तारीफ व आलोचनाओं के बीच राहुल

शांतिप्रिय
पंडित जवाहर लाल नेहरू की बेटी का परिवार इस देश की राजनीति में रच-बस गया है। इसी परम्परा को राहुल गांधी भी निभा रहे हैं। सच कहा जाए तो राहुल गांधी उतना नहीं कर रहे या कह रहे जितना उनको लेकर दूसरे कहते हैं। अभी 10 दिसम्बर को दिल्ली में अन्ना हजारे ने राहुल गांधी को ही निशाना बनाया और संसद की स्थायी समिति द्वारा अन्ना टीम के मुताबिक लोकपाल बिल पेश करने पर राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया गया जबकि राहुल गांधी उस स्थायी समिति के सदस्य नहीं हैं। अन्ना हजारे ने कहा यह सब राहुल के इशारे पर हो रहा है क्योंकि और किसी में इतना दम नहीं जो ऐसा करवा सके।
राहुल गांधी गरीब के घर में रात्रि विश्राम करते हैं, वहां खाना खाते हैं और उनका दु:ख दर्द पूछते हैं तो तारीफ की जाती है। गांव-गांव घूम रहे राहुल गांधी की तारीफ कांग्रेस की प्रतिद्वदी भाजपा के कई नेता भी कर चुके हैं।
राहुल गांधी को लेकर श्रीमती सोनिया गांधी ने कोई जल्दबाजी नहीं की। पीवी नरसिंह राव से पार्टी अध्यक्ष की बागडोर लेकर सोनिया गांधी अर्से तक अकेले चलती रहीं, लेकिन अपने बेटे और बेटी को भी वे रास्ते जरूर दिखा दिए जिन पर आगे उन्हें चलना पड़ सकता था। बेटी प्रियंका ने तो घर बसाकर राजनीति से खास प्रयोजन नहीं रखा, लेकिन राहुल गांधी ने राजनीति की एक-एक सीढ़ी तय की है। कुछ उत्साही लोग राहुल को सीधे प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठाना चाहते थे, लेकिन सोनिया गांधी ने राहुल को राजनीति की लंबी पारी खेलने के लिए अभी तक राष्ट्रीय महासचिव की कुर्सी तक पहुंचाया है। इसी बीच उन्हें देश की जनता को और उसकी समस्याओं को समझने के साथ ही राजनीति को समझने का भी मौका दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में मिशन-2012 के तहत राहुल गांधी उम्मीदवारों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तैयार कर रहे हैं। उनकी समझ में ‘भितरघात’ जैसी बातें भी आने लगी हैं। कई जगह टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में झगड़ा हुआ, यह बात राहुल गांधी को अब विचलित नहीं करती। शुरुआत में इससे वह परेशान हो जाते थे और समझ में नहीं आता था कि क्या करें? अब उनके एक तरफ रीता बहुगुणा जोशी और दूसरी तरफ प्रमोद तिवारी तथा पीएल पूनिया चलते हैं, तो भी कोई परेशानी नहीं होती। इस प्रकार की गुटबाजी सभी राजनीतिक दलों में चल रही हैं। राहुल गांधी को इसी गुटबाजी के बीच प्रदेश में करिश्मा करना है।
उन्होंने एक चेहरा और शामिल किया है-वह है सुरेन्द्र नाथ अवस्थी उर्फ पुत्तू भैया का। प्रदेश के एक दिग्गज नेता पुत्तू अवस्थी के कांग्रेस में वापसी का विरोध कर रहे थे लेकिन राहुल गांधी ने उन्हें (पुत्तू अवस्थी को) बहुत महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। पुत्तू अवस्थी कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे, यह बात वह पहले ही कह चुके हैं और न अपने बेटे को चुनाव लड़ाएंगे जैसी कि अटकलें लगाई जा रही थीं। उल्लेखनीय है कि उनका बेटा आशुतोष अवस्थी उर्फ टिंकू भैया बाराबंकी के हैदरगढ से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। इस प्रकार राहुल गांधी की प्रदेश पर चौकस निगाहें हैं और यह चेतावनी सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रहेगी कि भितरघात करने वालोें पर सख्त कार्यवाई होगी। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशियों को जो सीटे दी हैं, वह पिछली बार की अपेक्षा भिन्न हैं। राहुल ने कहा है कि वह सिर उठाकर जनता से वोट मांगें क्योंकि कई दशक से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं रही है और जितनी भी दुश्वारियां दिख रही हैं, वह विपक्षी दलों की देन हैं। जनता गैर कांग्रेसी सरकारों से अब ऊब चुकी है। अब वह कांग्रेस की सरकार चाहती है। सपा, बसपा और भाजपा की सरकारों की विफलता को खुलकर सामने रखें और केन्द्र की यूपीए सरकार की मनरेगा जैसी योजनाओं को विस्तार से बताएं कि किस प्रकार इन पर ईमानदारी से काम नहीं हो रहा है।
कांग्रेस को राहुल गांधी का मजबूत नेतृत्व मिल रहा है, यह बात साबित कर दी है, अन्ना हजारे ने। गत 10 दिसंबर के दिल्ली पहुंचकर अन्ना हजारे ने सीधे राहुल गांधी को निशाना बनाया है। अन्ना हजारे कांग्रेस के खिलाफ जितना ही मुखर होंगे, उतनी ही कांग्रेस मजबूत होगी। विपक्षी दल के नेता शरद यादव (जदयू) ने कहा भी कि इस तरह संसद पर दबाव नहीं बनया जाना चाहिए। भाजपा को भी मजबूरन अन्ना के खिलाफ ही खड़ा होना पड़ेगा। क्योंकि यह बात वह कह नहीं सकती कि लोकपाल बिल को बनाने में सिर्फ कांग्रेस जिम्मेदार है। लोकपाल बिल पर बहस में अरूण जेटली, शरद यादव, एबी वर्धन, वृन्दा करात, राम गोपाल यादव और चन्द्र बाबू नायडू भी शामिल होंगे। इससे पूर्व ही अन्ना हजारे ने राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहरा दिया है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगले प्रधानमंत्री राहुल गांधी ही होंगे। अब सोनिया गांधी को राहुल के लिए करने को कुछ नहीं रह गया है। इन्हीं आलोचनाओं और तारीफों के बीच वे राजनीति की मंजिल पर आसानी से पहुंच पाएंगे या नहीं यह देखना है। (हिफी)

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Posted by on Dec 15 2011. Filed under सामायिक अग्रलेख. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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