चेन्नई। द्रवि़ड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कावेरी के मुद्दे पर चाहे जितने मामले दर्ज किए जाएं, उन सभी का सामना करने के लिए वे तैयार हैं। उन्होंने गुुरुवार को तमिलनाडु बंद के दौरान द्रमुक के नेताओं पर पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामलों के बारे में पूछे जाने पर यह बात कही। यहां अन्ना अरिवालयम में बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शामिल होने के बाद उन्होंने यह बात कही। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हम पूरे डेल्टा क्षेत्र में कावेरी पुनस्र्थापना रैली निकालेंगे इसलिए हमने इसे दो चरणों में निकालने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि इस रैली का पहला चरण तिरुचि के मुक्कोम्बु से शनिवार को शुरु होगा और रैली का दूसरा चरण आगामी सोमवार से शुरु होगा। उन्होंने कहा कि राज्य की सभी विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने इस रैली में शामिल होने पर अपनी सहमति दी है। द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने कहा कि शनिवार को निकाली जाने वाली रैली की अगुवाई द्रवि़डार कषगम के अध्यक्ष के वीरमणि करेंगे।स्टालिन ने कहा कि केन्द्र सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में उपयोग में लाए गए ‘योजना’’ शब्द पर स्पष्टिकरण की मांग करते हुए दायर की गई याचिका को वापस ले लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश का आशय स्पष्ट है और योजना शब्द का उपयोग कावेरी प्रबंधन बोर्ड के लिए किया गया है। ऐसे में केन्द्र सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय से इस शब्द के बारे में स्पष्टीकरण मांगना केन्द्र सरकार की एक चाल है जिससे यह तमिलनाडु को कावेरी नदी के पानी को प्राप्त करने के इसके अधिकार से वंचित रखना चाह रही है। स्टालिन ने कहा कि राज्य की सत्तारुढ अखिल भारतीय अन्ना द्रवि़ड मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के कारण ही अभी तक केन्द्र सरकार द्वारा कावेरी प्रबंधन बोर्ड का गठन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार द्वारा सही समय से केन्द्र सरकार पर सही ढंग से दबाव बनाया जाता तो केन्द्र सरकार को कावेरी प्रबंधन बोर्ड का गठन करने के लिए बाध्य किया जा सकता था क्योंकि संसद में अन्नाद्रमुक के सांसदों की संख्या अच्छी खासी है। उन्होंने कहा कि यदि अन्नाद्रमुक के सांसद इस मुद्दे पर इस्तीफा दे देते तो केन्द्र सरकार को कावेरी प्रबंधन बोर्ड का गठन करना प़डता।उन्होंने कहा कि राज्य की सभी विपक्षी पार्टियां कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन को लेकर एकजुट हैं और सभी विपक्षी पार्टियां अत्याचार रोधी कानून १९८९ का भी विरोध करेगी। दलित अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किए गए संशोधन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि केन्द्र की भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) सरकार दलितों के अधिकारों को धीरे-धीरे समाप्त करने की कोशिश कर रही है।

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