प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में संबोधित करते हुए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में संबोधित करते हुए.

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिले बहुमत को जनता द्वारा सरकार की ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ नीति का अनुमोदन करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि देश की जनता ने उनकी पहली सरकार को तमाम कसौटियों पर कसने और पूरी तरह जांचने-परखने के बाद समर्थन दिया।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए मोदी ने कहा, देश ने 2019 का जनादेश पूरी तरह कसौटी पर कसने, हर तराजू पर तोलने के बाद और पूरी जांच-परख के बाद दिया, जनता ने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति का अनुमोदन किया। उन्होंने कहा कि संतोष के साथ कह सकता हूं कि कठिनाइयों के बावजूद हम सही दिशा में आगे बढ़े।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के एक कथन का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए प्रधानमंत्री कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, हम किसी की लकीर छोटी करने में विश्वास नहीं करते और हम अपनी लकीर खींचने में अपनी जिंदगी खपा देते हैं। आपकी ऊंचाई आपको मुबारक हो। आप इतने ऊपर चले गए हैं कि आपको जमीन पर कुछ नहीं दिख रहा है।

बदले की भावना से नहीं करेंगे काम
मोदी ने कहा कि हमें इसलिए कोसा जा रहा है कि हमने फलाने को जेल में क्यों नहीं डाला। ये इमरजेंसी नहीं है कि किसी को भी जेल में डाल दिया जाए, ये लोकतंत्र है। ये काम न्यायपालिका है। हम कानून से चलने वाले लोग हैं और किसी को जमानत मिलती है तो वो इंजॉय करे। हम बदले की भावना से काम नहीं करेंगे।

मोदी ने कहा कि राष्ट्रपतिजी का अभिभाषण देश के नागरिकों ने जिस आशा-आकांक्षाओं के साथ हमें इस सदन में भेजा है, उसकी एक तरह से प्रतिध्वनि है। मैं इस चर्चा को सार्थक बनाने के लिए इसमें भाग लेने वाले सभी सांसदों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने कहा कि कई दशकों के बाद देश ने एक मजबूत जनादेश दिया है। एक सरकार को फिर से लाए हैं और पहले से ज्यादा शक्ति देकर लाए हैं।

मोदी ने कहा कि आज के सामान्य वातावरण में भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में सबके लिए गौरव करने की बात है कि हमारा मतदाता कितना जागरूक है। अपने से ज्यादा वो अपने देश से कैसे प्यार करता है, ये इस चुनाव में देखने को मिला है। इस बात के लिए देश का मतदाता अभिनंदन का पात्र है।

पल-पल को जनता ने जांचा और परखा
मोदी ने कहा कि 2019 का जनादेश पूरी तरह कसौटी पर कसने के बाद हर तराजू पर तोलने के बाद पल—पल को जनता ने जांचा और परखा है और उसके आधार पर समझा है और तब जाकर फिर से हमें चुना है। उन्होंने कहा कि यह कोई जीत या हार का प्रश्न नहीं है। ये जीवन की उस आस्था का विषय है, जहां कमिटमेंट क्या होता, डेडिकेशन क्या है, जनता के लिए जीना-जूझना-खपना क्या होता है। और जब पांच साल की अविरत तपस्या का संतोष मिलता है तो वो एक अध्यात्म की अनुभूति करता है।

मोदी ने कहा कि चर्चा के प्रारम्भ में पहली बार सदन में आए प्रताप सारंगीजी और आदिवासी समाज से आई हमारी बहन हिना गावितजी ने जिस प्रकार से विषय को प्रस्तुत किया और जिस बारीकी से बातों को रखा, तो मैं समझता हूं कि मैं कुछ भी न बोलूं तो भी चलेगा। मैं संतोष के साथ कह सकता हूं कि 70 साल से चली आ रही बीमारियों को दूर करने के लिए हमने सही दिशा पकड़ी और काफी कठिनाइयों के बाद भी उसी दिशा में चलते रहे। हम उस मकसद पर चलते रहे और ये देश दूध का दूध पानी का पानी कर सकता है, ये सबने देखा।

सामान्य मानव को मिले हक
मोदी ने कहा कि हमने देश आजाद होने के बाद जाने-अनजाने में एक ऐसा कल्चर स्वीकार कर लिया था, जिसमें देश के सामान्य मानव को हक के लिए जूझना पड़ता है। क्या सामान्य मानव के हक की चीजें सहज रूप से उसे मिलनी चाहिए या नहीं? हमने मान लिया था कि ये तो ऐसे ही चलता है। ..यहां कहा गया कि हमारी ऊंचाई को कोई कम नहीं कर सकता, ऐसी गलती हम नहीं करते। हम दूसरे की लकीर छोटी करने में विश्वास नहीं करते, हम अपनी लकीर लंबी करने के लिए जिंदगी खपा देते हैं।

