अनंत कुमार हेगड़े
अनंत कुमार हेगड़े

कारवार/दक्षिण भारत। उत्तर कर्नाटक लोकसभा सीट पर इन दिनों फिर से हिंदुत्व की स्पष्ट हवा चल रही है। इसके साथ ही यह संभावना भी बनती जा रही है कि इस सीट पर मौजूदा भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री अनंतकुमार हेगड़े आसानी से लगातार छठी बार चुनावी जीत हासिल करने में सफल रहेंगे। जनता दल (एस) और कांग्रेस गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार आनंद असनोतिकर इस सीट पर अनंतकुमार हेगड़े के सामने चुनौती पेश कर रहे हैं।

किसी समय यह सीट कांग्रेस का अभेद्य किला मानी जाती थी लेकिन वर्ष 1997 में भटकल के भाजपा विधायक डॉ. चित्तरंजन की हत्या के बाद अनंतकुमार हेगड़े ने इसे भगवा पार्टी भाजपा का दुर्ग बना दिया है। वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में हेगड़े को इस सीट पर पूर्व केंद्रीय मारग्रेट अल्वा से मात खानी पड़ी थी। उसके बाद से अब तक हुए सभी लोकसभा चुनाव में हेगड़े ने ही यहां भाजपा का परचम लहराया है।

इस वर्ष के लोकसभा चुनाव में वह लगातार छठी बार संसदीय चुनाव जीतने के लिए जोर आजमा रहे हैं। इस इलाके में रहनेवाले लोगों की बात करें तो उन्हें रोजगार के लिए रोजाना पड़ोसी राज्य गोवा में जाकर मजदूरी की तलाश करनी पड़ती है, जबकि इस जिले में ढेरों मेगा प्रोजेक्ट्स क्रियान्वित की गई हैं। इसी जिले में कैगा परमाणु बिजली परियोजना स्थित है तो एशिया का सबसे बड़ा नौसैनिक अड्डा ‘सी बर्ड’ भी यहीं पर बसा है।

इस लोकसभा क्षेत्र के काली इलाके में एक मेगा हाइडेल पावर प्रोजेक्ट भी मौजूद है। उल्लेखनीय है कि उत्तर कन्नड़ लोकसभा सीट पर अब तक कुल 15 लोकसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें से 10 चुनावों में कांग्रेस को जीत मिली और पांच में भाजपा को सफलता मिली। मौजूदा लोकसभा चुनाव प्रक्रिया के तहत यहां 23 अप्रैल को होने वाले मतदान में भाजपा प्रत्याशी छठी बार जीत दर्ज करने की कोई कोशिश नहीं छोड़ रहे हैं।

हालांकि उत्तर कन्नड़ में कांग्रेस की जड़ें काफी मजबूत रही हैं लेकिन इस चुनाव में जनता दल (एस) के साथ हुए सीट बंटवारे के तहत यह सीट जनता दल (एस) के लिए छो़ड दी गई है। यहां कांग्रेस का अपना कोई प्रत्याशी खड़ा नहीं है। जनता दल (एस) ने यहां हेगड़े के सामने अपने पूर्व मंत्री आनंद आसनोतिकर पर दांव लगाया है, जिनके खिलाफ हथियार कानून का उल्लंघन करने का एक मामला विचाराधीन है।

जिले में सिरसी के निवासी और एक मतदाता चंद्रकांत हेगड़े की मानें तो कांग्रेस ने इस सीट पर अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारकर जंग शुरू होने से पहले ही अपनी हार कबूल कर ली है। हालांकि जिले के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और जिला प्रभारी मंत्री आरवी देशपांडे जनता दल (एस) प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए अपनी तरफ से हर संभव प्रयासों में जुटे हुए हैं लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं में वह जोश नजर नहीं आ रहा है जो किसी लोकसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए जरूरी होता है।

बताते चलें कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर आरवी देशपांडे के पुत्र प्रशांत देशपांडे पर दांव लगाया था लेकिन वह अनंतकुमार हेगड़े से मोदी की लहर में विशाल मतों के फासले से चुनाव हार गए थे। इस जिले के आठ लोकसभा क्षेत्रों में से छह पर भाजपा का कब्जा है और हमेशा से विवादित व्यक्ति रहे अनंतकुमार हेगड़े को इस बार के चुनाव में भी इस तथ्य का पूरा फायदा मिलता नजर आ रहा है। जिले के गोकर्ण इलाके में होटल का कारोबार करने वाले व्यवसायाी शशिकांत का कहना है कि हेगड़े को मतदाताओं की हिंदू भावनाओं को भड़काने में महारत हासिल है और इस बार भी उनके लिए चुनाव जीतना काफी आसान होगा।

इसकी एक वजह यह है कि जनता दल (एस) ने यहां बिना किसी जनाधार के अपना प्रत्याशी उतार दिया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को यह बात भी वाकई रास नहीं आ रही है। भटकल शहर में एक किराने की दुकान चलाने वाले मोहम्मद इस्माइल का भी कहना है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के चाल-चलन से ही ऐसा महसूस हो रहा है कि वह चुनाव शुरू होने से पहले ही चुनाव हार चुके हैं।

गौरतलब है कि इस इलाके में पर्यावरण और वन संरक्षण से संबंधित मुदों की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए कन्नड़ साहित्यकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजे गए लेखक डॉ. शिवराम कारंत ने भी वर्ष 1989 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा था। यहां तक कि वर्ष 1977 में पूर्व मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े भी कांग्रेस के इस तत्कालीन गढ़ में सेंघ लगाने में असफल साबित हुए थे।

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