कियानी का दौरा
इस्लामाबाद। अफगानिस्तान सीमा से लगे आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर आए पाक सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी ने कहा कि कबायली और आसपास के क्षेत्रों में सैन्य अभियानों से आतंकी गतिविधियों को रोकने में मदद मिली है। ईद की छुट्टियों में कबायली क्षेत्र दक्षिणी वजीरिस्तान के वाना और पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत की यात्रा पर गए कियानी ने बुधवार को सैनिकों से बातचीत में कहा कि सुरक्षा बल आतंकी गतिविधियों में काफी हद तक कमी लाने में सफल हुए हैं।
सेना प्रमुख की इस क्षेत्र की यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। स्थानीय निवासियों को उनके घरों तक सीमित कर दिया गया था और सैन्य अधिकारियों की ओर से अघोषित कर्फ्यू के बाद वाना में सड़के और बाजार सुनसान थे। पूरे दिन सेना के हेलीकॉप्टर क्षेत्र के ऊपर मंडराते रहे।
कियानी कबायली क्षेत्र और डेरा इस्माइल खां के सैन्य ठिकानों पर गए। कियानी ने वहां वरिष्ठ फील्ड कमांडरों से मुलाकात की और कनिष्ठ अधिकारियों, जूनियर कमांडिंग आफिसर और सैनिकों से खुलकर बात की। कियानी ने ईद के मौके पर स्थानीय लोगों में सैन्य कमांडरों की ओर से विशेष पैकेज और सेना की रशद में से 12 हजार टन से अधिक मात्रा बांटने की सराहना की। आतंकियों के खिलाफ मौजूदा अभियान में शौर्य दिखाने के लिए उन्होंने दो सैनिकों को वीरता पदक दिया।
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सभी एनपीटी में शामिल हों
पिट्सबर्ग। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की अध्यक्षता में परमाणु अप्रसार एवं निशस्त्रीकरण पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रमुख सत्र के अवसर पर अमेरिका ने विश्व के सभी देशों से परमाणु अप्रसार संधि एनपीटी में शामिल होने का आह्वान किया। अमेरिका ने उम्मीद जताई कि सुरक्षा परिषद परमाणु हथियार विहीन विश्व के उसके आह्वान का अनुमोदन करेगी। शीर्ष अमेरिकी परमाणु निशस्त्रीकरण अधिकारी गैरी सामोर ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका का मानना है कि है कि सभी देशों को एनपीटी में शामिल होना चाहिए।
ओबामा पहले अमेरिकी राष्ट्रपति होंगे जो सुरक्षा परिषद की शिखर बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में उनके अलावा 14 राज्याध्यक्ष होंगे। उम्मीद की जा रही है कि परिषद अमेरिका की ओर से वितरीत एक मसौदा प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार करेगी। इस अहम बैठक का लहजा ओबामा ने तय किया है। उन्होंने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने प्रथम संबोधन में परमाणु अप्रसार के अपने दायित्वों को पूरा करने में नाकाम रहने वाले देशों से कहा कि उन्हें नतीजे भुगतने होंगे। हथियार नियंत्रण एवं परमाणु अप्रसार मामलों के अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद समन्वयक सामोर ने देशों को अपनी सरजमीं पर परमाणु सामग्रियों की सुरक्षा करने की अपनी जिम्मेदारी की याद दिलाई ताकि एक भी परमाणु हथियार आतंकियों के हाथ न लग सके। अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि एनपीटी ऐसी चीज है जिसके बारे में हम उम्मीद करेंगे कि परिषद अनुमोदन करेगी। सामोर ने कहा कि अभी तक एनपीटी में शामिल नहीं होना अवैध नहीं है। एक दशक से ज्यादा समय में यह पहला मौका होगा जब अमेरिका एनपीटी पर ज्यादा समर्थन जुटाने के लिए किसी द्विवार्षिक सम्मेलन में फिर से शामिल हो रहा है। सामोर ने कहा कि उसके व्यापक प्रभाव को देखते हुए, हम शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा पैदा होने के मामलों में और अपनी भूमिका निभाने के लिए सुरक्षा परिषद की तरफ देखते हैं। सामोर ने कहा कि ओबामा की रणनीति में तीन तत्व हैं। पहला परमाणु निशस्त्रीकरण है। इसका मतलब यह है कि परमाणु हथियारों से संपन्न देश उनके उन्मूलन के लिए काम करें।