raveesh kumar mea
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नई दिल्ली/दक्षिण भारत। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बयान के बाद भारत की ओर से इस पर प्रतिक्रिया दी गई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के बयान पर कोई आश्चर्य नहीं है। इमरान ने तो हमले की निंदा तक करना उचित नहीं समझा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने हमारे जवानों पर हमले को आतंकी घटना मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने न तो कायरतापूर्ण हमले की निंदा की और न ही शहीदों के परिजनों के प्रति कोई संवेदना जताई।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने जैश और आतंकियों के दावों को नजरअंदाज किया। यह सभी जानते हैं कि जैश सरगना मसूद अजहर पाकिस्तान में है। इमरान द्वारा आतंकी हमले के सबूत मांगे जाने पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री द्वारा जांच की पेश एक घिसापिटा बहाना है। भारत ने मुंबई हमले के सबूत भी दिए थे, लेकिन उस पर कोई प्रगति नहीं हुई।

बयान में पठानकोट हमले के सबूतों का भी उल्लेख किया गया, जिन पर पाक ने कुछ नहीं किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि गारंटी से कार्रवाई की बात पाकिस्तान के पुराने रिकॉर्ड के मुताबिक ठीक नहीं बैठती। मंत्रालय ने इमरान के ‘नए पाकिस्तान’ के बयान पर कहा कि वहां के मंत्री खुलेआम हाफिज सईद जैसे आतंकवादियों के साथ मंच साझा करते हैं।

विदेश मंत्रालय ने इमरान के इस बयान पर सवालिया निशान लगाया, जिसमें उन्होंने कहा था ​कि पाक सर्वाधिक आतंकवाद से पीड़ित है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस बात को जानता है कि पाकिस्तान असल में आतंकवाद का केंद्र है। बयान में कहा गया कि पाक विश्व समुदाय को भ्रमित करना बंद करे और पुलवामा हमले के जिम्मेदार आतंकियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे। मंत्रालय ने पुलवामा आतंकी हमले और चुनावों से पहले उसे भुनाने के आरोपों को खारिज किया और कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए एक उदाहरण है। पाक इस बात को कभी नहीं समझेगा।

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