pak pm imran khan
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इस्लामाबाद/दक्षिण भारत। पुलवामा हमले के बाद भारत के सख्त रुख से घबराया पाकिस्तान अब शांति की बात करने लगा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार को एक संदेश जारी कर कहा कि वे भारत से बातचीत करने के लिए तैयार हैं और बातचीत से ही शांति संभव है। अपने संबोधन के आखिर में उन्होंने भारत की ओर से किसी सैन्य कार्रवाई की संभावना का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके बाद पाकिस्तान भी जवाब देगा।

इमरान ने कहा कि पुलवामा में जो घटना हुई थी, मुझे तभी उस पर जवाब देना चाहिए था, क्योंकि पाकिस्तान पर आरोप लगाया गया। उन्होंने कहा कि इस दौरान सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान पाक दौरे पर थे। इसलिए यदि वे पुलवामा पर जवाब देते तो सारा ध्यान उधर चला जाता। उन्होंने कहा कि वे भारत सरकार को यह जवाब दे रहे हैं।

इमरान ने कहा कि भारत ने आरोप लगाया लेकिन कोई सबूत नहीं दिया और न यह सोचा कि इससे पाकिस्तान को क्या फायदा है। उन्होंने कहा ​कि इस समय पाकिस्तान स्थिरता की ओर जा रहा है। उन्होंने खुद के देश को आतं​कवाद से पीड़ित और उसके खिलाफ बताते हुए कहा कि हमने 15 साल दहशतगर्दी के खिलाफ जंग लड़ी, जिसमें 70 हजार पाकिस्तानी मारे गए।

इमरान ने कहा कि अब दहशतगर्दी नीचे जा रही है, अमन आ रहा है, स्थिरता आ रही है, तो उन्हें ऐसी घटना से क्या फायदा होगा। यही नहीं, उन्होंने भारत सरकार को शांति का उपदेश देते हुए कहा कि क्या आपको भूतकाल में ही फंसे रहना है कि हर बार कश्मीर में कोई घटना हो और पाक को जिम्मेदार ठहरा दिया जाए। उन्होंने दोनों देशों के बीच बातचीत पर जोर देते हुए कहा कि यह नया पाकिस्तान है, नई सोच है। उन्होंने कहा कि हमारे हक में है कि न हमारी जमीन से कोई बाहर जाकर दहशतगर्दी करे और न बाहर से कोई आकर पाकिस्तान में दहशतगर्दी करे।

इमरान ने भारत सरकार से कहा कि इस घटना में आप किसी किस्म की तहकीकात करवाना चाहते हैं कि पाकिस्तानी इसमें शामिल था, हम तैयार हैं। अगर आपके पास कोई खुफिया जानकारी है कि कोई पाकिस्तानी इस घटना में शामिल है, तो हमें दें। मैं आपको गारंटी देता हूं कि हम कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी के दबाव से नहीं, बल्कि इसलिए कार्रवाई करेंगे कि अगर कोई पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर रहा है, तो यह हमसे दुश्मनी है।

इमरान ने कहा कि जब भी हम भारत से वार्ता के लिए कहते हैं तो भारत की पहली शर्त होती है कि आतंकवाद पर बात की जाए। मैं आपको कहता हूं कि हम आतंकवाद पर भी बात करने के लिए तैयार हैं। इमरान ने आतंकवाद को इस पूरे इलाके की समस्या बताते हुए कहा कि पाकिस्तान वो मुल्क है, जिसको सबसे ज्यादा आतंकवाद से नुकसान हुआ है। उन्होंने शांति की ये बातें कहने के बाद एक बार फिर कश्मीर राग अलापा और कहा कि कश्मीरी नौजवान उस स्थिति में क्यों पहुंच गए कि मौत का खौफ ही उतर गया है।

इमरान ने अफगानिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि मसला बातचीत से ही हल होगा। इसके बाद उन्होंने कहा कि भारत के मीडिया और राजनेताओं से ऐसी आवाजें सुन रहे हैं कि पाकिस्तान को सबक सिखाना चाहिए, उस पर सैन्य कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर समझते हैं कि आप पाकिस्तान पर किसी किस्म का हमला करेंगे, तो पाकिस्तान पलटवार करने की सोचेगा नहीं, बल्कि पलटवार करेगा। कोई और दूसरा रास्ता नहीं होगा, जवाब देने के बगैर।

इमरान ने कहा कि हम सब जानते हैं कि जंग शुरू करना आसान है। यह इंसान के हाथ में है, लेकिन जंग खत्म करना इंसान के हाथ में नहीं होता। यह बात किधर जाएगी, अल्लाह बेहतर जानता है। उन्होंने शांति और आपसी वार्ता पर जोर देते हुए कहा कि मैं यह उम्मीद रखता हूं कि हम समझदारी और विवेक का उपयोग करेंगे। अपने पूरे संबोधन में इमरान खान शांति और आपसी सहयोग पर तो खूब बोले लेकिन उन आतंकी संगठनों के बारे में एक शब्द नहीं कहा जो पाकिस्तान में फल-फूल रहे हैं।

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