हैदराबाद। क्या कभी आप सोच सकते हैं कि ऐसा नेता जिसके पास हमारे देश की नागरिकता ही नहीं हो और जनता उसे विधायक बना दे। जी हां ऐसा हुआ है और वह भी हमारे देश में। हम बात कर रहे है तेलंगाना राज्य की। राज्य के करीमनगर जिला के वेमुलावा़डा से विधायक चिन्नमनेनी रमेश के पास हमारे देश की नागरिकता ही नहीं बची है। रमेश तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) पार्टी के नेता हैं। मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के द्वारा २८ अगस्त को मिले आदेश के बाद यह बात कही कि जर्मनी की नागरिकता रखने वाले विधायक रमेश ने गलत सूचना देकर भारतीय नागरिकता हासिल की और अब वह भारतीय नागरिकता के तमाम पैमानों पर भी फेल साबित हो रहे हैं।चिन्नमनेनी रमेश, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के वेमुलावा़डा (करीमनगर जिला) से विधायक हैं। साथ ही महाराष्ट्र के राज्यपाल विद्यासागर राव के भतीजे और तेलंगाना सीएम के चंद्रशेखर राव के रिश्तेदार भी हैं। रमेश बाबू वर्ष २००९ में तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के टिकट पर वेमुलावा़डा से चुनाव जीते थे। वर्ष २०१० में वह टीआरएस में शामिल हो गए और उपचुनाव में फिर से जीत हासिल की। वर्ष २००९ में रमेश बाबू से १,८०० मतों से पराजित होने वाले कांग्रेस नेता ए. श्रीनिवास ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि जर्मनी की नागरिकता रखने वाले रमेश ने गलत सूचना देकर भारतीय नागरिकता हासिल की। याचिका के अनुसार रमेश बाबू ने नागरिकता अधिनियम, १९५५ के तहत नागरिकता के लिए अर्जी दी थी। इसके मुताबिक भारत में १२ महीनों तक निवास करने वाला व्यक्ति ही नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद रमेश का कहना है कि वह इस मामले में आगे अपील करेंगे। जो आम आदमी के मुद्दों पर मुझसे ल़डाई नहीं ल़ड पा रहे इस तरह झूठे मामलों में फंसा कर मुझे बदनाम करने की साजिश रच रहा है। रमेश ने करीमनगर कलेक्टर के यहां नागरिकता के लिए ३१ मार्च, २००८ को दी गई अर्जी में कहा था कि वह २२ जनवरी, २००७ से भारत में रह रहे हैं। श्रीनिवास ने इस तथ्य को फर्जी बताया था। रमेश ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। जर्मन महिला से शादी करने वाले रमेश वर्ष १९७६ से जर्मनी में रह रहे हैं, जबकि वर्ष १९९३ को उन्हें वहां की नागरिकता मिली थी।

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