के प्रत्यक्ष विरोध की बू आती है। उन्होंने कांग्रेस के समर्थन में मुस्लिम मतदाताओं से सामूहिक रूप से मतदान करने की अपील के साथ ही उडुपी के मंदिरों के शिखर से भगवा झंडों को हटाने के आदेशों तक का जिक्र करते हुए अपने जाने-पहचाने लहजे में इनकी तीखी आलोचना की। उनके निशाने पर खास तौर पर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और मल्लिकार्जुन खरगे रहे। वहीं, उडुपी जिले की डिप्टी कमिशनर प्रियंका फ्रांसिस द्वारा मंदिरों में लगे भगवा ध्वज हटाने के बारे में जारी किए गए कथित आदेश की भी उन्होंने जमकर खिंचाई की। पात्रा ने कहा कि भगवा ध्वज भाजपा जैसी राजनीतिक पार्टी का चुनावी रंग या निशान नहीं है। यह हिंदुत्व का प्रतीक है। मंदिरों से इन ध्वजाओं को हटाना समूचे हिंदू धर्म का अपमान है। लोगों से यक्षगान के दौरान भगवा झंडे न फहराने के लिए कहना भी ऐसा ही कदम है। उन्होंने जनता दल (एस) छो़डकर पिछले ही महीने कांग्रेस की सदस्यता हासिल करने वाले मौजूदा विधायक जमीर अहमद के एक बयान की भी तीखी निंदा की। पात्रा ने आरोप लगाया है कि जमीर अहमद ने कथित तौर पर अपने बयान में यह भी जो़डा था कि कांग्रेस के पक्ष में मतदान नहीं करने वाले मुस्लिम इंतजार करें यह देखने का कि मैं क्या करता हूं। जमीर की टिप्पणी को मुस्लिम समुदाय के लिए धमकी भरी चेतावनी मानते हुए संबित पात्रा ने इसकी तीखी निंदा की। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सिद्दरामैया राज्य में एक स्वच्छ प्रशासनिक व्यवस्था देने का दावा करते हैं, जो भ्रष्टाचार मुक्त रहा है। तथ्य यह है कि यह सरकार वक्फ संपत्तियों में २ लाख ३० हजार करो़ड रुपए के घपले के आरोपों की जांच तक नहीं करवा सकी है। जिन लोगों ने इस ब़डी रकम की हेरा-फेरी की है, उनके खिलाफ भी स्वाभाविक रूप से कोई कदम नहीं उठाया गया है। इस घोटाले के बारे में राज्य सरकार को एक रिपोर्ट भी सौंपी गई थी लेकिन सरकार ने इसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया। पात्रा ने आरोप लगाया, ’’वक्फ बोर्ड की परिसंपत्तियों पर अवैध कब्जा करने वाले तत्वों ने कब्रगाहों तक पर अतिक्रमण कर लिया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य में किस स्तर पर भ्रष्टाचार का बोलबाला हो चुका है।’’ वहीं, पत्रकारों के एक प्रश्न के उत्तर में भाजपा प्रवक्ता ने कर्नाटक चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद किसी भी अन्य पार्टी के समर्थन से राज्य में सरकार बनाने की संभावना से साफ इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा, ’’मैं दोबारा पूरे विश्वास के साथ दोहराना चाहूंगा कि प्रदेश की जनता चुनाव के बाद भाजपा को सरकार बनाने के लिए स्पष्ट जनादेश देने वाली है। हो सकता है कि चुनाव के परिणामों की घोषणा के बाद कांग्रेस को जनता दल (एस), पीएफआई और एसडीपीआई जैसे संगठनों के समर्थन की जरूरत प़डे।’’

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