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	<title>दक्षिण भारत राष्ट्रमत</title>
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	<description>कर्नाटक से प्रकाशित प्रातः कालीन हिन्डी दैनिक</description>
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		<title>आचार्य की मौत पर रो पड़े मुख्यमंत्री</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Feb 2012 08:26:53 +0000</pubDate>
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			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://www.dakshinbharat.com/2012/02/15/%e0%a4%86%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%a4-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a5%8b-%e0%a4%aa%e0%a5%9c%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96-3085/cry/" rel="attachment wp-att-3086"><img src="http://www.dakshinbharat.com/wp-content/uploads/2012/02/cry-300x192.jpg" alt="" title="cry" width="300" height="192" class="alignright size-medium wp-image-3086" /></a>बेंगलूर। मुख्यमंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने उच्च शिक्षा मंत्री वीएस आचार्य को अपना राजनीतिक गुरु बताते हुए उनके निधन पर मंगलवार को यहां उन्हें अश्रुपूरित नेत्रों से श्रध्दांजलि दी। अपनी आहत भावनाओं पर काबू करते हुए और आंसुओं को छिपाते हुए गौड़ा ने 71 वर्षीय आचार्य को राजनीतिक विशारद, ईमानदार व्यक्ति और निष्ठावान बताया। मुख्यमंत्री ने रूंधे गले से कहा, &#8216;राजनीति में उन पर एक भी काला धब्बा नहीं लगा। अंतिम समय तक वह कार्य के प्रति समर्पित रहे। वह मेरे राजनीतिक गुरु थे। राजनीति में आगे बढ़ने और आज इस पद तक पहुंचने में उन्होंने मुझे मार्गदर्शन किया।&#8217;<br />
अस्पताल में आचार्य को श्रध्दांजलि देते हुए मुख्यमंत्री इतना भावुक हो गए कि उन्होंने कहा, &#8216;आज वह हमारे बीच न होकर भी हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे&#8230; मुझे नहीं मालूम कि कैसे और किसके माध्यम से&#8230;अन्यथा कर्नाटक में राजनीति अच्छी दिशा में नहीं जा सकेगी।&#8217; गौड़ा अगले महीने अपने पहले बजट की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आचार्य ने अच्छा बजट तैयार करने में सहयोग देने का वादा किया था । उनकी प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आचार्य योजना और सांख्यिकी, सूचना प्रौद्योगिकी एवं बायोटेक्नोलॉजी जैसे विभिन्न मुद्दों पर गहरी पकड़ रखते थे।</p>
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		<title>कलाम और हेगड़े को जिंदल पुरस्कार</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Feb 2012 08:24:27 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम एवं कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त संतोष हेगड़े समेत 27 लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए एसआर जिंदल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार 23 फरवरी को सीताराम जिंदल फाउंडेशन की ओर से दिए जाएंगे। सीताराम जिंदल फाउंडेशन की ओर से जारी विज्ञप्ति के [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम एवं कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त संतोष हेगड़े समेत 27 लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए एसआर जिंदल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार 23 फरवरी को सीताराम जिंदल फाउंडेशन की ओर से दिए जाएंगे।<br />
