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पाक में आटे को लेकर भगदड़
कराची। कराची में सोमवार को मुफ्त राशन वितरण के दौरान मची भगदड़ में कम-से-कम 20 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। मृतकों में अधिकतर महिलाएं और बच्चे हैं। रमजान के पवित्र महीने के मौके पर एक व्यापारी मुफ्त राशन वितरण कर रहा था। इसे पाने के लिए सैकड़ों महिलाएं जमा थीं। पुलिस और नागरिक प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि व्यवस्थित रूप में राशन वितरण का बंदोबस्त नहीं किया गया था, जिस वजह से यह घटना हुई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अब्दुल्ला शेख ने संवाददाताओं को बताया कि इस भगदड़ में 20 लोगों की मौत हो गई। यह घटना कराची के पुराने क्षेत्र में खोरी गार्डन के तंग इलाके में हुई। उन्होंने बताया कि राशन वितरण का कार्यक्रम आयोजित करने वाले व्यापारी चौधरी इफ्तिखार मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया गया है।  आगे..
मदद पर नजर रखे अमेरिका
नई दिल्ली। विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने अमेरिका से अनुरोध किया है कि वह पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद पर नजर रखे। थरूर का यह बयान पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी मदद का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया गया था। थरूर ने सोमवार को यहां कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान को मिल रही अन्य देशों की मदद का समर्थन करता है लेकिन इसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ करना सही नहीं है। थरूर ने कहा कि अमेरिका को पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद पर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुशर्रफ का बयान भारत के लिए अप्रत्याशित नहीं है। थरूर ने कहा कि मुशर्रफ के बयान से भारत के इस रुख की पुष्टि होती है कि पाकिस्तान अमेरिकी मदद का दुरूपयोग करता है। मुशर्रफ ने यह भी कबूल किया है कि उन्होंने सैन्य मदद के संबंध में बने नियमों का उल्लंघन किया लेकिन साथ ही कहा कि उन्होंने वही किया जो पाकिस्तान के हित में था। हालांकि पाकिस्तान की मौजूदा सरकार अमेरिकी मदद के दुरूपयोग से इनकार कर रही है।  आगे..
अमेरिकी जनता के नाम संबोधन
वाशिंगटन। अपनी मौत की चर्चाओं के बीच दुनिया का सबसे कुख्यात आतंकी और अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन एक बार फिर प्रकट हुआ है। लादेन का नया वीडियो टेप सामने आया है, जिसमें उसकी तस्वीर इस्तेमाल की गई है। अल कायदा की मीडिया इकाई की ओर से जारी इस टेप को 'अमेरिकी जनता के नाम संबोधन' करार दिया गया है। अल कायदा की मीडिया इकाई का दावा है कि इसमें सुनाई देने वाली आवाज लादेन की है। लादेन ने टेप में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की नीतियों को जमकर कोसा है। लादेन ने ओबामा को शक्तिहीन बताते हुए कहा है कि वह अफगान युध्द को रोक पाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए। अमेरिका की साइट इंटेलीजेंस ग्रुप ने लादेन की इस टेप का अनुवाद जारी किया है। लादेन ने पहली बार 9/11 हमलों के पीछे तर्क भी दिए हैं। अल कायदा के संस्थापक ने कहा है, 'वह हमला इजरायल समर्थक देशों की कारपोरेट नीतियों के खिलाफ किया गया था। फलस्तीन में हमारी जमीन पर इजरायल के कब्जे का समर्थन करने की वजह से किया गया था।' टेप 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकी हमले की आठवीं बरसी के दो दिन बात जारी किया गया। इसमें लादेन की एक स्थिर तस्वीर तथा उसकी आवाज में आडियो है। अमेरिका के आतंकी निगरानी समूह इंटेल सेंटर ने बताया कि यह टेप अल कायदा की मीडिया इकाई अस साहब द्वारा जारी किया गया है। लादेन ने ओबामा को एक शक्तिहीन इंसान बताते हुए कहा है कि वह अपने पूर्ववर्ती जार्ज बुश की नीतियों को ही आगे बढ़ा रहे हैं। लादेन ने कहा है कि ओबामा अफगानिस्तान में युध्द को खत्म नहीं कर पाएंगे। इंटेल सेंटर के अनुसार यह वैसा ही बयान है जो अल कायदा हर साल सितंबर या अक्टूबर में जारी करता रहता है। इससे पहले लादेन का अंतिम आडियो टेप तीन जून को जारी किया गया था।  आगे..