सामोर ने कहा कि इसमें अमेरिका और रूस के बीच का नया हथियार नियंत्रण संधि, समग्र परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि सीटीबीटी और परमाणु हथियारों के लिए विखंडनीय पदार्थों के उत्पादक के खात्मे के लिए संधि शामिल है। उन्होंने कहा कि ओबामा की रणनीति का दूसरा तत्व परमाणु अप्रसार है, इसके तहत अतिरिक्त देशों को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।
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पाक ने अलापा पुराना राग
न्यूयार्क। द्विपक्षीय बैठकों से पहले पाकिस्तान ने मुंबई हमले पर एक बार फिर वही रटा-रटाया बयान दिया है।
पाकिस्तानी गृह मंत्री रहमान मलिक ने कहा कि हमें जमात प्रमुख हाफिज सईद की हमलों में भूमिका की जांच के लिए और समय चाहिए। साथ ही वह यह भी दोहराने से नहीं चूके कि भारत ने अब तक सिर्फ सुराग उपलब्ध कराए हैं, विश्वसनीय सबूत नहीं।
मलिक ने कहा, हम भारत से सिर्फ इतना ही आग्रह कर रहे हैं कि वह हमें विश्वसनीय सबूत उपलब्ध कराए जो अदालत में मान्य हो, लेकिन मैं उन सुरागों को खारिज नहीं कर रहा। मैं कह रहा हूं कि जांच के लिए मुझे कुछ और समय दीजिए। सुराग और साक्ष्य में अंतर बताते हुए मलिक ने कहा कि विश्वास तभी बनता है जब आप बातचीत करते हैं। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि भारत बातचीत नहीं कर रहा है इसलिए यह रुका हुआ है। अगर वह बातचीत करते हैं तो हम उन्हें कई बातों से संतुष्ट करने में सक्षम हैं।
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भारत का कड़ा संदेश
संयुक्त राष्ट्र। विकसित देशों को कड़ा संदेश देते हुए भारत ने बुधवार को उनसे अपने 'रंग-ढंग' बदलने को कहा, ताकि 2020 तक कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने के साथ सुनिश्चित हो कि विकासशील देशों के पास अपने विकास को जारी रखने के साथ जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। जलवायु परिवर्तन पर यहां आयोजित सम्मेलन के दौरान गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए भारतीय विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने विकसित देशों से 2020 तक अपने कार्बन उत्सर्जन में कम से कम 40 फीसदी की कमी लाने को कहा।
कृष्णा ने कोपेनहेगन में होने वाले सम्मेलन के पूर्व राजनीतिक इच्छा शक्ति को गति देने के लिए आयोजित सम्मेलन में कहा कि हम इस आधारभूत तथ्य से दूर नहीं भाग सकते कि विकसित देशों की जीवनशैली और उत्पादन व उपभोग के तरीकों से जलवायु परिवर्तन हो रहा है, इसे जारी नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि कोपेनहेगन में आने वाले परिणाम यह सुनिश्चित करने वाले होने चाहिए कि विकासशील देश 'तेज गति से विकास' कर सकें और उनके पास 'जलवायु परिवर्तन से निपटने और उसके साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए' संसाधन उपलब्ध हों। कृष्णा ने कहा कि आगे की राह यह सुनिश्चित करने वाली होनी चाहिए कि विकासशील देश गति जारी रख सकें और गरीबी का उन्मूलन हो। उन्होंने प्रतिबध्दता जताई कि भारत राष्ट्रीय स्तर पर 2020 के लिए एकपक्षीय स्वैच्छिक तकनीक अपनाएगा। कृष्णा ने कहा कि हम बार-बार कहते आए हैं कि हमारा प्रति व्यक्ति उत्सर्जन कभी भी विकसित देशों के प्रति व्यक्ति उत्सर्जन से आगे नहीं निकलेगा, भले ही हम विकासात्मक लक्ष्यों पर आगे बढ़ रहे हैं। कृष्णा ने कहा कि कार्रवाई का दायित्व अब विकसित देशों पर होना चाहिए, जिन्होंने उत्सर्जन से संबंधित अपने वादे पूरे नहीं किए हैं। