pain in neck
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बेंगलूरु। इंसान का जीवन आजकल बहुत ही व्यस्त हो गया है, खासकर शहरों में रहने वाले इंसानों का। शहरों में रहने वाले लोग इतने व्यस्त होते हैं कि दिनभर भागदौड़ के पश्चात पता ही नहीं चलता कि हमें कब किसी नई बीमारी ने आ घेरा है। व्यस्तता के कारण ही उपजने वाली एक बीमारी है गर्दन का दर्द। गर्दन प्रकृति की मनुष्य को एक नायाब देन है। इसका काम न सिर्फ हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग सिर को सहारा देना है बल्कि इसका लचीलापन भी हमारे लिए बहुत जरूरी होता है।

दरअसल यह गर्दन का ही करिश्मा है कि एक पल में यदि हम आसमान की ओर देख सकते हैं तो दूसरे ही पल धरती पर। और यदि हम चाहें तो आगेपीछे, अगलबगल का नजारा भी ले सकते हैं।

– गर्दन को अपनी इस बहुमुखी उपयोगिता की कीमत भी चुकानी पड़ सकती है। गलत मुद्राएं अपनाने, सदा तनाव में रहने, उम्र का तकाजा होने और तरह तरह की टूटफूट के कारण गर्दन दर्द के जाल में फंस जाती है। कभी—कभी तंत्रिकाओं के दबने से दर्द कंधों, छाती और बाहों में भी जाने लगता है। दर्द के कारण कई परेशानियां उत्पन्न हो जाती हैं व हमें फिजियोथेरेपिस्ट और डॉक्टरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, पर गर्दन का दर्द इतनी आसानी से नहीं जाता।

– गर्दन के दर्द के लिए जितनी जरूरत इलाज की है उतनी ही जरूरत इसकी देखभाल की भी है। हमें अपनी आदतों में सुधार लाना होता है ताकि गर्दन पर व्यर्थ का तनाव न रहे। अपनी गर्दन के साथ हमेशा नरमी से बर्ताव करना चाहिए। शतुरमुर्ग की तरह गर्दन को उचकाना या लंबे समय तक सिर झुका कर बैठना गर्दन के लिए तकलीफदेह है। इस तरह के अनुचित व्यवहार से गर्दन दर्द का शिकार बन जाती है।

– अक्सर सब जानते समझते हुए भी हम गर्दन का उल्टापुल्टा इस्तेमाल करने से नहीं चूकते। कई बार तो हम हाथों की जगह गर्दन का इस्तेमाल करते हैं, हाथों से कोई और काम करते रहते हैं और गर्दन से टेलीफोन रिसीवर, कान के पास दबाए रखते हैं। लिखते—पढ़ते समय हम अपनी गर्दन को आमतौर पर आगे की ओर झुकाकर रखते हैं यह एक गलत मुद्रा है इससे बचने के लिए ढलानदार मेज का इस्तेमाल करना चाहिए या फिर पुराने जमाने के मुनीमों की तरह बैठकर लिखना—पढ़ना चाहिए ताकि गर्दन पर एक भी बल न पड़ने पाए। इसके अलावा हमें काम के बीच गर्दन को चैन की सांस भी देनी चाहिए।

— कुछ पेशे ऐसे होते हैं जिनमें गर्दन पर जोर रहता ही है। जैसे डॉक्टर, लेखक, सौन्दर्य विशेषज्ञ, केश सज्जाकार और टाइपिस्ट इत्यादि। इन सभी को कमोवेश दिन भर गर्दन को झुकाकर रखना पड़ता है। इनके लिए पेशा बदलना तो शायद संभव नहीं है पर जहां तक संभव हो सके गर्दन को आराम देने की आदत डालनी चाहिए। साथ ही गर्दन की पेशियों को मजबूत बनाने के लिए नियमित रूप से रोजाना गर्दन के व्यायाम भी करने चाहिएं।

– आराम गर्दन के दर्द की सबसे चमत्कारी दवा है। अगर गर्दन में जरा भी अकड़न और दर्द महसूस हो तो समझ लीजिए कि समस्या बिल्कुल सामने खड़ी है अब और लापरवाही ठीक नहीं। सरवाइकल कालर पहनकर गर्दन को पूरा आराम दें, इससे दर्द से राहत मिलेगी। अगर तकलीफ ज्यादा है तो अस्थिविशेषज्ञ या रिहैबिलिटेशन विशेषज्ञ की मदद लें। गर्दन का दर्द होने पर समय से दवा लेनी चाहिए। दवा लेने में आनाकानी भी न करें, क्योंकि समय से इलाज शुरू करके समस्या से जल्दी छुटकारा पाया जा सकता है। इसमें सूजन दूर करने वाली दर्द निवारक दवाएं काफी फायदा करती हैं। निमूलिड इबूप्रोफेन, पैरासिटामोल और डाइक्लोफिनेक सोडियम अच्छी दर्द निवारक दवाएं हैं। लेकिन दमा और अल्सर के रोगियों को यह दवाएं लेते समय ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इनसे उनकी तबियत बिग़ड सकती है।