पादरियों पर यौन शोषण के आरोप
वेटिकन सिटी। ईसाइयों की सर्वोच्च संस्था वेटिक न के कुछ पादरियों और उनके कुछ सहयोगियों पर यहां पढ़ने वाले कुछ पूर्व मूक बधिर छात्रों ने यौन अपराधों में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। हालांकि पादरियों ने इन आरोपों की वजह एक जमीन विवाद बताई है। वेरोना एंटोनियो प्रोवोलो इंस्टीटयूट के 67 पूर्व बधिर छात्रों ने सालों बाद अपनी चुप्पी तोड़ते हुए यहां एक बयान जारी किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि 1950 से 1980 के दौरान यहां अध्ययन के दौरान कुछ पादरियों और उनके सहयोगियों ने सजा के तौर पर उनके साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया और अन्य प्रताड़नाएं दी। इनमें से 14 छात्रों ने अपने साथ हुए यौन दुराचार की कहानी पूरे विस्तार के साथ बयान की है। इन लोगाें ने कहा है कि वेरोना स्कूल के दो परिसरों में कई सालों तक उनके साथ यौन दुराचार को अंजाम दिया गया। इतना ही नहीं इन लोगों ने 24 पादरियों और उनके सहयोगियों के नाम भी बताए हैं। यहां पढ़ चुके एक छात्र और अब उम्र के साठवें दशक पर आ चुके वतिंनी ने इतने सालों बाद यह खुलासा करने को स्पष्ट करते हुए कहा है, 'वह अपने पिता को कैसे बता सकते थे कि एक पादरी उनके साथ यौनाचार कर रहा है।' आगे..
लादेन की मौत बनी पहेली
वाशिंगटन। दुनिया के सबसे कुख्यात आतंकी सरगना ओसामा बिन लादेन की मौत एक पहेली बनकर रह गई है। उतनी ही उलझी हुई जितनी कि उसकी जिंदगी। पिछले कुछ सालों से अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह जिंदा है या मर चुका है। किसी गंभीर बीमारी से या फिर अमेरिकी विमानों के हमले में। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी तो उसकी मौत का दावा दो बार कर चुके हैं। हालांकि अमेरिका और ब्रिटेन इस बात को बिल्कुल स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं दिखते। बीते तीन जून को अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा मध्य एशिया के दौरे पर सऊदी अरब गए थे। तब भी ओसामा की मौत को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया। लेकिन अचानक टीवी और रेडियो चैनलों पर उसके शब्द गूंज पड़े। इंटरनेट पर टेप जारी किए गए। दावा किया गया कि आतंकी सरगना अभी जीवित है। अरब के प्रमुख टीवी चैनल अल-जजीरा ने ओसामा का एक टेप दिखाया जिसमें उसने अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ जमकर आग उगली। 9/11 की घटना के बाद ओसामा के कई टेप जारी हुए। लेकिन कभी सार्वजनिक रूप से उसे देखा नहीं गया। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है।अब आम जनता के साथ अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार भी मानने लगे हैं कि अमेरिका और ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी इस मामले में दोहरा खेल खेल रहे हैं। कई जानकारों की राय में ओसामा बिन लादेन मर चुका है। लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन जानबूझ कर उसे जीवित बता रहे हैं। ऐसा करके वे आतंकवाद के खिलाफ अपनी कथित जंग को जारी रखना चाहते हैं। अमेरिका की एक पत्रिका स्पेक्टेटर ने इस संबंध में सुबूत भी पेश किए हैं। पत्रिका के संपादक और बोस्टन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कोडविला के मुताबिक वीडियो टेप में लोग जिस शख्स को देखते हैं उसकी कद काठी ओसामा बिन लादेन से अलग है।उनके अनुसार कुछ वीडियो में उसकी नाक यहूदियों जैसी दिखती है। तो कुछ में काफी लंबी। प्रोफेसर कोडविला के अनुसार ओसामा बहावी संप्रदाय का अनुयायी है।  आगे..