सीताराम जिंदल फाउंडेशन की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक कलाम को विज्ञान के क्षेत्र में तथा हेगड़े को सामाजिक विकास के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। पुरस्कार स्वरूप सभी को एक-एक करोड़ रुपए की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र दिए जाएंगे।<br />
फाउंडेशन के संरक्षक एवं जिंदल एल्युमिनियम के सीएमडी डॉ. सीमाराम जिंदल ने कहा कि इस पुरस्कार की स्थापना का उद्देश्य लोगों को देश और समाज के उत्थान के लिए काम करने को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास के क्षेत्र में योगदान के लिए जिंदल पुरस्कार तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन, ग्रामीण विकास तथा वीरता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए एसआर जिंदल पुरस्कार दिए जाएंगे।<br />
डॉक्टर कलाम को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए वर्ष 2011 के एसआर जिंदल पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। उन्होंने बतौर वैज्ञानिक भारत के मिसाइल और परमाणु अस्त्रों के क्षेत्र में सक्षम बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है।</p>
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		<title>मुंबई जैसे हमलों से बचाव के लिए अमेरिका सतर्क</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Feb 2012 08:23:24 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[वाशिंगटन। वर्ष 2008 में हुए मुंबई हमलों से सबक लेते हुए अमेरिका की कई सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने देश के छह बड़े शहरों में ऐसे आतंकी हमलों से निपटने के लिए कई कार्यशालाएं आयोजित की हैं। अमेरिका के घरेलू सुरक्षा विभाग ने कहा है कि खतरे के वर्तमान माहौल को देखते हुए मुंबई में [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://www.dakshinbharat.com/2012/02/15/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a4%88-%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%95-3079/mumbai/" rel="attachment wp-att-3080"><img src="http://www.dakshinbharat.com/wp-content/uploads/2012/02/mumbai-300x187.jpg" alt="" title="mumbai" width="300" height="187" class="alignright size-medium wp-image-3080" /></a>वाशिंगटन। वर्ष 2008 में हुए मुंबई हमलों से सबक लेते हुए अमेरिका की कई सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने देश के छह बड़े शहरों में ऐसे आतंकी हमलों से निपटने के लिए कई कार्यशालाएं आयोजित की हैं।<br />
अमेरिका के घरेलू सुरक्षा विभाग ने कहा है कि खतरे के वर्तमान माहौल को देखते हुए मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों जैसे हमलों से निपटने के लिए घरेलू सुरक्षा विभाग के खुफिया और विश्लेषण कार्यालय ने सहयोगी एफईएमए, नेशनल काउंटर टेररिजम सेंटर और डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस.फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के साथ मिल कर देश के छह बड़े शहरों में कार्यशालाओं की एक श्रृंखला आयोजित की।<br />
बहरहाल शहरों के नामों का जिक्र नहीं किया गया लेकिन पहले की खबरों में संकेत दिया गया था कि जिन शहरों में ऐसी कार्यशालाएं आयोजित की गईं उनमें न्यूयार्क, लॉस एंजिलिस, शिकागो और वाशिंगटन शामिल थे। डीएचएस के अनुसार, अमेरिका और भारत की सरकारों के बीच समय पर महत्वपूर्ण साइबर सुरक्षा सूचनाओं और दक्षता का आदान प्रदान सुनिश्चित करने के लिए, भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल और डीएचएस के यूनाइटेड स्टेट्स कंप्यूटर आपात तैयारी दल ने गत वर्ष एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। बजटीय प्रस्ताव में डीएचएस ने कहा है कि इस तैयारी के माध्यम से सरकारों और देशों के साइबर सुरक्षा समुदाय बड़े पैमाने पर तकनीकी और साइबर संचालन संबंधी मुद्दों को लेकर अपने समकक्षों के साथ समन्वय कर सकते हैं।</p>
