बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे राजकपूर


मुंबई। भारतीय सिनेमा जगत के पहले शो मैन कहे जाने वाले राजकपूर को एक ऐसी शख्सियत के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने न सिर्फ अभिनय, साथ ही निर्माण, निर्देशन से भी दर्शकों को दीवाना बनाए रखा। 14 दिसंबर 1924 को पेशावर (पाकिस्तान) में जन्मे राजकपूर का रूझान बचपन से ही फिल्मों की ओर था और वह अभिनेता बनना चाहते थे। उनके पिता पृथ्वीराज कपूर फिल्म इंडस्ट्री के जाने माने अभिनेता थे। राजकपूर ने अपने सिने करियर की शुरूआत बतौर बाल कलाकार वर्ष 1935 में प्रदर्शित फिल्म इंकलाब से की। मुख्य अभिनेता के तौर पर वर्ष 1947 में प्रदर्शित फिल्म नीलकमल उनकी पहली फिल्म थी। राजकपूर फिल्मों मे अभिनय के साथ ही कुछ और भी करना चाहते थे। वर्ष 1948 में प्रदर्शित फिल्म आग के जरिए राजकपूर ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रखा और आरके फिल्मस की स्थापना की। उस समय राजकपूर की उम्र महज 24 वर्ष थी। फिल्म आग की सफलता के बाद राजकपूर ने कई कामयाब फिल्मों का निर्माण और निर्देशन किया। वर्ष 1952 में प्रदर्शित फिल्म आवारा राजकपूर के सिने करियर की अहम फिल्म साबित हुई। फिल्म की सफलता ने राजकपूर को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई फिल्म का शीर्षक गीत आवारा हूं या गर्दिश में हूं आसमान का तारा हूं देश-विदेश में बहुत लोकप्रिय हुआ। राजकपूर के सिने करियर में उनकी जोड़ी अभिनेत्री नर्गिस के साथ काफी पसंद की गई। दोनों ने बरसात, अंदाज 1949 जान पहचान, प्यार (1950) आवारा (1951), अनहोनी आशियाना, अंबर (1952) आह, धुन, पापी (1953) श्री 420 (1955) जागते रहो और चोरी चोरी (1956) जैसी कई फिल्मों में एक साथ काम किया। फिल्म श्री 420 फिल्म में बारिश में एक छाते के नीचे फिल्माए गीत प्यार हुआ इकरार हुआ में नर्गिस और राजकपूर के प्रेम प्रसंग के अविस्मरणीय दृश्य को सिने दर्शक शायद ही कभी भूल पाएं। राजकपूर ने अपनी बनाई फिल्मों के जरिए कई छुपी हुई प्रतिभाओं को आगे बढने का मौका दिया जिनमें संगीतकार शंकर जयकिशन, गीतकार हसरत जयपुरी, शैलेन्द्र और पार्श्वगायक मुकेश जैसे बड़े नाम शामिल है। वर्ष 1949 में राजकपूर की निर्मित फिल्म बरसात के जरिए राजकपूर ने गीतकार के रुप में शैलेन्द्र, हसरत जयपुरी और संगीतकार के तौर पर शंकर जयकिशन ने अपने कैरियर की शुरूआत की थी। पार्श्वगायक मुकेश को यदि राजकपूर की आवाज कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी। मुकेश ने राजकपूर अभिनीत सभी फिल्मों में उनके लिए पार्श्वगायन किया। मुकेश की मौत के बाद राजकपूर ने कहा था-लगता है मेरी आवाज ही चली गई है। वर्ष 1971 में राजकपूर ने फिल्म मेरा नाम जोकर का निर्माण किया जो बाक्स ऑफिस पर बुरी तरह नकार दी गई। अपनी फिल्म मेरा नाम जोकर की असफलता से राजकपूर को गहरा सदमा पहुंचा। उन्हें काफी आर्थिक क्षति भी हुई। उन्होंने यह निश्चय किया भविष्य में यदि वह फिल्म का निर्माण करेंगे तो मुख्य अभिनेता के रूप में काम नहीं करेगे। वर्ष 1973 में राजकपूर ने अपने पुत्र ऋृषिकपूर को लेकर फिल्म बाबी का निर्माण किया।

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Posted by on Jun 2 2012. Filed under सामायिक अग्रलेख. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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