बरसात
बरसात

मडिकेरी/दक्षिण भारत। कर्नाटक के कोडगु जिले में भारी बारिश के पूर्वानुमान के मद्देनजर उपायुक्त अनीस के जॉय ने एहतियात के तौर पर जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को दो दिनों में सुरक्षित स्थानों में चले जाने की अधिसूचना जारी की है। कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (केएनडीएमसी) के एक बयान के मुताबिक, गुरुवार से कोडगु जिले में लगातार बारिश होने की संभावना है। जिले के प्रशासनिक अधिकारी अगले तीन दिनों में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) द्वारा चिन्हित क्षेत्रों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों की ओर भेजने की व्यवस्था करेंगे।

कोडगु जिला सूचना और जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, जिले में अधिकारियों को अगले 2-3 दिनों के अंदर भूस्खलन के मामले में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) द्वारा पहचाने गए अतिसंवेदनशील और प्राकृतिक आपदा के जोखिम वाले क्षेत्रों में रह रहे निवासियों को स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।

जिले में नोडल अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया है कि स्थानीय निवासियों को राहत केंद्रों में स्थानांतरित करने के लिए आपातकालीन राहत और एहतियाती कदम उठाएं। योग्य लाभार्थियों को अगले तीन महीने तक वैकल्पिक स्थानों पर रहने के लिए किराए के पैसे दिए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष जिले में आई प्राकृतिक आपदा के बाद भारतीय भूतत्व सर्वेक्षण विभाग ने अंतरिम रिपोर्ट में कोडगु के छह ऐसे स्थानों की पहचान की है जहां भूमिगत दरारें दिखी हैं। इन स्थानों में निडुवितु, हेम्मेतलु, मक्कंदुरु और हेब्बतगेरी के तीन अन्य स्थान शामिल हैं।

इन गांवों और उनके आसपास के क्षेत्रों की पहचान भूस्खलन और प्राकृतिक आपदा के मामले में कमजोर क्षेत्रों के रूप में की गई है। इनमें मंगलादेवी नगर, चामुंडेश्वरी नगर और इंदिरानगर जैसे जोखिम भरे ढलान वाले क्षेत्र भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों के उन निवासियों की भी जिला प्रशासन ने पहचान की है जो अपने घर खाली करने के लिए मजबूर होंगे। स्थानांतरण की अधिसूचना में डिप्टी कमिशनर ने की पुष्टि की कि उन्हें अगले तीन महीने तक किराए के मकानों में रहने के लिए आवश्यक वित्तीय मदद मिलेगी।

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष मॉनसूनी बारिश की शुरुआत के पहले ही अगस्त 2018 के विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से सीख लेते हुए सावधानी बरती गई है। पिछले वर्ष की आपदा ने विशेष रूप से 32 गांवों में जीवन को प्रभावित किया और पे़डों, बिजली के खंभों और घरों को विध्वस्त कर दिया था। उस आपदा में जिले के प्रभावित इलाकों से 7 हजार लोगों को विस्थापित होना पड़ा था।

इस वर्ष वैसी आपदा की पुनरावृत्ति से बचने के लिए जिला प्रशासन ने दिन के चौबीसों घंटे और सप्ताह के सातों दिन चलने वाला हेल्पलाइन केंद्र स्थापित किया है। लोग किसी भी विध्वंसकारी हालत से बचने के लिए नि:शुल्क बचाव और राहत हेल्पलाइन नंबर १०७७ पर संपर्क कर मदद हासिल कर सकते हैं। वर्तमान में डिप्टी कमिशनर कार्यालय में एक अलग हेल्पलाइन केंद्र सक्रिय है। जिले के निवासी व्हाट्सएप के माध्यम से जिला प्रशासन के 8550001077 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। प्रशासन ने ऐसे स्थानों पर लाइफ जैकेट, रेनकोट और तिरपाल भी रखे हैं जहां राहत केंद्र खोले जाएंगे।

LEAVE A REPLY