मनीष सिसोदिया एवं अ​रविंद केजरीवाल
मनीष सिसोदिया एवं अ​रविंद केजरीवाल

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। लुभावने वादों और व्यवस्था परिवर्तन के नारे के साथ 2015 में दिल्ली की सत्ता में आई केजरीवाल सरकार की उपलब्धियों के बारे में प्रकाशित एक रिपोर्ट उनके विरोधियों को नया अस्त्र दे सकती है। दरअसल रिपोर्ट का दावा है कि साल 2015 में किए गए 70 में से 67 वादों में दिल्ली सरकार नाकाम रही है।

पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर (पीपीआरसी) द्वारा जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में खुद के कार्यों को सबसे अच्छा बताया, परंतु हकीकत कुछ और ही है। ​दिल्ली सरकार इन पर खरी नहीं उतरी है। उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी ने 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान जनता के सामने 70 बिंदु पेश किए थे जिनमें से मुफ्त वाईफाई योजना भी थी, जिसने सबका ध्यान खूब आकर्षित किया।

हालांकि अब चार साल बाद जब उन्हीं बिंदुओं के आधार पर केजरीवाल सरकार की उपलब्धियों का आकलन किया गया तो वे धरातल से कोसों दूर नजर आती हैं। पीपीआरसी निदेशक डॉ. विनय सहस्रबुद्धे द्वारा दिल्ली सरकार के वादों पर जारी की गई इस रिपोर्ट में ऐसी कई ‘उपलब्धियों’ का जिक्र ​है। इसके अनुसार, केजरीवाल सरकार शिक्षा के क्षेत्र में सुधार को लेकर बड़ा दावा करती रही है लेकिन वास्तविकता इससे अलग नजर आती है। सरकार ने 500 नए स्कूल बनाने का वादा किया था। वहीं, सिर्फ 5 प्रतिशत स्कूलों में काम शुरू हो पाया है।

रिपोर्ट कहती है कि दिल्ली के स्कूलों से पास हुए सिर्फ 0.13 प्रतिशत बच्चों को ही शिक्षा ऋण मिला है। इसी प्रकार, जिन 20 नए डिग्री कॉलेजों का वादा किया गया था, उनमें से एक के लिए भी काम नहीं शुरू हुआ। यही नहीं, शिक्षकों के आधे से भी कम पदों पर नियुक्तियां हुईं।

मोहल्ला क्लिनिक की हालत
रिपोर्ट में दिल्ली सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए दावों पर कहा गया है कि मोहल्ला क्लिनिक की स्थिति बहुत खराब है। अस्पतालों में बिस्तरों की तादाद बढ़ाने का वादा किया गया था लेकिन 60 प्रतिशत से ज्यादा की पूर्ति नहीं हुई। रिपोर्ट में मोहल्ला क्लिनिक के बारे में कहा गया है कि इन पर डॉक्टरों, दवाइयों और दूसरी सुविधाओं पर खूब रकम खर्च हुई, लेकिन कई मोहल्ला क्लिनिक ऐसे भी हैं जहां आवारा पशु घूमते पाए गए।

‘आयुष्मान’ का नहीं लेने दिया लाभ
रिपोर्ट के मुताबिक, आयुष्मान योजना से पूरे भारत में 20 लाख परिवारों को फायदा मिला, लेकिन दिल्ली सरकार ने अपने नागरिकों को इसका फायदा नहीं लेने दिया। इस योजना के जरिए पांच लाख रुपए तक का उपचार निशुल्क हो सकता है।

इसी प्रकार सीसीटीवी लगाने की योजना भी कोई कमाल नहीं दिखा पाई। मुफ्त वाईफाई देने की योजना के संबंध में केजरीवाल सरकार के दावे धरे रह गए। लोगों को पानी न मिलने और गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायतों में 50 प्रतिशत से भी ज्यादा वृद्धि देखी गई। इस वजह से केजरीवाल सरकार को आलोचना का सामना भी करना पड़ा।

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