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		<title>यूपी विधानसभा चुनाव : कांग्रेस का बहुत कुछ दांव पर</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Feb 2012 08:21:17 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बुधवार को तीसरे और 19 फरवरी को चौथे चरण में लखनऊ, अमेठी, रायबरेली हरदोई, उन्नाव और लखीमपुरखीरी में होने वाले चुनाव में कांग्रेस का बहुत कुछ दांव पर लगा है। इन दो चरणों के चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, महासचिव राहुल गांधी, प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी और कांग्रेस विधानमंडल [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://www.dakshinbharat.com/2012/02/15/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97-3074/rahul3/" rel="attachment wp-att-3075"><img src="http://www.dakshinbharat.com/wp-content/uploads/2012/02/rahul3-300x223.jpg" alt="" title="rahul3" width="300" height="223" class="alignright size-medium wp-image-3075" /></a>लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बुधवार को तीसरे और 19 फरवरी को चौथे चरण में लखनऊ, अमेठी, रायबरेली हरदोई, उन्नाव और लखीमपुरखीरी में होने वाले चुनाव में कांग्रेस का बहुत कुछ दांव पर लगा है। इन दो चरणों के चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, महासचिव राहुल गांधी, प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी और कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रमोद तिवारी की प्रतिष्ठा भी जुड़ी है। पार्टी के इन चार नेताओं के इलाके में बुधवार और 19 फरवरी को मतदान होना है। इनमें प्रदेश अध्यक्ष और विधानमंडल दल के नेता तो खुद प्रत्याशी भी हैं।<br />
गांधी परिवार के दो सदस्यों के अलावा लखनऊ मंडल में धौरहरा से जितिन प्रसाद, उन्नाव से अनु टंडन और लखीमपुरखीरी से जफर अली नकवी सांसद भी हैं। कांग्रेस खासकर अमेठी और रायबरेली संसदीय क्षेत्र की विधानसभा सीटें कांग्रेस जीतती रही है। विधानसभा के पिछले चुनाव में इन दो संसदीय क्षेत्र की दस सीटों में कांग्रेस की झोली में सात सीट गई थी। दिलचस्प है कि पूरे राज्य में कांग्रेस को सिर्फ 22 सीटें ही मिली थीं। अमेठी और रायबरेली की सीटों के लिए कांग्रेस इस बार भी आश्वस्त नजर आ रही हैं और प्रचार की कमान संभाले प्रियंका गांधी वाड्रा का दावा है कि पार्टी सभी दस सीटें जीतेगी। हालांकि यह आसान नहीं है क्योंकि रायबरेली सीट से पिछले चुनाव में जीते निर्दलीय अखिलेश सिंह इस बार पीस पार्टी के प्रत्याशी हैं ओर अपने इलाके में खास रसूख रखते हैं। टिकट बंटवारे को लेकर भी कांग्रेस में असंतोष है और कुछ वरिष्ठ नेता चुनाव से हट गए हैं। पार्टी को अमेठी रायबरेली में भीतरघात का भी सामना करना पड़ रहा है।<br />
अमेठी और रायबरेली में पार्टी ने जगदीशपुर (सु) सीट को छोड़ सभी वर्तमान विधायकों को टिकट दिया है। नौ बार विधायक रहे रामसेवक ने इस बार अपने पोते राधेश्याम कनौजिया के लिए सीट छोड़ दी है।<br />
पार्टी ने तिलोई से मोहम्मद मुस्लिम को फिर प्रत्याशी बनाया है जो पिछला चुनाव काफी कम वोट से हारे थे। अमेठी विधानसभा सीट भी अमिता सिंह की उम्मीदवारी के कारण पार्टी की प्रतिष्ठा से जुड़ी है। अमिता सुलतानपुर से पार्टी के सांसद संजय सिंह की पत्नी हैं। विधानसभा के लिए 2002 में हुए चुनाव में वह भाजपा के टिकट पर जीती थीं । पिछला चुनाव उन्होंनें कांग्रेस के टिकट पर जीता था। लखनऊ छावनी सीट से प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी प्रत्याशी हैं। यहां 19 फरवरी को मतदान होना है। उन्होंनें लोकसभा का पिछला चुनाव भी लखनऊ सीट से लड़ा था लेकिन भाजपा के लालजी टंडन से पराजित हो गई थीं।<br />