मोदी ने कहा कि आपकी ऊंचाई आपको मुबारक हो। आप इतने ऊंचे चले गए हैं कि जमीन दिखना बंद हो गया है। आप इतने ऊंचे चले गए हैं कि आप जड़ों से उखड़ गए हैं। आप इतने ऊंचे चले गए हैं कि आपको जमीन के लोग तुच्छ लगने लगे हैं। आपका और भी ऊंचा होना मेरे लिए संतोष और आनंद की बात है।

मोदी ने कहा कि मैं चुनौती देता हूं कि 2004 से 2014 तक शासन में बैठे हुए लोगों ने कभी अटलजी की सरकार की तारीफ की हो। उनकी छोड़ो, नरसिम्हा रावजी की सरकार की तारीफ की हो। इस सदन में बैठे हुए इन लोगों ने तो एक बार भी मनमोहन सिंहजी की सरकार का जिक्र तक नहीं किया, अगर किया हो तो बताएं।

लोकतंत्र सदियों से हमारी आत्मा
मोदी ने कहा कि आज 25 जून है, वो रात जब देश की आत्मा को कुचल दिया गया था। भारत में लोकतंत्र संविधान के पन्नों से पैदा नहीं हुआ है, भारत में लोकतंत्र सदियों से हमारी आत्मा है।
किसी की सत्ता चली न जाए, सिर्फ इसके लिए उस आत्मा को कुचल दिया था। उन्होंने कहा कि आज हमें लोकतंत्र के लिए प्रति हमारे समर्पण, संकल्प को और ताकत के साथ समर्पित करना होगा। जो भी इस पाप के भागीदार थे, ये दाग कभी मिटने वाला नहीं है। इस दाग को बार-बार इसलिए स्मरण करने की जरूरत है ताकि फिर कोई ऐसा पाप न कर सके।

मोदी ने कहा कि मुझे कभी लगता है कि अगर 125 करोड़ देशवासियों के सपनों को अगर मुझे जीना है, तो मुझे छोटा सोचने का हक़ भी नहीं है, और इसलिए जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का, तो देखना फिजूल है कद आसमान का। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में पानी के संबंध में जितने भी इनीशिएटिव लिए गए थे, वो सारे काम बाबा साहब अंबेडकर ने किए थे, लेकिन जैसा मैंने पहले कहा, शायद एक ऊंचाई पर जाने के बाद लोगों को दिखता नहीं है।

मोदी ने कहा कि सरदार सरोवर बांध सरदार पटेल का सपना था लेकिन इस डैम पर काम में देरी होती रही। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मुझे इस परियोजना के लिए उपवास तक करना पड़ा था। राजग के सत्ता में आने के बाद इसके काम की गति में वृद्धि हुई और आज इससे लोगों को लाभ हो रहा है। पानी की तकलीफ राजस्थान और गुजरात के लोग ज्यादा जानते हैं और इसी वजह से हमने जल शक्ति मंत्रालय बनाया है। जल संचय पर हमें बल देना पड़ेगा नहीं तो जल संकट बढ़ता चला जाएगा।

‘मेक इन इंडिया’ को आगे बढ़ाना जिम्मेदारी
मोदी ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ का मजाक उड़ाकर कुछ लोगों को भले ही रात को अच्छी नींद आ जाए लेकिन इससे देश का भला तो नहीं हो पाएगा। ‘मेक इन इंडिया’ को आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है। हमारा सपना नया भारत बनाना है जिसके लिए मेक इन इंडिया जरूरी है। उन्होंने कहा कि ईज ऑफ लिविंग यानी सामान्य मानवी की जिंदगी में सुगमता, हरेक के लिए समान अवसर को लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं।

मोदी ने कहा कि हमारे देश में पर्यटन की बहुत संभावनाएं हैं लेकिन हमने ही अपने देश के विषय में एक हीन भावना पैदा कर दी थी और उसी कारण विश्व के लोगों को हिंदुस्तान की तरफ आकर्षित करने में हम कम पड़ गए। स्वच्छता अभियान ने अब पर्यटन को बल दिया है, जिससे भारत में रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी।

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