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रामदेवरा में लाखों श्रध्दालु पैदल पहुंचे
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| इसी तरह बीकानेर यात्रा मार्ग पर करीब पांच किलोमीटर पहले डाली बाई के मंदिर पर चूर गंगानगर, हनुमानगढ, हरियाणा पंजाब, सरदारशहर और बीकानेर सहित अन्य स्थानों से आने वाले पैदल जातरू दर्शन और विश्राम करते हैं। |
रामदेवरा। राजस्थान के सीमावर्ती जैसलमेर जिले के रामदेवरा में गत दो सप्ताह से चल रहे मेले में पीरों के पीर बाबा रामदेव की समाधि पर धोक लगाने के लिये देश के विभिन्न स्थानों से पैदल यात्रा कर श्रध्दालओं के जत्थों के पहुंचने का क्रम बना हुआ है।
मेला अधिकारी ओ पी विश्नोई ने बताया कि गत दो सप्ताह में 28 से 30 लाख 'यात्री' जातरू बाबा की समाधि पर धोक लगा चुके हैं।
समाधि पर धोक लगाने के लिए जातरू कई घंटे लाइन में लग कर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। इस बार सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद रखने के लिए मंदिर के प्रवेश स्थलों पर दस मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं।
रामदेवरा से करीब 10 किलोमीटर दूर तक गैर सरकारी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों ने पैदल यात्रियों की सेवा के लिए जगह जगह पेयजल 'जलपान' भोजन, चिकित्सा और आराम करने के लिए विश्राम स्थली की व्यवस्था की हुई है। पैदल सफर कर रहे लोग हाथों में पचरंगा ध्वज लिए बाबा के जयघोष और गीत गाते हुए आगे बढ रहे हैं। मरस्थलीय भूभाग में तपती रेत की परवाह किए बिना पांच साल के बच्चे से लेकर 80 साल तक के बुजुर्ग लोक देवता बाबा रामदेव का गुणगान करते हुए मंदिर मार्ग की ओर कूच करते देखे गये। इन यात्रियों के चेहरे पर थकान के बजाए बाबा के द्वार पर पहुंचने की खुशी झलकती है।
बीकानेर से रामदेवरा तक करीब 200 किलोमीटर पैदल यात्रा करने वाले करीब एक लाख से अधिक लोगों में महिलाओं की संख्या अधिक दिखाई दी। इनके हाथों में पताकाएं हैं। इन्हें जंगल में रात्रि विश्राम अथवा भोजन आदि की कोई परवाह नही। सभी व्यवस्थाएं देश-विदेश में रहने वाले मारवाडी सेठ साहूकार और दानदाता स्वप्रेरित होकर करते हैं। यात्रियों का काम केवल चलना और विश्राम करना है। पिछले दस दिन से यात्रियों की सेवा में दिन रात लगे हुए पूनम गहलोत ने बताया कि सुबह चाय-नाश्ता , दोपहर को भोजन फल अथवा फलों का रस, दूध छाछ बिस्किट,ब्रेड बीकानेरी भुजिया और बूंदी लिये जगह जगह सेवार्थी यात्रियों की आवभगत में जुटे हुए हैं । गहलोत ने बताया कि पैदल यात्रियों की सेवा करने से परमार्थ की भावना प्रबल होती है।
मिंडा महाराज सेवा संस्था के कार्यकर्ता हीरा लाल हर्ष का कहना है कि जोधपुर की ओर से आने वाले यात्री रामदेवरा से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित पंच पीपडी से समूह के साथ नाचते गाते मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं वहीं कई यत्री मनोती पूरी होने पर वहां से दण्डवत करते हुए बाबा के दरबार में हाजरी लगाने जाते हैं । उन्होंने बताया कि पंच पीपडी पर बाबा रामदेव के साथ पांच पीर फकीरों का संवाद हुआ था। इन पीरों ने बाबा के समक्ष नतमस्तक होते हुए 'बाबा को पीरों का पीर' कहा था। यहां पीरों के दांतुन कर फेंकी गयी लकड़ियों ने पीपल के पेड के रूप में वटवृक्ष का रूप धारण कर लिया जो आज भी मौजूद है। यहां भी बाबा रामदेव का मंदिर है जहां यात्री विश्राम करने के बाद रामदेवरा की ओर प्रस्थान करते हैं।
इसी तरह बीकानेर यात्रा मार्ग पर करीब पांच किलोमीटर पहले डाली बाई के मंदिर पर चूर गंगानगर, हनुमानगढ, हरियाणा पंजाब, सरदारशहर और बीकानेर सहित अन्य स्थानों से आने वाले पैदल जातरू दर्शन और विश्राम करते हैं। यहां से सैंकडों यात्री दण्डवत करते हुए समाधि स्थल तक पहुंचते हैं। पैरों में छाले पड़ जाने पर यात्रियों के छालों में दवा लगाने के साथ ही पट्टी बांधने, उनकी मालिश करने और बीमार यात्रियों की तीमारदारी करने वाले भक्तों की भी कमी नही है। हालांकि बरसात नही होने के कारण इस बार पैदल यात्रा करने वालों को काफी कठिनाइयां हो रही हैं लेकिन बाबा के भक्ति-भाव के सामने सारे कष्ट गौण दिखाई देते हैं। ऐसा लगता है सभी रास्ते रामदेवरा की ओर जा रहे हैं। दूर तक निगाह डालने पर चारों ओर यात्रियों की भीड़ दिखाई देती है।
रामदेवरा मेले में लाखों यात्रियों की उपस्थिति के बावजूद कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए पुलिस और प्रशासन को कोई खास परेशानी नही होती। हजारों लोग कतारबध्द होकर आठ से दस घंटे तक दर्शन के लिए लाइन में लगे रहते हैं। उन्हें लाइन में लगे हुए ही ठण्डा पानी पिलाने वाले सेवादारों की कोई कमी नही है। मेला प्रांगण में 'जय बाबे की' उद्धोष सुनाई देता है । हालांकि काफी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं लेकिन देखने पर लगता है यहां यात्री अनुशासित होकर बाबा की समाधि की परिक्रमा करने के बाद गंतव्य को रवाना हो जाते हैं।
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