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को कोपेनहेगन से आशा है कि वहां उन्हें आर्थिक संसाधनों के प्रावधान के साथ तकनीक निर्माण और तकनीक तक पहुंच मिलेंगी, ताकि वे अपने राष्ट्रीय प्रयासों को मजबूती दे सकें।उन्होंने वैश्विक नेताओं को बताया कि भारत लगातार विकास से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है और गरीबी उन्मूलन देश की सर्वोच्च प्राथमिकता बना हुआ है। उन्होंने कहा कि गरीबी के उन्मूलन के लिए हम हमारी ऊर्जा संबंधी गरीबी पर ध्यान देते हैं और जीवाश्म ईधन समेत ऊर्जा के सभी स्रोतों का उपयोग करते हैं। उन्होंने कहा 'देश में लगभग 20 करोड़ लोग प्रतिदिन एक डॉलर से भी कम में गुजारा करते हैं और लगभग 50 करोड़ लोगों की ऊर्जा के आधुनिक स्रोतों तक पहुंच नहीं है।'
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नया वीडियो टेप जारी
दुबई। आतंकवादी संगठन अलकायदा ने 11 सितम्बर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकवादी हमले के नौ वर्ष पूरे होने के मौके पर एक वीडियो टेप जारी किया है जिसमें इसके दूसरे सबसे बड़ा नेता अयमान अल जवाहिरी को संबोधित करते हुए दिखाया गया है।
अमेरिका की आतंकवाद निगरानी सेवा के अनुसार अलकायदा द्वारा जारी 'द वेस्ट एंड द डार्क टनल' शीर्ष वाले इस 106 मिनट के अरबी भाषा के इस वीडियो टेप में मुख्य रूप से जवाहिरी ने अपना संबोधन दिया है। जवाहिरी ने इस वीडियो टेप में पिछले वर्ष वैश्विक आर्थिक मंदी, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव और अन्य घटनाओं का जिक्र किया है। इस वीडियों टेप को ऐसी वेबसाइट पर डाला गया है जिसका इस्तेमाल अलकायदा समर्थक अक्सर करते रहे हैं। उल्लेखनीय है कि गत 14 सितम्बर को अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन ने एक इस्लामी वेबसाइट पर डाले गए एक आडियों टेप में अमेरिकी सरकार की इजरायल से नजदीकियों से अमेरिकी जनता को होने वाले नुकसान के प्रति आगाह किया था। 'अमेरिकी जनता को संदेश' शीर्षक वाला यह आडियो टेप 11 मिनट का था।
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नेपाल जाएगी विहिप
अयोध्या। नेपाल में माओवादियों की बढ़ी ताकत का माकूल जवाब देने और हिन्दूवादी संगठनों को एकजुट करने के लिए विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) सवा तीन लाख पूजित शिलाओं का दुबारा पूजन करने के दूसरे ही दिन 14 नवम्बर को राम बारात लेकर जनकपुर (नेपाल) जाएगी।
अयोध्या में 11,12 और 13 नवम्बर को शिलाओं (ईंट) का दुबारा पूजन होगा। राम मंदिर आंदोलन के दौरान विहिप ने नवम्बर 1989 में देश के सवा लाख गांवों से इन शिलाओं का पूजन कर मंगवाया था। इन शिलाओं के दुबारा पूजित होने के दूसरे ही दिन यहां से रामलला की बारात निकलेगी। बारात 21 नवम्बर को जनकपुर पहुंचेगी जहां रामलला जानकी संग सात फेरे लेंगे। राम बारात अयोध्या से निकलकर आजमगढ़, बक्सर, आरा, छपरा और पटना होते हुए 21 नवम्बर को जनकपुर पहुंचेगी। वर्ष 2004 में इसी तरह निकली बारात का तत्कालीन नेपाल नरेश ज्ञानेन्द्र ने स्वागत किया था। उस समय नेपाली जनता ने भी इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था।
जानकारों की मानें तो विहिप इस आयोजन के जरिये भारत-नेपाल की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखना चाहती है। विहिप चाहती है कि दोनों की पौराणिक विरासत पुनर्जीवित हो। विहिप नेपाल में माओवादियों का प्रभाव भी कमतर देखना चाहती है। राम बारात में साधु-सन्ताें के साथ ही विहिप नेता शामिल होंगे।
