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गंगोत्री यमुनोत्री के कपाट 18 अक्टूबर को बंद होंगे

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गंगोत्री यमुनोत्री के कपाट 18 अक्टूबर को बंद होंगे

 

देहरादून। उत्तरांखड में हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट 18 अक्टूबर को बंद होंगे, जबकि बद्रीनाथ धाम के कपाट 17 नवम्बर और केदारनाथ के कपाट 19 अक्टूबर को बंद किए जाएंगे। गंगोत्री धाम मंदिर समिति के सचिव हरीश सेमवाल ने बताया कि शीतकाल में गंगा के दर्शन मुखवा मार्कण्डेय मंदिर में हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि गंगोत्री में इस वर्ष करीब ढाई लाख श्रध्दालुओं ने अब तक यात्रा की और करीब 12 हजार यात्री गौमुख तक गए। चार धाम विकास परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सूरत राम नौटियाल ने बुधवार को यहां बताया कि चारों धाम के कपाट बंद होने की तैयारी शुरू कर दी गई है और इसके लिए विशेष अनुष्ठान तथा पूजा पाठ किया जाता है। चार धाम के अलावा पंच केदारों में शामिल मदमहेश्वर, तुंगनाथ और रूद्रनाथ के कपाट भी अलग-अलग तारीखों पर बंद किए जाएंगे। नौटियाल ने बताया कि गंगोत्री के कपाट आगामी 18 अक्टूबर को धार्मिक अनुष्ठान और वैदिक मंत्रों के साथ बंद कर दिए जाएंगे। गंगोत्री माता की डोली मुख्वा मारकण्डेय मंदिर में शीतकाल के दौरान करीब छह महीने के लिए रखी जाएगी। उन्होंने बताया कि यमुनोत्री के कपाट आगामी 19 अक्टूबर को बंद किए जाएंगे। पूरे देश में द्वादश शिवलिंगों में सबसे ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ मंदिर के कपाट भी आगामी 19 अक्टूबर को बंद कर दिए जाएंगे। केदार नाथ की गद्दी ऊखीमठ में धर्माचार्यों ने गत सोमवार को मुहूर्त निकालकर केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद करने की तिथि निर्धारित की। मुहूर्त के अनुसार 19 अक्टूबर को अपराह्न केदारनाथ की गद्दी रात्रि विश्राम के लिए गौरी कुंड आएगी। धर्माचायों के अनुसार गद्दी 20 तारीख को रामपुर, 21 को गुप्तकाशी और 22 तारीख को ओंकालेश्वर मंदिर में विराजित की जाएगी। धर्माचार्यों ने द्वितीय केदार के रूप में स्थापित मदमहेश्वर के कपाट को 20 नवंबर को बंद करने का मुहूर्त निकाला, जबकि तृतीय केदार के रूप में स्थापित तुंगनाथ के कपाट को 26 नवंबर को बंद करने की घोषणा की। परम्परा के अनुसार मदमहेश्वर की गद्दी भी ओंकालेश्वर मंदिर लाई जाएगी जबकि तुंगनाथ की गद्दी मक्कूमठ स्थित मंदिर में स्थापित की जाएगी। चतुर्थ केदार के रूप मे स्थित रूद्रनाथ मंदिर के कपाट बंद करने का अभी निर्णय नहीं किया गया है, जबकि पंचम केदार के रूप में कल्पेश्वर महादेव की गद्दी अपने ही स्थान पर ही विराजित रहती है। दूसरी ओर हिंदुओं के सर्वोच्च तीर्थ के रूप में स्थापित बद्रीनाथ धाम में स्थित बद्रीनाथ मंदिर के कपाट आगामी 17 नवंबर को शीतकाल में छह महीने के लिए बंद कर दिए जाएंगे। बद्रीनाथ धाम मंदिर के सूत्रों ने बताया कि मंदिर के प्रमुख पुजारी रावल केशव नम्बूदिरी की उपस्थिति में गत सोमवार को कपाट बंद करने की तिथि घोषित की गई। विजयादशमी के मौके पर बद्रीनाथ मंदिर के शीतकाल के दौरान बंद होने की तिथि का मुहूर्त निकाला जाता है। बद्रीनाथ के धर्माधिकारी जगदम्बा प्रसाद सती तथा अन्य विध्दानों की उपस्थिति में यह मुहूर्त निकाला गया था। मुहूर्त के अनुसार मंदिर के कपाट 17 नवंबर को अपराह्न तीन बजकर चालीस मिनट पर बंद किए जाएंगे। बद्रीनाथ की डोली जोशी मठ स्थित मंदिर में लाई जाती है। चारों धाम की यात्रा की अहमियत को देखते हुए इस वर्ष अभी तक करीब 25 लाख लोगों ने चारों धाम की यात्रा की।  


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