जोशी को तृणमूल कांग्रेस की सुरैया सिद्दीकी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुरैया सिद्दीकी महिला कांग्रेस की पदाधिकारी थीं लेकिन विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के कारण वह तृणमूल कांग्रेस की प्रत्याशी हो गई हैं। उनका मुस्लिम होना भी कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रहा है। राज्य की राजधानी से पार्टी के एकमात्र विधायक श्याम किशोर को भी लखनऊ पश्चिम सीट पर काफी मेहनत करनी पड़ रही है। उनके सामने भाजपा के सुरेश तिवारी हैं जो अपनी साख और काम के लिए जाने जाते हैं। लखनऊ उत्तर सीट से पार्टी ने नीरज बोरा को प्रत्याशी बनाया है। पार्टी ने बख्शी का तालाब सीट से सुनीता सिंह को मैदान में उतारा है जो पिछले चुनाव में महोना सीट से बहुत कम वोट से हारी थीं। सरोजनीनगर सीट से पार्टी ने युवक कांग्रेस से जुडे गौरव चौधरी को टिकट दिया है।</p>
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		<title>अमेरिका में जोड़ियां बनाने का नया जरिया ऑनलाइन डेटिंग</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Feb 2012 08:17:11 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Dakshin Bharat</dc:creator>
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		<description><![CDATA[वाशिंगटन। कहते हैं कि जोड़ियां स्वर्ग में बनती हैं लेकिन आधुनिक युग में इस क्षेत्र में भी क्रांति आ गई है। अमेरिका में कराए गए एक शोध से पता चला है कि देश में ऑनलाइन डेटिंग अब रिश्ते बनाने का नया जरिया बन रहा है। यूनिवर्सिटी ऑफ रोशेस्टर के मनोचिकित्सकों के एक दल ने अपने [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://www.dakshinbharat.com/2012/02/15/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a5%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a8-3066/onlinedating-2/" rel="attachment wp-att-3071"><img src="http://www.dakshinbharat.com/wp-content/uploads/2012/02/onlinedating1-300x188.jpg" alt="" title="onlinedating" width="300" height="188" class="alignright size-medium wp-image-3071" /></a>वाशिंगटन। कहते हैं कि जोड़ियां स्वर्ग में बनती हैं लेकिन आधुनिक युग में इस क्षेत्र में भी क्रांति आ गई है। अमेरिका में कराए गए एक शोध से पता चला है कि देश में ऑनलाइन डेटिंग अब रिश्ते बनाने का नया जरिया बन रहा है।<br />
यूनिवर्सिटी ऑफ रोशेस्टर के मनोचिकित्सकों के एक दल ने अपने शोध में पाया कि मित्रों के जरिए मुलाकात की परंपरा पुरानी हो चुकी है और अब ऑनलाइन डेटिंग दूसरे नंबर पर रिश्तों की डोर बांधने का माध्यम बन रही है। शोधकर्ताओं के अनुसार, ऑनलाइन डेटिंग निश्चित रूप से अब रिश्तों में एक नया मोड़ है। शोध रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑनलाइन डेटिंग से एक ही बार में और कम समय में आपके पास ढेरों विकल्प मौजूद रहते हैं लेकिन इस ऑनलाइन लव के अपने नुकसान भी हैं। इसमें कहा गया है कि ऑनलाइन डेटिंग से दोनों पक्षों के बीच एक दूसरे के लिए महत्वाकांक्षाएं काफी बढ़ जाती हैं और दोनों अवास्तविक उम्मीदें पाल बैठते हैं।</p>
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		<title>महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Feb 2012 08:12:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Dakshin Bharat</dc:creator>