– नमीयुक्त गरम सेंक भी चमत्कारिक दर्द निवारक का काम करता है। यह नम गर्माहट ऊतकों में गहराई तक पहुंचकर गर्दन तथा मांसपेशियों और स्नायुओं को तनाव से मुक्ति दिलाती है। इसके लिए एक बड़ा तौलिया लेकर गर्म पानी में डुबाएं, फिर हल्का सा निचोड़ें और अपनी गर्दन के चारों ओर लपेटें। गर्म पानी में नहाने से भी गर्दन के दर्द से राहत मिलती है। गर्दन में दर्द शुरू होने पर तकिए को बदल दें और एक ऐसा तकिया ले लें जो गर्दन की रीढ़ की गोलाई के अनुरूप हो। बाजार में इसके लिए सरवाईकल पिलो उपलब्ध हैं।

– हर समय तनाव में रहने से शरीर की पेशियां भिंची रहती हैं। इससे गर्दन में भी अकड़न और दर्द शुरू हो सकता है। वैसे भी तनाव से पैदा होने वाला एडरेलीन हार्मोन कुछ खास आपातकालीन स्थितियों को छो़डकर हमारे लिए नुकसानदेह ही साबित होता है। उसकी अतिशयता से बचें। काम के साथसाथ आमोदप्रमोद के लिए भी समय जरूर निकालें। इससे आपकी थकी, अकड़ी गर्दन को सचमुच बहुत राहत मिलेगी।

– बड़े-बूढ़ों की सलाह मानें और ठंडे मौसम में गर्दन को हमेशा ढंककर रखें या तो मफलर पहन लें या फिर कॉलर ऊपर कर लें। जैसे भी हो, गर्दन को ठंडी हवा से बचाकर रखें, क्योंकि ठंडी हवा लगने से गर्दन में अक़डन और दर्द बढ़ जाता है। गर्दन को चुस्त—दुरुस्त रखने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट की मदद लें। उससे शरीर और गर्दन की सही मुद्राएं जान लें और हम अक्सर क्या गलतियां किया करते हैं, यह भी अच्छी तरह से समझ लें। साथ ही गर्दन की पेशियों और अस्थिबंधों को मजबूत बनाने वाले व्यायाम भी सीख लें। किसी एक खास जगह पर ही अकड़न और दर्द हो, तो उस भाग में अल्ट्रासॉनिक और डामाथरमी लगवाना काफी फायदेमंद होता है। मगर मेरू कशेरूका के सरकने या बढ़ने से तत्रिकाएं भिंच रही हों तो इस दबाव से मुक्त होने के लिए गर्दन को ट्रैक्शन की जरूरत भी पड़ सकती है।

– व्यायाम एक ऐसी चीज है जो हमार शरीर को स्वस्थ रखता है और हमारी सेहत की देखभाल करने में सहायता भी करता है। गर्दन के दर्द में भी व्यायाम निश्चित रूप से लाभदायक होता है। इसलिए प्रतिदिन गर्दन के व्यायाम के लिए भी समय जरूर निकालें। इससे पेशियां मजबूत होंगी और गर्दन के जोड़ सक्रिय हो कर काम कर सकेंगे। फिजियोथेरेपिस्ट से व्यायाम के सही तरीके सीख लें। फिर स्वयं ही इन्हें अपने दैनिक आचरण में स्थान दें।

– कुछ सरल व्यायाम के उदाहरण यहां दिए जा रहे हैं। आप इन पर अमल करके देखिए। सीधे खड़े हो जाएं या बैठ जाएं। दोनों हाथों को माथे के ऊपर सामने की ओर रखें। अब गर्दन की मांसपेशियों को कसकर हाथों को बाहर की ओर धकेलें लेकिन दूसरी ओर से हाथों से भी उतना ही जोर लगाकर सिर को अपनी जगह पर स्थिर रखें। पांच सेकेंड तक रुकने के पश्चात गर्दन को बिल्कुल ढीली छोड़ दें। यह व्यायाम पांच से दस बार दोहराएं। एक दूसरा व्यायाम कुछ इस प्रकार से है। दोनों हाथ आपस में बांध कर सिर के पीछे रखें। सिर से हथेलियों पर पीछे की ओर दबाव डालें और हथेलियों से सिर को पीछे की ओर जाने से रोकें। पांच सेकेंड तक गिनने के पश्चात गर्दन को बिल्कुल छोड़ दें। यह व्यायाम भी पांच से दस बार तक दोहराएं।

– इसके अलावा एक और व्यायाम को आप कर सकते हैं। पहले सिर से बायीं ओर बायीं हथेली और फिर दायीं ओर दायीं हथेली रखते हुए यही क्रिया दोहराएं। आवश्यकता इस बात की है कि कोई भी व्यायाम करने से पूर्व या किसी भी दवा का सेवन करने से पहले किसी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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