बेंगलूरु। सार्वजनिक क्षेत्र के हिंदुस्तान एरोनॉटिक लिमिटेड के स्वदेशी हॉक-आई ने सफलतापूर्वक अपनी पहली उ़डान भरी। स्वदेशी रियल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (आरटीओएस) से लैस है हॉक-आई, जिसे सार्वजनिक सुरक्षा क्षेत्र के हिंदुस्तान एरोनॉटिक लिमिटेड (एचएएल) ने विकसित किया है।यह पहला स्वदेशी आरटीओएस है, जिसे बिना किसी बाहरी मदद के देश में ही विकसित किया गया है। एचएएल के मुख्य प्रबंध निदेशक टी सुवर्णा राजू ने बताया कि अपने आप में यह पहली मिसाल है कि किसी स्वदेशी आरटीओएस को सेमी-लैक (उएचखङअउ) ने प्रमाणित किया है। आरटीओएस एक ऐसी सॉफ्टवेयर व्यवस्था है जो सुरक्षित और विश्वसनीय तरीके से मानक कार्यविधि वातावरण (रन-टाइम एनवायरमेंट) प्रदान करता है।राजू ने कहा कि बहुविधि अनुप्रयोग और हार्डवेयर साधनों के सर्वोत्कृष्ट उपयोग के समवर्ती निष्पादन के लिए आरटीओएस एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो आधुनिक विमानन सॉफ्टवेयर की ब़ढी हुई जटिलता के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण कारक है।बुधवार को जारी प्रेस बयान में यह भी कहा गया कि नेटवर्क सिद्धांत और फाइल व्यवस्था जैसे उन्नत मॉड्यूल्स को आईआईटी ख़डगपुर के साथ मिल कर विकसित किया गया है। गौरतलब है कि मौजूदा समय में विदेशी आपूर्तिकत्र्ताओं द्वारा मुहैया कराए जा रहे वाणिज्यिक आरटीओएस के जरिए भारत में विमानन व्यवस्थाएं विकसित की जाती रही हैं।गौरतलब है कि आयातित तकनीक महंगी प़डती है और उसमें कुछ ऐसी विशिष्टताओं शामिल करने की गुंजाइश बहुत ही सीमित होती है। आयातित आरटीओएस हमारी विमानन व्यवस्था के मद्देनजर असुरक्षित भी हो सकती है। साइबर हमले की आशंका हमेशा बनी रहती है। विदेश पर निर्भरता से निजात पाने और स्वनिर्भरता के मद्देनजर एचएएल ने स्वदेशी आरटीओएस को डिजाइन किया है। एकीकृत मॉड्यूलर विमानन (आईएमए) वास्तुकला को सपोर्ट करने के लिए एचएएल का आरटीओएस अंतर्राष्ट्रीय विशिष्टता (एआरआईएनसी-६५३) पर आधारित है और संपूर्ण वैशिष्टय प्रदान करता है। एचएएल के हॉक-आई प्रशिक्षण विमान के मिशन कंप्यूटर पर आरटीओएस के प्रदर्शन का निरीक्षण किया गया। एचएएल के अनुसार यह स्वदेशी आरटीओएस उ़डान के दौरान हर तरह की सहूलियतों से लैस है। भविष्य में देश में किसी तरह की विमानकी व्यवस्था के विकास में एचएएल- आरटीओएस मानक वास्तविक-टाइम अनुप्रयोग व्यवस्था बन सकता है।

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