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		<description><![CDATA[उज्जैन। भारतीय हिन्दू संस्कृति में महाशिवरात्रि पर्व भगवान शिव का विवाह उत्सव के रुप में मनाए जाने की प्राचीन परंपरा के तहत देश के बारह ज्योतिर्लिगों में प्रमुख प्रसिध्द महाकालेश्वर मंदिर में तैयारियों को अंतिम रुप दिया जा रहा है। महाशिवरात्रि पर्व 20 फरवरी को है। महाकालेश्वर मंदिर के विशाल परिसर को विवाह मंडप के [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>उज्जैन। भारतीय हिन्दू संस्कृति में महाशिवरात्रि पर्व भगवान शिव का विवाह उत्सव के रुप में मनाए जाने की प्राचीन परंपरा के तहत देश के बारह ज्योतिर्लिगों में प्रमुख प्रसिध्द महाकालेश्वर मंदिर में तैयारियों को अंतिम रुप दिया जा रहा है। महाशिवरात्रि पर्व 20 फरवरी को है।<br />
महाकालेश्वर मंदिर के विशाल परिसर को विवाह मंडप के रुप में सुसज्ज्ाित किया जा रहा है और इस पर्व के मौके पर देश के विभिन्न प्रांतों से यहां अत्यधिक संख्या में आने वाले दर्शनार्थियों की सुरक्षा व सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए मंदिर प्रबंध समिति ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। महाकालेश्वर मंदिर देश का एक मात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जहां महाशिवरात्रि पर्व को नौ दिनों तक नवरात्रि महोत्सव के रुप में मनाया जाता है और नौ दिनों तक भगवान शिव (महाकालेश्वर) को दूल्हे के रुप में सजाया जाता है।<br />
इस महोत्सव के दौरान भगवान महाकाल को नौ दिनों तक अलग अलग मुखौटे के रुप में सुसज्ज्ाित कर करोड़ों रुपए मूल्य के आभूषणों से साज सज्जा की जाती है। अष्ठ कोषात्मक पंचवृत्त एवं पंचतत्व में मंत्रों और पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और व्योम के वेद मंत्रों एवं रुद्रयंत्र, सोमयंत्र के आधार पर निर्मित महाकालेश्वर मंदिर में प्राचीनकाल में यंत्र,मंत्र और तंत्र सिध्दि के लिए प्रसिध्द हैं और महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर 11 पुजारियों द्वारा पूजा की जाती है, प्रतिदिन तड़के होने वाले भस्मार्ती वर्ष में केवल एक दिन महाशिवरात्रि पर्व के दूसरे दिन दोपहर में भस्मार्ती होती है।<br />
आधिकारिक जानकारी में बताया कि जिला कलेक्टर डॉ. एम गीता की अध्यक्षता में विगत दिनों महाशिवरात्रि पर्व के लिए बैठक में लिए गए निर्णयानुसार व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी ताकि दर्शनार्थियों को अधिकाधिक भगवान महाकाल के दर्शन कम समय में हो सके और पर्व पर दोपहर में होने वाली भस्म आरती प्रवेश की व्यवस्था भी बेहतर किए जाने का निर्णय लिया गया है।<br />
मंदिर में भीड़ नियंत्रण एवं दर्शन व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन व पुलिस विभाग के समन्वय व्यवस्था की जाएगी।  दर्शनार्थियों के लिए बैरिकेट्स व पर्याप्त संख्या में क्लोज सर्किट टीवी एवं स्क्रीन प्रोजेक्टर लगाए जाएंगे ताकि दर्शनार्थी लाभ ले सके। इसके अतिरिक्त पर्व पर आने वालें वृध्दों व निःशक्त लोगों के लिए व्हील चेयर आदि की व्यवस्था मंदिर के बाहर स्थित पुलिस चौकी पर की जाएगी।</p>
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		<title>ऑस्ट्रेलिया से 25 साल बाद लौटा बिछड़ा बेटा</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Feb 2012 08:00:04 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Dakshin Bharat</dc:creator>
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		<category><![CDATA[Rochak]]></category>

