आदर्श प्रधानमंत्री के तौर पर याद किए जाते हैं शास्त्री
नई दिल्ली। भारत के लाल स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री ने देश की बागडोर ऐसे समय में संभाली जब प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद देश कुशल नेतृत्व के संकट से जूझ रहा था। दूसरे प्रधानमंत्री के रूप ने लाल बहादुर शास्त्री ने राष्ट्र को एक गरिमामय नेतृत्व प्रदान किया।
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म दो अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में एक गरीब परिवार में हुआ। बचपन से ही संघषर्शील रहे शास्त्री ने देश की आजादी की लड़ाई में जम कर भाग लिया और आजादी के बाद भारतीय राजनीति को अहम दिशा प्रदान की। भारतीय राजनीति में समय बीतने के साथ ही अपने अद्भुत मानवीय गुणों के कारण शास्त्री पहले से कहीं अधिक प्रभावी और आकर्षक राजनेता के तौर पर याद किए जाने लगे। प्रधानमंत्री के पद पर बैठने वाले भारतीयों की कतार में सादगी, सदाचार, सेवा और शिष्टाचार के चार आभूषणों से सुसज्ज्ाित लाल बहादुर शास्त्री सबसे प्रभावशाली और सम्मानित प्रधानमंत्री नजर आते है, जो अपने आप में अतुलनीय हैं। सत्ता और भ्रष्टाचार के बीच चोली दामन के साथ के इस दौर में लाल बहादुर शास्त्री का उज्ज्वल चरित्र और सदाचार उन्हें बुलंदी के एक अलग मुकाम पर पहुंचाते हैं और लोग उनमें एक आदर्श प्रधानमंत्री की छवि देखते हैं। शास्त्री जी का कार्यकाल काफी छोटा रहा, लेकिन उस छोटे से समय में ही उन्होंने विदेश नीति को एक नई दिशा और गति प्रदान की।
पाकिस्तान के साथ हुए युध्द में उन्होंने ऐसे कदम उठाए जो काफी प्रशंसनीय रहे। इससे लगा कि भारत बल प्रयोग करने में नहीं हिचकेगा और इसके बाद जय किसान के साथ-साथ जय जवान भी कहा जाने लगा। इसके अलावा शास्त्री जी को दो और बातों के लिए याद किया जाता है। पहला, प्रधानमंत्री सचिवालय की स्थापना और दूसरा परमाणु को अस्त्र के रूप में प्रयोग को उन्होंने नई दिशा। इससे पहले भारत परमाणु का प्रयोग शांति के साथ विकास में करता था। शास्त्री का बचपन काफी संकट में बीता। जब वह डेढ़ साल के थे उसी समय उनके पिता का निधन हो गया। शास्त्री ने बचपन में काफी कठिनाइयों का सामना किया। शायद यही वजह थी कि उन्होंने जीवन में कभी भी हार मानना नहीं सीखा। उनके शासन काल में पाकिस्तान के साथ हुए युध्द में उन्होंने उसे करारी शिकस्त दी। भारत-पाकिस्तान युध्द के बाद शांति समझौते के लिए ताशकंद गए तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का 61 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने के कारण 11 जनवरी 1966 को निधन हो गया। वह भारत के एक मात्र प्रधानमंत्री हैं, जिनका कार्यकाल के दौरान निधन हुआ।
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