जेट एयरवेज
जेट एयरवेज

नई दिल्ली/दक्षिण भारत डेस्क। आर्थिक संकट में घिरी जेट एयरवेज अपनी शेयरधारक एतिहाद एयरवेज की ज्यादातर शर्तें मानने को सहमत हो गई है। बता दें कि जेट एयरवेज भारी-भरकम कर्ज तले दबी है। इस स्थिति में कंपनी को बचाने के लिए एतिहाद की शर्तें उसे काफी राहत दे सकती हैं। इस संबंध में आगामी कुछ दिनों में दोनों कंपनियों के बीच समझौता हो सकता है। दोनों कंपनियां एमओयू पर हस्ताक्षर करेंगी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते के बाद जेट एयरवेज के संस्थापक और चेयरमैन नरेश गोयल को अपना हिस्सा 51 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत करना पड़ सकता है। साथ ही बोर्ड से उनकी विदाई हो सकती है। वहीं एतिहाद की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत तक हो सकती है। इस मामले पर जेट एयरवेज और एतिहाद की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

देश की प्रमुख एयरलाइन कंपनियों में शुमार जेट एयरवेज पर करीब 1.14 बिलियन डॉलर का कर्ज है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ईंधन की कीमतों में इजाफे के साथ ही कंपनी पर कर्ज भी बढ़ता गया। इससे कंपनी को कई मोर्चों पर खासी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जेट एयरवेज के सीईओ विनय दुबे ने कर्मचारियों को भेजे एक पत्र में कहा है कि शेयरधारक समाधान की दिशा में कार्यरत हैं और इसका नतीजा काफी निकट है।

एयरलाइन के डायरेक्टर 14 फरवरी को बोर्ड की एक बैठक में इस सौदे से जुड़ी कानूनी औपचारिकताओं पर बातचीत कर सकते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि जेट एयरवेज शर्तों को मान लेती है तो एतिहाद तुरंत 35 मिलियन डॉलर की रकम जारी कर सकती है।

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