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		<description><![CDATA[खंडवा। किस्मत भी कैसे कैसे खेल दिखाती है इसकी बानगी देखिए कि कभी रेलगाड़ियों में झाडू लगाकर भीख मांगने वाले बच्चे शेरू की तकदीर ने ऐसी करवट ली कि घर से बिछड़ कर वह ऑस्ट्रेलिया कि एक करोड़पति दंपत्ति के घर गोद चला गया और 25 साल में उसने वह सब कुछ पाया जिसकी उसने [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://www.dakshinbharat.com/2012/02/15/%e0%a4%91%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%87-25-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%b2%e0%a5%8c-3058/motherchild/" rel="attachment wp-att-3059"><img src="http://www.dakshinbharat.com/wp-content/uploads/2012/02/motherchild.jpg" alt="" title="motherchild" width="268" height="179" class="alignright size-full wp-image-3059" /></a>खंडवा। किस्मत भी कैसे कैसे खेल दिखाती है इसकी बानगी देखिए कि कभी रेलगाड़ियों में झाडू लगाकर भीख मांगने वाले बच्चे शेरू की तकदीर ने ऐसी करवट ली कि घर से बिछड़ कर वह ऑस्ट्रेलिया कि एक करोड़पति दंपत्ति के घर गोद चला गया और 25 साल में उसने वह सब कुछ पाया जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी लेकिन बस कमी थी तो सिर्फ अपनी माँ की। माँ की यही ममता ही उसे सात समंदर पार के महलों से अपने झोपड़े में वापस खींच लाई।<br />
खंडवा के गणेश तलाई क्षेत्र की गरीब बस्ती में फिल्मों की तर्ज पर हुए इस वाकये ने सबको अचंभे में डाल दिया। हुआ यूँ कि फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाला एक विदेशी युवक महंगा मोबाइल हैंडसेट और एक पुरानी तस्वीर हाथ में लिए फातमा बी यानी अपनी माँ का घर ढूंढ रहा था। उस युवक और फातमा का क्या सम्बन्ध है यह किसी को भी समझ नहीं आया। इस बीच लोगो ने उसे फातमा के घर पहुंचा दिया। फातमा के सामने हुए पच्चीस साल पहले बिछड़े बच्चे ने माँ को तुरंत पहचान लिया। माँ को भी बेटे को पहचानने में देर नहीं लगी।  फातमा को बधाई देने वालों का ताँता लग गया। लोग सारू उर्फ शेरू को पाकर ढोल की थाप पर नाचने लगे।<br />
माँ कमला उर्फ फातमा का कहना है, हमारे दिन अत्याधिक गरीबी में गुजरे। बच्चे भीख मांगकर पेट भरते थे। बड़ा लड़का ट्रेन से कट गया और छोटा ट्रेन से कहाँ गया पता नहीं चला। उसे बहुत ढूंढा। हम उम्मीद खो चुके थे। यह तो ऊपर वाले की ही मेहरबानी है कि बेटा इतने साल बाद भी लौट आया। लगता है सारी नेमत सारी दुनिया की दौलत मुझे मिल गई है।</p>
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		<title>जुल्फें फिर बढाएंगे धोनी</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Feb 2012 07:51:39 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Dakshin Bharat</dc:creator>
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		<description><![CDATA[एडिलेड। भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी कभी अपनी कंधों तक झूलती जुल्फों के लिए जाने जाते थे लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपनी जुल्फों से किनारा कर अपने बाल छोटे कर लिए थे। मगर धोनी एक बार फिर अपनी उन्हीं लम्बी जुल्फों को वापस पाने की कोशिशों में लगे हुए हैं। धोनी के अंतरराष्ट्रीय [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://www.dakshinbharat.com/2012/02/15/%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%ab%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%a7%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%80-3054/dhonihair/" rel="attachment wp-att-3055"><img src="http://www.dakshinbharat.com/wp-content/uploads/2012/02/dhonihair-300x300.jpg" alt="" title="dhonihair" width="300" height="300" class="alignright size-medium wp-image-3055" /></a>एडिलेड। भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी कभी अपनी कंधों तक झूलती जुल्फों के लिए जाने जाते थे लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपनी जुल्फों से किनारा कर अपने बाल छोटे कर लिए थे। मगर धोनी एक बार फिर अपनी उन्हीं लम्बी जुल्फों को वापस पाने की कोशिशों में लगे हुए हैं।<br />
