आईटी कर्मचारी बनाएंगे यूनियन

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बेंगलूरु। आईटी कंपनियों में ब़डे पैमाने पर संभावित छंटनी की खबरों के बीच आईटी कर्मचारियों का एक मंच देश में तकनीकी विशेषज्ञों के पहली यूनियन के तौर पर अपने आप को पंजीकृत कराने जा रहा है। फोरम के उपाध्यक्ष वासुमति ने कहा कि फोरम फोर इनफोर्मेशन टेक्नोलोजी एम्प्लाइज (एफआईटीई) भारत में आईटी कर्मचारियों की पहली यूनियन के तौर पर औपचारिक रूप से अपना पंजीकरण कराएगा। उन्होंने कहा कि हम अगले कुछ महीनों में ऐसा होने की उम्मीद कर रहे हैं। यह कदम देश में ब़डी आईटी कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को अवैध रूप से निकालने के बाद उठाया गया है। एफआईटीई वर्ष-२००८ में भी सुखिर्यों में आया था जब उसने श्रीलंका में तमिलों की दशा पर ध्यान आकृष्ट करने के लिए प्रदर्शन किया था। इसमें १००० ऑनलाइन सदस्य और १०० सक्रिय सदस्य हैं। एफआईटीई ने बंेलगूरु के अतिरिक्त चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, मुम्बई, कोच्चि और दिल्ली समेत नौ शहरों में अपनी शाखाएं खोली हैं। इस संगठन ने आईटी कर्मचारियों के लिए कई ल़डाइयां ल़डी हैं जिन्हें अतीत में विभिन्न कंपनियों ने मनमाने तरीके से बर्खास्त कर दिया। हालांकि एफआईटीई का कहना है कि उनके सदस्य आईटी कर्मचारियों के हित के लिए आवाज उठाते हैं जो कंपनियों को नागवार गुजरता है। दरअसल हाल के दिनों में ऐसी चर्चा जोरों पर है कि विप्रो, इंफोसिस जैसी प्रमुख आईटी कंपनियां अपने सैंक़डों कर्मचारियों को निकालने की तैयारी में है। कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियंक खरगे भी कह चुके हैं कि आईटी कर्मचारी अगर अपने अधिकारों की ल़डाई के लिए किसी यूनियन का गठन करते हैं तो यह श्रमिक हितों के अंतर्गत आ सकता है और इस पर किसी को एतराज नहीं होना चाहिए। हालांकि आईटी कंपनियों का कहना है कि कर्मचारियों की छंटनी प्रक्रिया कोई नई नहीं है बल्कि हर वर्ष कर्मचारियों के कार्य विश्लेषण का अध्ययन करने के बाद ऐसा किया जाता रहा है।

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