प्रेमचंद का स्मारक नहीं बना
हिन्दी के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद के निधन के 73 वर्ष बाद भी उनके पैतृक गांव लमही में उनके नाम पर स्मारक एवं संग्रहालय नहीं बन सका। आज से 50 साल पहले.. आगे..
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रंगों में उमड़ती भावनाएं
वे सभी युवा हैं लेकिन उनकी सोच, समझ और अभिव्यक्ति उनकी उम्र से कहीं अधिक है, जिसे वे रंग और कूची से व्यक्त कर रहे हैं। उनकी कृतियों में जीवन का मर्म है तो प्रकृति का दर्शन भी.. आगे..
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रंगों में उमड़ती भावनाएं
वे सभी युवा हैं लेकिन उनकी सोच, समझ और अभिव्यक्ति उनकी उम्र से कहीं अधिक है, जिसे वे रंग और कूची से व्यक्त कर रहे हैं। उनकी कृतियों में जीवन का मर्म है तो प्रकृति का दर्शन भी.. आगे..
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कानूनी जागरूकता के अभाव में निर्दोष भी जेल जा सकता है : पाराशर
हिन्दी पुस्तक "इंसाफ की तलाश में...' का विमोचन किया श्रीकांत पाराशर ने. स्वामी प्रसन्ना वेंकटाचारी चतुर्वेदीजी ने विषय पर सारगर्भित भाषण दिया. बेंगलूर तमिल संघ के अध्यक्ष मीनाक्षी सुन्दरम ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की..
तमिल तथा कन्नड़ संस्करणों का भी विमोचन हुआ।
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महात्मा गांधी ने तुड़वा दिए थे पूजा के लिए बनवाए मंदिर
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व्यक्ति पूजा के सख्त खिलाफ थे और बेहद सजग रहते थे कि कहीं लोग उन्हें भी भगवान की तरह नहीं पूजने लगें। उनके जीवनकाल में उनकी पूजा के लिए दो स्थानों पर मंदिर बनाए गए थे लेकिन उन्होंने कड़ा विरोध कर उन्हें तुड़वा दिया था.. आगे..
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बाजार की ताकतें उन्हें बेचने में लगी हैं
प्रसिध्द गाांधीवादी एवं गांधी शांति प्रतिष्ठान के सचिव सुरेन्द्र कुमार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर 14 लाख रुपए की कलम बनाने की घटना को बाजार की ताकतों की साजिश बताया है.. आगे..
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जल-मल रिसाव से सोनार किले को खतरा
चित्रकूट पहाड़ी पर बने विश्वविख्यात सोनार किले को होने वाले खतरे के उच्चस्तरीय अध्ययन के साथ ही जल मल निकासी की व्यवस्था के लिए दस करोड़ रुपए का वित्तीय प्रावधान किया गया है.. आगे..
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जल-मल रिसाव से सोनार किले को खतरा
चित्रकूट पहाड़ी पर बने विश्वविख्यात सोनार किले को होने वाले खतरे के उच्चस्तरीय अध्ययन के साथ ही जल मल निकासी की व्यवस्था के लिए दस करोड़ रुपए का वित्तीय प्रावधान किया गया है.. आगे..
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