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प्रेमचंद का स्मारक नहीं बना

 

नई दिल्ली। हिन्दी के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद के निधन के 73 वर्ष बाद भी उनके पैतृक गांव लमही में उनके नाम पर स्मारक एवं संग्रहालय नहीं बन सका। आज से 50 साल पहले तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने प्रेमचंद की 23वीं पुण्यतिथि पर उनके नाम एक स्मारक बनाने की आधारशिला रखी थी लेकिन आज तक यह स्मारक नहीं बन पाया। हिन्दी पाक्षिक "इंडिया न्यूज' ने प्रेमचंद के साथ हुए इस छल की विस्तृत कहानी अपने नए अंक में प्रकाशित की है जिसमें सरकार की उदासीनता तथा काशी नागरी प्रचारिणी सभा की कथित धोखाधड़ी का भी आरोप लगाया गया है। पत्रिका के अनुसार आठ अक्टूबर 1936 को वाराणसी के रामकटोरा मोहल्ले में किराए के एक मकान में प्रेमचंद का निधन हुआ। उनके 20 वर्ष बाद उनके भाई महताब राय ने, जो दैनिक "आज' के प्रेस व्यवस्थापक थे, काशी नागरी प्रचारिणी सभा का मुद्रण विभाग संभाल लिया। उस समय सभा के अध्यक्ष पंडित गोविंद बल्लभ पंत थे और सभा की पहल पर प्रेमचंद का स्मारक लमही में बनाने का निर्णय हुआ। 22 जुलाई 1956 को लमही में एक बैठक हुई जिसमें प्रेमचंद की विधवा शिवरानी देवी, त्रिलोचन शास्त्री, राजबली पाण्डेय आदि ने भाग लिया। प्रेमचंद के स्मारक निर्माण के लिए चंदा भी इकठ्ठा हुआ। आठ अक्टूबर 1959 को प्रेमचंद की 23वीं पुण्यतिथि के मौके पर स्मारक भवन की आधारशिला देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के कर कमलों द्वारा रखी गई। समारोह की अध्यक्षता बंगला के मशहूर लेखक ताराशंकर, वंद्दोपाध्याय ने की। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल वीवी गिरि, मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद, पंडित कमलापति त्रिपाठी, हजारी प्रसाद दिवेदी और शिवरानी देवी, महताब राय और अमृत राय ने भाग लिया लेकिन 45 वर्षों में नागरी प्रचारणी सभा कोई स्मारक नहीं बनवा पाई और आज तो डॉ. राजेंद्र बाबू द्वारा रखी गई आधारशिला की पट्टी भी वहां नहीं है। पत्रिका के अनुसार प्रेमचंद के वंशजों तथा प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े लेखकों ने तीन, चार वर्षों से प्रेमचंद स्मारक बनाने की आवाज उठाई। वर्ष 2006 में प्रेमचंद की 125वीं जयंती वर्ष में केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय ने प्रेमचंद स्मारक बनाने का निर्णय अपने हाथ में लिया और केन्द्र सरकार ने एक राष्ट्रीय समिति भी गठित की जिसकी संयोजिका माकपा सांसद सरला माहेश्वरी को बनाया गया। तत्कालीन संस्कृति मंत्री जयपाल रेड्डी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने लमही जाकर घोषणा की कि प्रेमचंद का स्मारक बनाया जाएगा पर तीन साल बीत गए। कुछ नहीं हुआ। इंडिया न्यूज के अनुसार सरला माहेश्वरी ने संसद में कई बार सवाल भी उठाए। अम्बिका सोनी को फोन किया तथा कपिल सिब्बल को संदेश भी दिए, पर कहीं कोई सुनवाई नहीं। संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्रेमचंद की स्मृति में गठित समिति की बैठक केवल एक बार हुई, फिर कोई बैठक भी नहीं हुई।  


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