धोनी के अंतरराष्ट्रीय कैरियर के शुरुआती दिनों में उनके कंधे तक झूलते बाल चर्चा का विषय रहते थे लेकिन धोनी जैसे-जैसे सफलता की सीढियां चढते गए उनके बाल छोटे होते चले गए। एक समय तो धोनी ने कमांडो जैसा हेयर स्टाइल भी अपना लिया था। पिछले कुछ महीनों में धोनी को इंग्लैंड दौरे और फिर ऑस्ट्रेलिया दौरे में लगातार पराजय का सामना करना पड़ा था। त्रिकोणीय एकदिवसीय सीरीज में मंगलवार को श्रीलंका के खिलाफ टॉस के समय धोनी ने कहा था कि वह फिर से अपने बाल लम्बे करना चाहते हैं ताकि उनका भाग्य सुधर सके।</p>
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		<title>निर्वाचन आयोग से खुर्शीद ने माफी मांगी</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Feb 2012 07:47:08 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Dakshin Bharat</dc:creator>
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		<description><![CDATA[नई दिल्ली। मुस्लिमों को आरक्षण संबंधी अपनी टिप्पणी को लेकर पैदा हुए विवाद पर निर्वाचन आयोग के साथ टकराव को समाप्त करने का प्रयास करते हुए विधि मंत्री सलमान खुर्शीद ने मंगलवार को घटना पर अफसोस जाहिर किया। उन्होंने साथ ही कहा कि कानून का उल्लंघन करना और चुनाव आचार संहिता को कमतर करने की [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली। मुस्लिमों को आरक्षण संबंधी अपनी टिप्पणी को लेकर पैदा हुए विवाद पर निर्वाचन आयोग के साथ टकराव को समाप्त करने का प्रयास करते हुए विधि मंत्री सलमान खुर्शीद ने मंगलवार को घटना पर अफसोस जाहिर किया। उन्होंने साथ ही कहा कि कानून का उल्लंघन करना और चुनाव आचार संहिता को कमतर करने की कभी उनकी मंशा नहीं थी। बीती आधी रात को निर्वाचन आयोग को भेजे एक पत्र में खुर्शीद ने कहा कि निर्वाचन आयोग के आगे सिर झुकाते हैं। उन्होंने साथ ही भविष्य में इस प्रकार की स्थिति की पुनरावृत्ति नहीं हो, यह सुनिश्चित करने में अपनी प्रतिबध्दता भी जाहिर की।</p>
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		<title>राजनीति में अमिट छाप छोड़ गए डॉ. आचार्य</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Feb 2012 07:46:14 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Dakshin Bharat</dc:creator>
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			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://www.dakshinbharat.com/2012/02/15/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%9f-%e0%a4%9b%e0%a4%be%e0%a4%aa-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a5%9c-%e0%a4%97-3048/vsachraya1/" rel="attachment wp-att-3049"><img src="http://www.dakshinbharat.com/wp-content/uploads/2012/02/vsachraya1-300x213.jpg" alt="" title="vsachraya1" width="300" height="213" class="alignright size-medium wp-image-3049" /></a>बेंगलूर । उडुपी में पिता विद्वान वेदांत शिरोमणि कट्टा श्रीनिवास आचार्य और माता कृष्णादेवी अम्मा के घर वर्ष 1939 में जन्मे वेदव्यास श्रीनिवास आचार्य ने वर्ष 1959 में केएमसी मणिपाल से चिकित्साशास्त्र की शिक्षा पूरी की। उन्हें दो बार सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी का पुरस्कार मिला। वर्ष 1968 में वे उडुपी नगर निगम द्वारा संचालित स्वर्ण जलापूर्ति प्रणाली के सबसे युवा उम्र के अध्यक्ष बने। उन्होंने इस स्थानीय निकाय में रहते हुए कई महत्वपूर्ण कार्य करवाए। उडुपी शहर के विकास और सौंदर्यीकरण में उनका योगदान काफी महत्वपूर्ण रहा। वे निगम अध्यक्ष के पद पर 8 वर्षों तक बने रहे। उन्होंने पूरे देश में पहली बार मानव मल की सफाई का काम किसी भी आदमी से करवाने के खिलाफ आवाज उठाई।<br />
