अविश्वास प्रस्ताव में शिवसेना नहीं होगी वोटिंग में शामिल

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Uddhav Thackeray
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यह अविश्वास प्रस्ताव सरकार के साथ ही विपक्ष के लिए भी अग्निपरीक्षा है, क्योंकि इसका परिणाम जाहिर करेगा कि किसमें कितना जोर बरकरार है। शिवसेना राजग को छोड़ना नहीं चाहती, पर अपनी नाराजगी भी दिखाना चाहती है।

मुंबई। अविश्वास प्रस्ताव से पहले केंद्र की मोदी सरकार को उसके सहयोगी दल शिवसेना ने झटका दिया है। शिवसेना ने फैसला किया है कि वह सरकार का समर्थन नहीं करेगी और वोटिंग का बहिष्कार करेगी। पार्टी नेता संजय राउत ने कहा है कि शिवसेना के सांसद वोटिंग के दौरान उपस्थित नहीं होंगे। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में लिखा है कि वह जनता के साथ जाना पसंद करेगी और सरकार का समर्थन नहीं करेगी। पार्टी ने आरोप लगाया है कि इस वक्त देश में तानाशाही चल रही है।

गौरतलब है कि लोकसभा की 543 सीटों में से 11 रिक्त हैं। इस तरह वर्तमान में 532 सीटें हैं। सरकार को बहुमत के लिए 267 का आंकड़ा हासिल करना होगा। यहां सरकार के सिंहासन को कोई खतरा नहीं है, क्योंकि उसके 272 सांसद और कुल 295 सांसद हैं। अगर शिवसेना सहयोग करती तो यह आंकड़ा इससे ज्यादा होता।

अगर विपक्ष की बात करें तो वहां 147 सांसद हैं। चूंकि शिवसेना ने कहा है कि उसके 18 सांसद मौजूद नहीं होंगे तो यहां विपक्ष को उसका सहयोग न मिलने से निराशा ही हाथ लगेगी। इसके अलावा कुछ सांसदों के रुख पर अनिश्चय बरकरार है।

जानकारी के अनुसार, शिवसेना ने भाजपा नेतृत्व से बात कर सूचना दी थी कि वह सरकार के पक्ष में वोट करेगी। अब उसका यह रुख चौंकाने वाला है। पार्टी ने कहा है कि मोदी सरकार ने 2014 में किए गए अपने वायदे नहीं निभाए। इस वजह से लोगों के अंदर सरकार के खिलाफ अविश्वास है।

वास्तव में यह अविश्वास प्रस्ताव सरकार के साथ ही विपक्ष के लिए भी अग्निपरीक्षा है, क्योंकि इसका परिणाम जाहिर करेगा कि किसमें कितना जोर बरकरार है। शिवसेना राजग को छोड़ना नहीं चाहती, पर अपनी नाराजगी भी दिखाना चाहती है। इसलिए उसने वोटिंग से इनकार कर दिया।

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