दोबारा रूस के राष्ट्रपति बन सकते हैं पुतिन
मॉस्को। रूस के सबसे लोकप्रिय नेता, प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह दोबारा राष्ट्रपति के रूप में देश की बागडोर संभाल सकते हैं। इस बाबत पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए 56 वर्षीय पुतिन ने कहा कि जिस तरह आपसी समझ के साथ उन्होंने 2008 के चुनावों में सत्ता की बागडोर मेदेवेदेव को सौंप दी थी। उसी तरह आगे भी समायोजन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी राजनीतिक विचारधारा और रक्त एक है। उम्मीद है कि हम एक समझौते पर पहुंच जाएंगे। पुतिन लगातार दो बार रूस के राष्ट्रपति रह चुके हैं। देश के संविधान के मुताबिक एक राष्ट्रपति लगातार दो बार से ज्यादा इस पद पर नहीं रह सकता। इस कारण पिछले साल के चुनावों में वह दिमित्री मेदेवेदेव के समर्थन में चुनाव मैदान से हट गए। व्लादिमीर ने कहा कि हम लोग समय के अनुसार वस्तुस्थिति का विश्लेषण करेंगे और उसी हिसाब से निर्णय लिए जाएंगे। एक अन्य प्रश्न के जवाब में पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उनके और मेदेवेदेव के बीच किसी प्रकार का सत्ता संघर्ष नहीं है। क्या हम लोग 2008 के चुनावों में लड़े थे? इसी तरह 2012 के चुनावों में भी आपस में नहीं लड़ेंगे। मेदेवेदेव का कार्यकाल सन 2012 में खत्म हो रहा है। रूस के नए संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार 2012 के बाद नया राष्ट्रपति छह वर्षो के दो कार्यकाल तक सत्ता में रह सकता है। अभी तक रूस में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार वर्षो का होता था। लेकिन नए नियमों के तहत पुतिन 2012 में क्रेमलिन की गद्दी संभालते हैं तो 2024 तक राष्ट्रपति बने रह सकते हैं। जानकारों के मुताबिक अब भी रूस में वास्तविक शक्तियां पुतिन के नियंत्रण में ही हैं। हालांकि इसका खंडन करते हुए पुतिन ने कहा कि देश की वास्तविक बागडोर मेदेवेदेव के हाथ में ही है। यदि कोई इस गलतफहमी का शिकार है तो उसे नींद से जाग जाना चाहिए। इस बात में कोई संदेह नहीं कि शीत युध्द की समाप्ति के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुतिन ने रूस के नेता के रूप में सर्वाधिक ख्याति पाई है। वर्ष 1990 के दशक में रूस की खराब आर्थिक हालत और विश्व समुदाय में गिरती साख को पुतिन की नीतियों ने बदल कर रख दिया। उनके शासनकाल में ही अमेरिका और रूस के रिश्तों के बीच में गर्माहट आई और रूस आर्थिक बदहाली के संकट से उबर सका। हालांकि पुतिन सत्ता में लौटते हैं तो रूस के उदारवादियों को परेशानी हो सकती है।  आगे..
भारत में आतंकी हमले की आशंका
वाशिंगटन। अमेरिका ने भारत में इस माह दशहरा, ईद और दीवाली जैसे त्यौहारों के कारण आतंकवादी हमलों की आशंका के मद्देनजर अपने नागरिकों को भारत यात्रा के दौरान सतर्क रहने की चेतावनी दी है। अमेरिकी गृह मंत्रालय ने जारी एक बयान में इस बात जिक्र करते हुए अपने नागरिकों से कहा है कि वह इस दौरान अगर भारत यात्रा पर जाते हैं तो सावधानी बरतें और 'लो प्रोफाइल' रहे। बयान में कहा गया है कि होटल और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर ना ठहरें क्योंकि ऐसे स्थान आतंकवादियों के निशाने पर हैं। बयान में कहा गया है कि अमेरिकी यात्री स्थानीय रिपोर्टों पर पूरी तरह से नजर रखें और सार्वजनिक स्थानों की यात्रा के पहले सुरक्षा स्थिति की पूरी जानकारी जुटा लें और होटल, रेस्त्रां तथा मनोरंजन केंद्रों के चयन से पहले भी ऐसी ही सावधानी बरतें।  आगे..
चीन धीरे-धीरे हथिया रहा है जमीन
लेह। वर्ष 1962 युध्द के बाद पहली बार चीनी सेना ने लद्दाख सेक्टर की काराकोरम रेंज से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निर्माण गतिविधियां की हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार की एक रिपोर्ट कहती है कि वह एकमुश्त नहीं, बल्कि धीरे-धीरे जमीन हथिया रहा है। अधिकारिक सूत्रों ने कहा कि चीन की पब्लिक लिबरेशन आर्मी काराकोरम रेंज के पास निर्माण गतिविधियां चला रही है, जिसका इस्तेमाल अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती या भारतीय सेना की गतिविधियों पर नजर रखने के उद्देश्य से कैमरा लगाने के लिए किया जा सकता है। काराकोरम दर्रा भारत और चीन के शिनजियांग स्वायत्त क्षेत्र के बीच आता