nageswara rao cbi
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नई दिल्ली। सीबीआई के दो शीर्ष अफसरों का विवाद जब देश की सर्वोच्च अदालत पहुंचा तो इस मामले में कई मोड़ आ गए। खासतौर से न्यायालय ने सीबीआई के अंतरिम निदेशक बनाए गए एम. नागेश्वर राव की भूमिका को लेकर बड़ा आदेश दिया है, जिसके तहत अब वे एजेंसी में सिर्फ रूटीन के कामकाज ही कर पाएंगे। इस पद से जुड़े नीतिगत फैसले लेना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं होगा।

इसके अलावा राव ने अब तक जो फैसले लिए हैं, उन सबको एक बंद लिफाफे में उच्चतम न्यायालय को प्रस्तुत करना होगा। इस तरह शुक्रवार को सीबीआई मामले की सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने नागेश्वर राव की भूमिका सीमित कर दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी।

आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना का विवाद सुर्खियों में आने के बाद सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया था। उसके पश्चात नागेश्वर राव ने अंतरिम निदेशक के तौर पर पदभार संभाला। सरकार द्वारा 23 अक्टूबर को जारी एक आदेश के बाद राव देर रात अंतरिम निदेशक बनाए गए थे। पदभार संभालते ही राव ने कई बड़े फैसले लिए। उन्होंने सीबीआई के 13 अफसरों को हटा दिया। इनमें से कुछ अफसरों को उनके स्थान से हटाकर दूर तबादला किया गया। कुछ अफसरों से पुरानी जिम्मेदारी लेकर नई सौंपी गई।

हालांकि गुरुवार को ही सीबीआई की ओर से बयान जारी किया गया कि वर्मा और अस्थाना को सिर्फ अवकाश पर भेजा गया। जब तक मामले की जांच नहीं हो जाती, वे अवकाश पर रहेंगे। अब उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद नागेश्वर राव ​द्वारा लिए गए इन सभी फैसलों को लिफाफे में बंद कर सौंपना होगा। राव सीबीआई में बतौर संयुक्त निदेशक कार्यरत थे। वे 1986 बैच के ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उनका ताल्लुक तेलंगाना के वारंगल से है।

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