खुश मिजाज व्यक्तित्व के धनी थे शांतिलाल गिलड़ा

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श्रीकांत पाराशर

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। शांतिलाल गिलड़ा मूथा के निधन का समाचार मेरे लिए एक बार स्तब्ध कर देने वाला था। मैं अभी पिछले दिनों ही उनसे विक्रम हॉस्पिटल में मिला था। मैं अपनी पत्नी के जनरल चैकअप के सिलसिले में गया था। वहां उनके पुत्र मुझे मिले और उन्होंने बताया कि पिताजी की बाईपास सर्जरी हुई है और उन्हें डिस्चार्ज किया जा रहा है।

मैं उनसे मिला और कुशलक्षेम पूछी। वे थोड़े शरीर से कमजोर तो लग रहे थे परन्तु हौसला कम नहीं दिखाई दिया। उन्होंने अस्पताल और डॉक्टर की प्रशंसा की। बताया कि यहां सुविधाएं, देख-रेख बहुत अच्छी है। मैंने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और जल्द ही मिलने की बात कहकर सादर अभिवादन किया। मुझे नहीं पता था कि उनसे मेरी वह अंतिम मुलाकात होगी।

हमेशा की तरह उन्होंने चेहरे पर मुस्कान लाकर मेरा अभिवादन स्वीकार किया। वे अपने दोनों हाथों को आपस में मिलाना भी चाह रहे थे ताकि हाथ जुड़ने की मुद्रा बन सके परन्तु उनके लिए यह सहज नहीं था। शांतिलालजी से मेरा चार दशक पुराना परिचय था। केवल परिचय नहीं, उन संबंधों में आत्मीयता भी थी।

अस्सी के दशक में शूटिंग-सर्टिंग के व्यवसाय में उनका अपना एक स्थान था। उनके यहां हमारे एक मित्र भी कार्यरत थे, तो उनके यहां जाना आना होता था। वे काफी मेहनती और मितव्ययी व्यक्ति थे। उन्होंने अपनी मेहनत के बलबूते पर एमटीसी (मैसूरु टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन) की साख स्थापित की। पैसा कमाने के दिनों में उन्होंने मेहनत में कोई कसर नहीं छोड़ी। धन और मान-प्रतिष्ठा कमाने में किसी से पीछे नहीं रहे। स्वेच्छा से आगे बढ़कर अपनी सामर्थ्यानुसार दान-धर्म भी करते थे।

उनके चेहरे पर एक स्मित मुस्कान हमेशा बनी रहती थी। कोई भी परिचित सामने दिखाई देता तो उनके दोनों हाथ एक दूसरे की ओर बढ़ जाते थे और वे हमेशा करबद्ध अभिवादन करते थे। हर सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति दर्ज होती थी। हमेशा चुस्त दुरुस्त दिखाई देते थे। 71 वर्ष की उम्र में भी वेल मेन्टेन्ड पर्सनलिटी थे। उनकी बाईपास सर्जरी के बारे में जब उनके पुत्र ने बताया तब भी एक पल के लिए मुझे विश्वास नहीं हुआ क्योंकि बरसों से मैं उन्हें एक जैसे स्लिम ट्रिम मैन्टेन बॉडी और युवकोचित उत्साह से भरा देखता रहा था।

अत्यन्त विनम्र स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी शांतिलालजी गिलड़ा का हंसता मुस्कुराता चेहरा अब उनके चहेतों को, मित्रों को देखने को नहीं मिलेगा, इसका गहरा अफसोस है। उनके परिवार को परमात्मा यह दुख सहने करने की शक्ति दे और दिवंगत आत्मा को चिरशांति प्रदान करे, यही प्रभु से प्रार्थना है।

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