है। यह चीन-भारत सीमा का उत्तरी छोर है, जिसे वास्तविक नियंत्रण रेखा के तौर पर जाना जाता है। इस दर्रे के पश्चिम में स्थित सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र के नियंत्रण को लेकर पाकिस्तान और भारत के बीच विवाद चल रहा है। यह स्थिति वर्ष 1972 में भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद उत्पन्न हुई थी जब संधि में नियंत्रण रेखा के अंतिम छोर और काराकोरम दर्रे के बीच संघर्ष विराम रेखा के अंतिम 100 किलोमीटर के क्षेत्र को स्पष्ट नहीं किया जा सका था। सेना ने जहां इस घटनाक्रम को ज्यादा महत्व नहीं देने की कोशिश की, वहीं यह भी स्वीकार किया कि कुछ खनन गतिविधि देखी गई है। एक सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि काराकोरम दर्रे पर कांक्रीट निर्माण की कोई रिपोर्ट नहीं है। हालांकि, चीनी क्षेत्र के भीतर कुछ खनन देखी गई है। इसी से संबंधित घटनाक्रम के तहत जम्मू-कश्मीर सरकार की रिपोर्ट में लद्दाख के विभिन्न हिस्सों में चीनी घुसपैठ को रेखांकित किया गया है। पूर्व अनुविभागीय मजिस्ट्रेट नयोमा त्सेरिंग नोरबू ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चीन ने लद्दाख सेक्टर में चराई के लिए दोकबुग क्षेत्र का इस्तेमाल कर रहे खानाबदोशों को दशकों बाद चेतावनी दी है ताकि इंचों में हमारी भूमि हथिया सकें। चीनी कहावत दुनिया भर में मशहूर है कि गज में करने से बेहतर इंच में करना है। राज्य सरकार ने नोरबू को दोकबुग क्षेत्र में चीनी सेना की घुसपैठ और जमीन को अपनी बताकर स्थानीय गड़ेरियों को उसे छोड़ने की चेतावनी देने के मामले की जांच के लिए नियुक्त किया है।अपने मवेशियों को चराने के लिए गड़ेरिए इस क्षेत्र का इस्तेमाल करते रहे हैं क्योंकि यह लद्दाख के अन्य क्षेत्रों की तुलना में गर्म रहता है। नोरबू ने रेखांकित किया कि क्षेत्र पर दावा जताने की यह चीन की एक और कोशिश है।  आगे..
चीन मीडिया ने भारतीय मीडिया को आंखें तरेरीं
पेईचिंग। भारतीय सीमा में चीनी घुसपैठ की खबरों से नाराज चल रहे चीन के मीडिया ने भारतीय मीडिया को दोनों देशों के बीच युध्द की मानसिकता पनपाने और दुश्मनी के बीज बोने वाला करार दिया है। सरकारी नियंत्रण वाले चायना डेली ने अपने संपादकीय में लिखा है कि अगर आप भारतीय मीडिया की खबरों को नियमित तौर पर पढ़ते हैं तो आप यह सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि चीन और भारत के बीच संघर्ष अनिवार्य हो गया है। अखबार के अनुसार पिछले कुछ महीनों से भारतीय मीडिया दोनों पक्षों को उन्मादी बता रहा है। अखबार ने व्यावसायिक नैेतिकता की दुहाई देते हुए आगे कहा है कि बजाए इसके कि सूचना-प्रेरणा और सच्चाई का पता लगाया जाए भारतीय मीडिया दोनों देशों के नागरिकों के बीच दुश्मनी के बीज बो रहा है और लड़ाई जैसे हालात पैदा करने की कोशिश कर रहा है।  आगे..
पाक की जनता बुरी तरह त्रस्त
इस्लामाबाद। आतंकवाद से पस्त पड़ चुके पाकिस्तान में जनता बुरी तरह हताशा महसूस कर रही है। हर तरफ अराजकता और भ्रष्टाचार का बोलबाला है। सरकार के सभी प्रयास आर्थिक स्थिति को सुधारने में नाकाम साबित हो रहे हैं। यहां पांव पसारते आतंकवाद और चरमपंथियों का दुष्प्रभाव घरों में महसूस किया जाने लगा है। ऐसे में जनता करे भी तो क्या। आगा खां यूनिवर्सिटी (एकेयू) के एक ताजा शोध के मुताबिक हाल के महीनों में यहां आत्महत्या की दर में काफी इजाफा हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक हर साल करीब छह से आठ हजार लोग मौत को गले लगा लेते हैं। एकेयू के मनोचिकित्सा विभाग के अध्यक्ष प्रो. मुराद मूसा खान बताते हैं, 'देश की 34 फीसदी आबादी जिसमें ज्यादातर लोग 30 साल से कम के हैं सामान्य मानसिक डिसआर्डर से पीड़ित हैं। आत्महत्या के 90 फीसदी मामलों की वजह डिप्रेशन यानी अवसाद बतायी जाती है। इंटरनेशनल एसोसिएशन पार सुसाइड प्रिवेंशन के अध्यक्ष डा. ब्रायन मिशारा के मुताबिक, 'दुनिया में हर साल करीब दस लाख लोग आत्महत्या करते हैं। यह आंकड़ा युध्द, आतंकी घटनाओं व नरसंहार में मारे गए लोगों की संख्या से कहीं ज्यादा है।' एक आकलन के मुताबिक पूरी दुनिया में हर साल करीब 60 लाख लोग अपने नजदीकी मित्र या पारिवारिक सदस्य के आत्महत्या करने से प्रभावित होते हैं।  आगे..

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