उत्साह से मनाया केवलज्ञान कल्याणक उत्सव

गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली स्वामी महामस्तकाभिषेक महोत्सव

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दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कश्रवणबेलगोला। गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली स्वामी महामस्तकाभिषेक महोत्सव के तहत जारी पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में रविवार को भगवान का केवलज्ञान कल्याणक उत्साह से मनाया गया। आचार्यश्री वर्धमानसागरजी सहित ३४० पिच्छीधारी संतों के सान्निध्य व जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी के नेतृत्व में प्रातःकाल के सत्र मंे भगवान ॠषभदेव की आहारचर्या संपन्न हुई। आचार्यगणों द्वारा सूरिमंत्र संस्कार दिए गए। प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जैन, पंडित कुमुद सोनी, नंदकुमार जैन, डी.पार्श्वनाथ शास्त्री आदि ने मंत्रोच्चार किए। इस अवसर पर आचार्यश्री वर्द्धमानसागरजी ने कहा कि भगवान के समवशरण में शामिल होने वाला प्रत्येक जीव पुण्यशाली है। उन्होंने कहा कि संसार में कोई शरण नहीं है, केवल धर्म ही शरण है। केवलज्ञान से धर्मधारण की शिक्षा प्राप्त कर जन्म मरण से छुटकारा पाने का उपाय करने की सीख देते हुए उन्होंने कहा कि अपनी आत्मा का स्वरुप देखना है तो गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली में देखना चाहिए कि उन्होंने दीक्षाग्रहण करने एक वर्ष तक मौन धारण कर तपस्या की और भोजन नहीं किया था। साथ ही अपने पिता ॠषभदेवजी के पहले ही मोक्ष को प्राप्त कर लिया। आचार्यश्री विशुद्धसागरजी ने केवलज्ञान कल्याणक विषयक अपने उद्बोधन में कहा कि बिना क्रिया के भाव नहीं होते हैं, भाव बिना क्रिया नहीं होती। उन्होंने कहा कि श्रवणबेलगोला में आकर सभी के भावों में परिवर्तन आता है। आचार्यश्री ने यह भी कहा कि यहां निग्रंथ शिष्यों को लेने गुरु आ जाते हैं, निग्रंथों के प्रति भट्टारक स्वामीजी की भक्ति भी अद्भुत है। कार्यक्रम में आचार्यश्री विशुद्धसागरजी के भक्तों ने केवलज्ञान कल्याणक के अवसर पर निजानुभव तरगिणी के प्राकृत अनुवाद का ताम्रग्रंथ भेंट किया, इसका अनुवाद मुनिश्री आदित्यसागरजी ने किया। भट्टारक स्वामीजी ने आचार्यश्री स्तिक्यसागरजी मुनिश्री की कृति का विमोचन किया। द्नज्द्म फ्ैंक्द्भय् द्बष्ठ्र र्ङैंझ्ष्ठप्रय् ज्स्द्म द्मष्ठ द्धय्ैंथ्य् फ्द्बय्ैंइससे पूर्व शनिवार रात्रि को हुई भजन संध्या में इन्दौर के भजन गायक रुपेश जैन ने गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली पर आधारित भजन सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को झूमने पर मजबूर किया। कार्यक्रम मंे कन्ऩड भजनों की प्रस्तुतियां भी कलाकारों ने दी। इस मौके पर आकर्षक समवशरण की रचना मात्र एक ही रात्रि मंे करने वाले कलाकारों को श्री भट्टारक स्वामीजी ने व सौधर्म इन्द्र भागचंद चू़डीवाल ने सम्मानित किया। सौधर्म इन्द्र ने नृत्य की प्रस्तुति भी दी। महासभा के अध्यक्ष निर्मल सेठी, महोत्सव अध्यक्ष सरिता जैन, सुशीला पाटनी, सतीश जैन, सुरेश पाटिल, विनोद डोडण्णवर, जयकुमार जैन, श्रीपाल गंगवाल, विनोद बाकलीवाल, राकेश सेठी, विमुक्त जैन, पंचकल्याणक समिति के अध्यक्ष कमल निशि ठोलिया (चेन्नई), डॉ.श्रेयांश कुमार जैन, कुबेर इन्द्र परिवार आदि उपस्थित रहे। प्रचार समिति के राजेन्द्र जैन ने बताया कि महामस्तकाभिषेक के पूर्व आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में देशभर से श्रद्धालु प्रतिदिन यहां पहुंच रहे हैं। र्ींि र्ड्डैंद्यप्द्यर्‍ ·र्ैंह् ्यख्रख्ैंद्धद्यर्‍ ख्रर्‍ूय्य्ॅैं ब्ह्रख्र्‍श्री भट्टारक स्वामीजी ने बताया कि आने वाली १६ फरवरी को आचार्यश्री देवनंदीजी, आचार्यश्री विभवसागरजी, आचार्यश्री जिनसेनजी अपने-अपने शिष्यों को दीक्षाएं प्रदान करेंगे। साथ ही प्रतिदिन सुबह व दोपहर के सत्र में आचार्यश्री व मुनिश्री के प्रवचन तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम सुचारु रुप से जारी रहेंगे। प्रेषक : राजेन्द्र जैन ‘महावीर’’

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