कहां गुम हैं नोट?

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भारत में मुद्रा से जु़डे अधिकार केंद्रीय बैंक यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास हैं। बाजार और अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए रिजर्व बैंक नोटों की छपाई का फैसला करता है। नए नोटों की छपाई के पीछे सबसे अहम भूमिका आम तौर पर मुद्रास्फीति निभाती है। मुद्रास्फीति ब़ढने के दौरान सेवाओं और उत्पादों का मूल्य ब़ढ जाता है। मुद्रा का मूल्य गिर जाता है। ऐसे में रिजर्व बैंक बाजार से नकदी सोखने की कोशिश करता है, नए नोटों की छपाई नहीं की जाती। साथ ही बैंकों के लिए रेपो रेट और कैश रिजर्व रेश्यो में इजाफा किया जाता है। रेपो रेट वह दर है जिसके तहत अल्प अवधि के लिए बैंक रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं्। अगर यह कर्ज महंगा हो जाए तो बैंक भी आम तौर पर कर्ज महंगा कर देते हैं और बाजार से ज्यादा नकदी बैंकों की तरफ लौटने लगती हैं्। भारत में इस वक्त देखी जा रही नोटों की कमी को मुद्रा संकट कहना गलत होगा। मौजूदा समस्या नोटों की आपूर्ति से जु़डी है। एटीएम मशीनों का ब़डा नेटवर्क अचानक जरूरत के मुताबिक सप्लाई नहीं दे पा रहा है। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक हाल के समय में अचानक कैश की मांग बहुत तेजी से ब़ढी है। यह असामान्य मांग है, जिसके कारण पता नहीं चले हैं्। वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा के मुताबिक नवंबर २०१६ की नोटबंदी के बाद देश ने मुद्रा संकट देखा। १,००० के नोटों पर बैन लगाने के बाद सरकार ने २,००० रुपये के नोट छापे। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक बाजार में फैले नोटों में २,००० रुपए के नोट की हिस्सेदारी ५०.२ फीसदी हो गई। इसके बाद जुलाई २०१७ में इन नोटों की छपाई बंद हो गई और यह नोट भी बाजार से गायब हो गए्। अब इस बात का जवाब मिलना चाहिए कि ये नोट आखिर हैं कहां? विकास दर और पुराने खराब हो चुके नोटों की संख्या के आधार पर नई मुद्रा बीच बीच में जारी होती रहती है। भारत में नोट चार टकसाल और चार बैंक नोट प्रेस में नोट छापे जाते हैं्। विदेश से आने वाले हाई सिक्योरिटी पेपर पर नोटों छापने के बाद रिजर्व बैंक अपने १८ इश्यू ऑफिसेज के मार्फत देश भर में नोट सप्लाई करता है। इन इश्यू ऑफिसेस के जरिए नई मुद्रा देश भर में फैले ४,२०० से ज्यादा करेंसी चेस्ट में पहुंचती है। ये करेंसी चेस्ट आम तौर पर शहर या जिले का कोई ब़डा बैंक होता हैं इसी करेंसी चेस्ट से मुद्रा सारे बैंकों की शाखाओं में पहुंचती है। कटे फटे और गल से चुके नोटों को कर्मशियल बैंक एक साथ जमा करते हैं और फिर करेंसी चेस्ट वापस भेजते हैं्। इस वक्त करेंसी चेस्ट में भी २,००० के नोट नहीं पहुंच पा रहे हैं और समस्या देश के कई इलाकों तक फैली हुई दिख रही है। इन सबके बीच गृह मंत्रालय के एक बयान से देश में अब भी नकद लेन-देन की लोकप्रियता बरकरार रहने का संकेत मिला है। सो, यह स्थिति कई सवालों को जन्म दे रही है।

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