भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में पार्टी में शामिल होते तेदेपा के राज्यभा सांसद.
भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में पार्टी में शामिल होते तेदेपा के राज्यभा सांसद.

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। आंध्र प्रदेश में सत्ता गंवाने और लोकसभा चुनाव में भी करारी शिकस्त झेलने के बाद तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) को एक और बड़ा झटका लगा है। उसके चार राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से अलग होने का फैसला कर लिया है। उसके तीन सांसदों ने गुरुवार को राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू से मुलाकात की।

एक समाचार एजेंसी के अनुसार, राज्यसभा में तेदेपा के सांसद वाईएस चौधरी, सीएम रमेश, टीजी वेंकटेश भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, तेदेपा के राज्यसभा सांसद जीएम राव की तबीयत अभी ठीक नहीं है, इसलिए वे बाद में औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होंगे।

एएनआई को दिए एक बयान में वाईएस चौधरी ने इस बात की पुष्टि की है कि वे भाजपा में शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा टीजी वेंकटेश ने भी तेदेपा छोड़कर भाजपा में जाने की बात स्वीकारी। उन्होंने बताया कि वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय जनता युवा मोर्चा में सक्रिय रह चुके हैं।

एएनआई के ट्विटर अकाउंट पर एक पत्र भी जारी किया गया है जिसे उक्त सांसदों द्वारा तेदेपा के भाजपा में विलय का संकल्प पत्र बताया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सांसद चौधरी सहित टीजी वेंकटेश और सीएम रमेश ने नई दिल्ली में राज्यसभा के सभापति से मुलाकात की और अपने फैसले से अवगत कराया।

उल्लेखनीय है कि तेदेपा के राज्यसभा में छह सदस्य हैं। ऐसे में यदि उसके चार सदस्य भाजपा का दामन थामते हैं तो उन पर दलबदल विरोधी कानून लागू नहीं होगा। चूंकि अलग होने वाले गुट को उसी स्थिति में मान्यता मिलती है जबकि वे सदन में मूल पार्टी के सदस्यों की संख्या का कम से कम दो तिहाई हों।

तेदेपा में यह बिखराव ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू छुट्टियां मनाने सपरिवार विदेश गए हैं। इससे पार्टी में हड़कंप मच गया है। हाल में संपन्न लोकसभा और विधानसभा चुनावों के नतीजे तेदेपा के पक्ष में नहीं रहे। आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस जोरदार बहुमत के साथ सत्ता में आई। तेदेपा को 175 में से 151 सीटों पर शिकस्त मिली। वहीं, आंध प्रदेश की 25 में से 22 लोकसभा सीटों पर भी वाईएसआर कांग्रेस का कब्जा हो गया। तेदेपा को सिर्फ तीन सीटों से संतोष करना पड़ा।

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