वर्ष 1974 से 1977 तक वे भारतीय जनसंघ के उडुपी जिलाध्यक्ष रहे। इसके बाद वर्ष 1980 तक जनता पार्टी के भी जिलाध्यक्ष बनाए गए। वर्ष 1980 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी का जिलाध्यक्ष बनाया गया। इस पद पर वे तीन वर्षों तक बने रहे। वर्ष 1984 में उनके राजनीति करियर ने लंबी छलांग लगाई। उस वर्ष उन्हें भाजपा का प्रदेश उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया। डॉ. आचार्य दो दशकों तक भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर बने रहे। इस दौरान उन्हें कार्यकारिणी सदस्य के रूप में भी कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं दी गईं। वर्ष 1975 से 1977 तक तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी द्वारा पूरे देश में लागू किए गए आपातकाल के दौरान उन्हें सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए विवादित कानून &#8216;मीसा&#8217; के तहत 19 महीने जेल की सजा काटनी पड़ी। वर्ष 1983 में उन्होंने उडुपी से विधायक का चुनाव जीतकर विधानसौधा में कदम रखा। उन्होंने अपनी शालीनता और समर्पण के गुणों से विधानसभा में अपनी अलग पहचान बनाई। वर्ष 1996 में उन्हें कर्नाटक विधान परिषद की सदस्यता मिली। वर्ष 2002 में वे फिर से राज्य विधानमंडल के उच्चतर सदन के सदस्य चुने गए।<br />
उन्होंने उडुपी को अलग जिले का स्वरूप देने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2006 में उन्होंने चिकित्सा शिक्षा और पशुपालन मंत्री का कार्यभार संभाला। उन्होंने एक ही वर्ष में राज्य में छह नए मेडिकल कॉलेज खोल कर शानदार कार्य क्षमता का परिचय दिया। 12 नवंबर, 2007 में उन्होंने दोबारा मंत्रीपद की शपथ ली। वर्ष 2008 में उन्हें भाजपा की घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष का पद सौंपा गया। 30 मई, 2009 को उन्होंने कर्नाटक के गृह मंत्री के रूप में कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल किया। वर्ष 2009 में उन्हें धर्मादाय विभाग का अतिरिक्त कार्यभार मिला। इन पदों पर रहते हुए डॉ. आचार्य ने पुलिस और अन्य बलों के आधुनिकीकरण के कार्य में काफी दिलचस्पी ली। उनके ही निर्देश पर राज्य में आतंक विरोध बल का गठन किया गया। उन्होंने कर्नाटक के व्यापक समुद्रतटीय क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए तटरक्षक बलों को अधिक सशक्त बनाने की जरूरत महसूस की। इस दिशा में उन्होंने काफी काम भी किया।<br />
राज्य में कानून-व्यवस्था को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की जरूरत को देखते हुए उन्होंने पुलिस नियुक्ति प्रक्रिया को नए सिरे से ढाला था। पुलिसकर्मियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए उनके वेतन-भत्तों और उनकी छुट्टियों से संबंधित नीतियों में आवश्यक सुधार लाना उनकी खास उपलब्धि थी। काम के मामले में हमेशा दो कदम आगे रहने के लिए जाने जाते रहे डॉ. आचार्य ने वर्ष 2010 में उच्चतर शिक्षा, सांख्यिकी और योजना मंत्री के रूप में भी कर्नाटक के विकास की दृष्टि को आगे बढ़ाने में सक्रियता बरती।</p>
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