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पगड़ियां हैं राज घराने की हैसियत
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इंदौर। भारत में आजादी से पहले अलग-अलग हिस्सों में राजघरानों का राज था। इन राजघरानों की पहचान उनकी विशिष्ट पगड़ियां हुआ करती थीं, जो संबंधित व्यक्ति की हैसियत तथा पद का प्रतीक होती थी। इन्दौर में चल रहे मालवा उत्सव में लगी पगड़ियों की प्रदर्शनी राजघरानों की पगड़ियों की कहानी सुना रही है। पगड़ी प्रदर्शनी में विभिन्न राजघरानों की 118 पगड़ियों का प्रदर्शन किया गया है जो शिवाजी, महाराणा प्रताप, अकबर, गायकवाड़, होल्कर आदि प्रमुख राजघरानों की पगड़ियों का इतिहास बता रही हैं।
प्रदर्शनी में रखी रंगबिरंगी विभिन्न आकार तथा प्रकार की पगड़ियां हर किसी का मन मोह लेती हैं। यह पगड़ी प्रदर्शनी बड़ौदा के अवंतीलाल चावला ने लगाई है, जो राजघरानों की पगड़ियों पर शोध भी कर रहे हैं। चावला का कहना है कि पगड़ियां धर्म, पेशा, पद तथा जाति के आधार पर बनती थीं। पगड़ी को सिर का आभूषण माना जाता है और यह इतिहास बताने में भी मददगार है। चावला अब तक देश में 50 से ज्यादा स्थानों पर पगड़ी प्रदर्शनी लगा चुके हैं।
उनका कहना है कि वर्तमान दौर में पगड़ी तथा साफा विशेष अवसर पर ही बांधा जाता है, परंतु रियासत काल में पगड़ी सिर का आभूषण होता था तथा इसी से व्यक्ति के पद का पता चलता था। यही कारण था कि एक रियासत में कई पगड़ियां होती थीं।
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