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घनघोर बारिश का कहर, मरनेवालों की संख्या 90 के पार
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बेंगलूर। उत्तरी कर्नाटक में घनघोर बारिश का कहर जारी है। पिछले चार दिनों से जारी बारिश में अब तक 90 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री बीएस येड्डीयुरप्पा ने शुक्रवार को एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें वायुसेना, थलसेना के अधिकारी और राज्य के मंत्री उपस्थित थे। बीजापुर जिला बारिश से सर्वाधिक प्रभावित हुआ है। बीजापुर, रायचूर, गुलबर्गा, कोप्पल, बागलकोट, बल्लारी, बेलगाम और गदग में बारिश की वजह से सामान्य जनजीवन ठप हो गया है। अधिकारियों ने बताया कि बारिश के कारण 26,000 से अधिक मकान नष्ट हो गए हैं, कई इलाके जलमग्न हो गए हैं और सड़क सेवाएं भी बाधित हुई हैं। बचाव कार्य में हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है।
इस बारिश से कृष्णा, तुंगभद्रा तथा इनकी सभी सहायक नदियों में पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर बहते हुए कई गांवों तथा कस्बों को जलमग्न कर चुका है। एक सौ गांव तो इन नदियों के पानी में पूरी तरह से डूब चुके हैं। हजारों एकड़ कृषि भूमि में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा है। राहत तथा बचाव कार्य भी इसके साथ ही युद्ध स्तर पर जारी है। सभी जिलों की पुलिस, अग्नि शमन दस्तों के कर्मचारी, मद्रास इंजीनियरिंग ग्रुप (एमईजी) के अधिकारी तथा जवान राहत के काम में जुटे हुए हैं। जल्दी ही राष्ट्रीय आपदा केन्द्र के अधिकारी तथा विशेषज्ञ भी राहत कार्यों की देख-रेख करने के लिए यहां पहुंच जाएंगे।
शुक्रवार को बाढ़ प्रभावित जिलों के ग्रामीणों को राहत तथा बचाव दलों के कर्मचारियों ने भोजन के पैकेट बांटेऔर पानी के पाऊच उपलब्ध करवाए ताकि ग्रामीण गंदा पानी पीकर बीमार न पड़ें। कई स्थानों पर अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं तथा इन शिविरों में बड़ी संख्या में ग्रामीणों को ठहराया गया है। इस बेमौसम बाढ़ का कहर सबसे अधिक बीजापुर को झेलना पड़ा है। जब बारिश आनी थी तब तो वहां सूखे के हालात बने हुए थे। वहां अब तक 24 लोगों के मारे जाने की खबर मिली है। कोप्पल में 15, गुलबर्गा में 13, रायचूर में 12, बागलकोट में 10, बल्लारी में 7, गदग में 4, चिक्कबल्लापुर में 2 तथा चित्रदुर्गा एवं दावणगेरे जिलों में एक-एक व्यक्ति के मारे जाने की खबर है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इन जिलों से होकर गुजरनेवाले कई महत्वपूर्ण राजमार्ग भी बाढ़ के कारण नष्ट हो गए हैं। खास तौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 17 पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप्प हो चुकी है। यह सड़क पूरी तरह से पानी में समा चुकी है। इसी तरह, कारवार से मेंगलूर रायचूर से हैदराबाद, बीजापुर से गुलबर्गा तथा रायचूर से चेन्नई को जोड़ने वाले राजमार्ग भी बंद हैं।
हालांकि मुख्यमंत्री बीएस येड्डीयुरप्पा ने मैसूर के सुत्तुर मठ में चली तीन दिनों की समीक्षा बैठक समाप्त होने के बाद शुक्रवार को ही प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण करने की मंशा जताई थी लेकिन आज पूरे इलाके में मौसम अत्यधिक खराब होने के कारण उन्हें हवाई सर्वेक्षण की योजना रद्द करनी पड़ी। अब वे 4 अक्टूबर को विभिन्न जिलों का हवाई जायजा लेंगे। उन्होंने बाढ़ प्रभावित जिलों के लोगों के साथ ही पूरे राज्य को आश्वासन दिया है कि बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए उनकी सरकार कोई भी कदम उठाने से नहीं चूकेगी।
उधर, बल्लारी जिले में स्थित विश्व धरोहर शहर हम्पी में भी बाढ़ का पानी घुस आने की खबर मिली है। जिला प्रशासन के सूत्रों ने बताया कि तुुंगभद्रा बांध से तुंगभद्रा नदी में दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ने से हम्पी के डूबने की स्थिति बन गई है। गुलबर्गा तथा रायचूर में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। दोनों जिलों के सैकड़ों गांव पानी में डूब चुके हैं। कृष्णा तथा भीमा नदियों से पानी उफनकर निकटवर्ती गांवों में घुस चुका है जिससे 400 लोग अपने घरों में ही फंसे हुए हैं। सुरपुर तालुक में पानी पांच फीट ऊंचा उठा हुआ है। दोनों जिलों के दस गांवों की स्थिति तो इतनी बुरी है कि राहत तथा बचाव कर्मचारियों के लिए भी उन गांवों तक पहुंचना संभव नहीं हो सका है।
गुलबर्गा के जिला प्रभारी मंत्री लक्ष्मण सावदी ने आज बाढ़ की चपेट में आए गांवों की हालत का जायजा लेने के बाद बताया कि सभी ग्रामीणों से अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर चले जाने को कहा गया है तथा उनकी सुविधा के लिए एक हाई स्कूल में भोजन-वस्त्र इत्यादि का बंदोबस्त किया गया है।
उधर, प्रसिद्ध तीर्थस्थल मंत्रालय के मंदिरों में भी बाढ़ का पानी घुस आने की जानकारी मिली है। रायचूर जिले में तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित मंत्रालय में बाढ़ के पानी की ऊंचाई आठ फीट तक पहुंच गई है। लगभग 100 श्रद्धालुओं को जान बचाने के लिए मंदिर की छत पर चढ़ना पड़ा है। बताया जाता है कि यह श्रद्धालु गुरुवार की रात से ही छत पर रहने को बाध्य हुए हैं। मंत्रालय पीठ द्वारा संचालित संस्कृत विद्यालय के 150 विद्यार्थियों को अपने छात्रावासों की छतों पर जाकर अपनी जान बचानी पड़ी। बताया जाता है कि छात्रावास में 10 फीट की ऊंचाई तक बाढ़ का पानी घुस आया है।
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