कावेरी नदी पंचाट बैठक की अध्यक्षता करेंगे मनमोहन


बेंगलूर/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बुधवार को नौ साल में पहली बार हो रही कावेरी नदी पंचाट की बहुप्रतीक्षित बैठक की अध्यक्षता करेंगे । इस दौरान तमिलनाडु की इस मांग पर चर्चा की जाएगी कि नदी के पानी पर आधारित उपजने वाली फसलों को बचाने के लिए कर्नाटक तत्काल कावेरी नदी से पानी छोड़े। बैठक में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के शामिल होने और पंचाट के समक्ष मामला रखे जाने की उम्मीद है । जयललिता दोनों राज्यों के बीच जल विवाद के संबंध में इस तरह की बैठक की कापी जोरशोर से मांग कर रही थीं। वर्ष 2004 में संप्रग सरकार के सत्ता में आने के बाद 1997 में स्थापित पंचाट की यह पहली बैठक है। बैठक के काफी हंगामेदार होने की संभावना है क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने रूख पर अड़े रह सकते हैं । जयललिता के अतिरिक्त कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के उनके समकक्ष भी पंचाट की बैठक में उपस्थित होंगे। इससे पहले इसकी अंतिम बैठक वर्ष 2003 में हुई थी । बैठक में जटिल मुद्दे के स्थाई समाधान और तमिलनाडु की इस मांग पर चर्चा होगी कि धान की फसल को बचाने के लिए कर्नाटक को तत्काल पानी छोड़ना चाहिए ।यह बैठक उच्चतम न्यायालय के उस आदेश के बाद हो रही है जिसमें बैठक नहीं कराने के लिए तीन सितंबर को प्रधानमंत्री कार्यालय को झाड़ लगाई गई थी। कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के पानी के बंटवारे से जुड़ा विवाद वर्ष 1990 के दशक से चला आ रहा है । दो दशक से अधिक समय से इस मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच तकरार चल रही है । दोनों राज्य अब इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में लड़ाई लड़ रहे हैं । कावेरी जल विवाद पंचाट ने वर्ष 2007 में सभी संबंधित राज्यों को पानी का हिस्सा देते हुए अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। उच्चतम न्यायालय में तमिलनाडु ने अपने आवेदन में कहा था कि वर्तमान सिंचाई वर्ष 2012-2013 के दौरान हालांकि, कर्नाटक के कावेरी जल ग्रहण क्षेत्र में दक्षिण पश्चिमी मानसून ठीक नहीं रहा, लेकिन कर्नाटक ने 20 जुलाई तक अपने चार बड़े जलाशयों में 21.9 टीएमसी फुट पानी प्राप्त किया। तमिलनाडु ने शिकायत की थी कि बाद के सालों में कर्नाटक केंद्रीय जल आयोग, कावेरी निगरानी समिति द्वारा तय किए गए जल बंटवारे के फॉर्मूले पर सहमत नहीं हुआ । इसके साथ ही उसने पानी का सभी प्रवाह अपने जलाशयों में कर लिया और तमिलनाडु को इसके हिस्से का वैध प्रवाह हासिल करने से वंचित कर दिया।

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Posted by on Sep 17 2012. Filed under राज्य. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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