राम का विग्रह दूल्हे के रूप में यहां से जाएगा और वहां 'जनकपुर' से माता-सीता के विग्रह को दूल्हन के रूप में लाया जाएगा। बारात 24 नवम्बर को यहां पहुंचेगी।
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हाथ काट दिया जाएगा
तेहरान। ईरानी राष्ट_पति महमूद अहमदीनेजाद ने पश्चिमी देशों को चेतावनी दी है कि ईरान पर यदि किसी ने हमला किया तो उसका मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा।
अहमदीनेजाद ने राजधानी तेहरान में वर्ष 1980 में शुरू हुए ईरान इराक युध्द की याद में आयोजित सैन्य परेड में यह चेतावनी दी। उन्होंने कहा, 'ईरानी सेनायें हमला करने से पहले ही हमलावर के हाथ काट देंगी। विश्व के किसी भी देश में इतनी ताकत नहीं है हम पर हमला करने का साहस कर सके। आज हम पहले की अपेक्षा अधिक ताकतवर तथा शक्तिशाली हो गए हैं।' उन्होंने कहा कि विदेशी सेनाओं की उपस्थिति ही इस क्षेत्र में जारी सभी समस्याओं की जड़ है। इससे पहले कल अहमदीनेजाद ने कहा था कि 'विश्व के पेशेवर हत्यारों' का ईरान पर गुस्सा उनके देश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश ईरान से जितना ज्यादा क्रोधित होंगे ईरान ही उतना ज्यादा खुश होगा। ज्ञातव्य है कि अमरीका और इजरायल का आरोप है कि ईरान अपने विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम के द्वारा परमाणु बम बना रहा है।
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करजई ने आरोपों को नकारा
वाशिंगटन। अपने प्रशासन के भ्रष्टाचार से घिरे होने के आरोपों के बाद अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने जोर देकर कहा है कि उनकी सरकार विश्वसनीय और वैधानिक है, लेकिन उसके पास संसाधन नहीं हैं। नाटो कमांडर जनरल स्टैनली मैकक्रिस्टल ने कहा था कि करजई सरकार भ्रष्टाचार से इस कदर घिरी हुई है कि यह अफगानिस्तान के स्थायित्व के लिए चरमपंथ जितनी खतरनाक है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए करजई ने एक साक्षात्कार में कहा कि मैं इससे पूरी तरह असहमत हूं।
करजई ने कहा कि अफगान सरकार विश्वसनीय और वैधानिक है। यह ऐसी सरकार है, जिसके पास संसाधन नहीं हैं।करजई 20 अगस्त को हुए चुनावों के परिणामों में आगे चल रहे हैं, हालांकि इन चुनावों में धांधली की खबरों ने सुर्खियां बटोरी हैं। इन आरोपों पर करजई ने कहा कि इन सभी शिकायतों की गहनता से जांच होनी चाहिए।
करजई ने कहा कि वे चुनावों का दूसरा चरण कराने के किसी जबरिया राजनीतिक कदम का विरोध करेंगे, जब तक कि यह किसी भी प्रत्याशी को 50 फीसदी से कम मत मिलने की दशा में जरूरी न हो जाए।उन्होंने कहा, अगर चुनाव में किसी भी पक्ष ने धांधली की है, तो यह गंभीर मुद्दा है। मैं चाहूंगा कि इसकी जांच हो, लेकिन अगर चुनाव के दूसरे चरण की कोई राजनीतिकच् इच्छा है, तो यह निश्चित तौर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
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इनाम दिए थे मुशर्रफ़ ने
इस्लामाबाद। नब्बे के दशक में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी कमांडर रह चुके और अब हालिया अमेरिकी ड्रोन हमले में संभवत: मारे गए इलयास कश्मीरी को परवेज मुशर्रफ ने वर्ष 2000 में भारतीय सेना के एक अधिकारी का गला रेतने के लिए पुरस्कृत किया था। हरकत उल जेहाद अल इस्लामी (हूजी) का कमांडर कश्मीरी उत्तारी वजीरिस्तान में गत सप्ताह हुए एक ड्रोन हमले में कथित तौर पर मारा गया। द न्यूज डेली ने खबर दी कि वह पाकिस्तानी थलसेना की कमांडो इकाई विशेष सेवा समूह में भी काम कर चुका था। सेना ने उसे अस्सी के दशक के मध्य में अफगानिस्तान में रूसी सेना से लड़ने के लिए अफगान मुजाहिदीनों को प्रशिक्षित करने का जिम्मा सौंपा था।
छब्बीस फरवरी 2000 को कश्मीरी ने नाकयाल सेक्टर में भारतीय सेना के खिलाफ कथित तौर पर एक छापामार अभियान को अंजाम दिया जिसके लिए उसने 25 आतंकवादियों के साथ नियंत्रण रेखा को पार किया था। उसने एक खंदक को घेर लिया और अंदर ग्रेनेड फेंके। मीडिया की खबर के मुताबिक वह एक घायल भारतीय अधिकारी को बंधक बनाने में कामयाब रहा जिसका बाद में गला रेत दिया गया। कश्मीरी उस भारतीय अधिकारी के सिर के साथ पाकिस्तान लौट आया और उसे सेना के शीर्ष अधिकारियों को सौंप दिया। उन अधिकारियों में तत्कालीन सैन्य प्रमुख जनरल मुशर्रफ शामिल थे जिन्होंने उसे एक लाख रुपए का नकद पुरस्कार दिया।
खबर के अनुसार भारतीय अधिकारी के सिर के साथ कश्मीरी के चित्र पाकिस्तान के कुछ अखबारों में प्रकाशित किए गए थे। इसके बाद वह आतंकवादियों के बीच काफी महत्वपूर्ण बन गया था। इस्लामाबाद स्थित जामिया मोहम्मदिया संगठन के मौलाना जहूर अहमद अलवी ने यहां तक कि एक फतवा भी जारी कर दिया जो भारतीय सेना के अधिकारियों का गला रेतने के समर्थन में था। खबर कहती है कि ये घटनाएं उस समय हुईं जब रावलपिंडी में तत्काली कोर कमांडर लेफ्टिनेंट महमूद अहमद ने कोटली में कश्मीरी के एक आतंकवादी प्रशिक्षण केंद्र का दौरा किया और भारतीय सेना के खिलाफ उसकी लगातार छापामार कार्रवाई की तारीफ की। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कोटली क्षेत्र का निवासी कश्मीरी सुरंगों का विशेषज्ञ था और अफगानिस्तान में जेहाद के दौरान अपनी एक आंख खो चुका था।
अफगानिस्तान से रूसी सेना हटने के बाद पाकिस्तानी प्रतिष्ठान ने कश्मीरी से कश्मीरी आतंकवादियों के साथ काम करने को कहा। फिर वह हूजी के कश्मीर अध्याय में वर्ष 1991 में शामिल हो गया। कुछ साल बाद उसके हूजी प्रमुख कारी सैफुल्ला अख्तर से मतभेद हो गए और उसने खुद की 313 ब्रिगेड बना ली। भारतीय सेना ने एक बार पुंछ में उसे गिरफ्तार किया था और दो साल तक विभिन्न जेलों में रखा था। बाद में वह जेल तोड़कर भाग निकला। खबर कहती है कि 1998 में नियंत्रण रेखा के पास तनाव के दौरान कश्मीरी को भारतीय बलों पर कई बार हमले करने का काम दिया गया।
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राजपूतों को छह माह का वीजा
बाड़मेर। वर वधू की तलाश में पाकिस्तान से भारत में आने वाले सोढा राजपूत परिवारों को अब छह माह तक के वीजा की सुविधा सुलभ होगी। राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल की अनुशंषा पर गृह एवं विदेश मंत्रालय ने वर-वधू की तलाश के लिए आने वाले सोढा राजपूत परिवारों के लिए वीजा नियमों का सरलीकरण कर छह माह तक की अवधि बढ़ाने के आदेश जारी किए हैं। पाक विस्थापित संघ के अध्यक्ष हिन्दू सिंह सोढ़ा ने बताया कि पिछले कई वर्षों से यह मांग की जा रही थी। इससे सोढ़ा राजपूत परिवारों को अपने लड़के-लड़कियों के रिश्ते करने में अपेक्षाकृत अधिक समय मिलेगा। पश्चिमी राजस्थान तथा पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लोगों के मध्य विभाजन के बावजूद रोटी बेटी का रिश्ता आज भी कायम है।
वीजा नियमों के सरलीकरण नहीं होने से सिंध प्रांत में रह रहे अल्पसंख्यक हिन्दू सोढ़ा राजपूत परिवारों के सामने कई समस्याएं आ रही थीं। वर्ष 1965 तथा 1971 के भारत-पाक युद्व के पश्चात सोढ़ा समाज के लगभग एक लाख परिवार पाकिस्तान से पलायन कर भारत के सीमावर्ती इलाकों में बस गए थे। इसके बावजूद 25-30 हजार सोढ़ा परिवार पाकिस्तान में बसे हुए हैं। वैवाहिक रिश्तों के लिए उन्हें भारत आना पड़ता है।
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